08 अप्रैल 2022

"अपना घर" - एक सपना (भाग-1)

मित्रों,

इस वर्ष का यह मेरा पहला लेख है पिछले 4 महीने से मैं कुछ लिख नहीं पा रहा था लिखना तो मैं रोज चाहता हूँलेकिन हम अपने जीवन में जो-जो बातें चाहते हैं .सारी की सारी पूरी हो नहीं पाती होनी भी नहीं चाहिएपूरी सिर्फ उतनी ही बातें हो पाती है.. जो ईश्वर चाहते हैं।

आज हम एक ऐसे विषय की चर्चा करेंगे जो इस संसार का हरेक सांसारिक व्यक्ति चाहता है वह है - "अपना घर"

"घर" शब्द का अर्थ बहुत ही व्यापक है।

पहले घर के एक अर्थ का चर्चा करते हैं... जो ईट सीमेंट /मिटटी या फुस का बना होता है उसे मकान भी कहते हैं।

चाहे अम्बानी जैसा कोई अमीर व्यक्ति हो या सड़क पर भीख मांगता कोई भिखारी हरेक को एक "अपना घर" का सपना होता है... जो किसी का पूरा हो पाता है और ..किसी का नहीं भी।

अभी मोदी सरकार ने सभी गरीबों को पक्का मकान देने के कार्यक्रम को जिस तरह से आगे बढ़ाया है। मैं मोदी का उस दिन अंधभक्त हो गया जिस दिन उसने सभी घर में शौचालय बनाने का योजना बनाया। गरीब महिलाओं के शौचालय जैसे जरुरत को समझने बाला प्रधानमंत्री और गरीब व्यक्ति के "अपना घर" के सपनो को पूरा करने बाला प्रधानमंत्री का अंधभक्त होने में मुझे गर्व है।

एक सांसारिक मनुष्य के जीवन का जो बड़ा से बड़ा सपना होता है वह होता है "अपना घर" इससे बड़ा कोई सपना नहीं होता।

मुझे सभी प्रकार के घर में फुस और मिटटी के घर से लेकर बंगलो में रहने का निजी अनुभव है। मैं सभी प्रकार के घरों का अपना निजी अनुभव... जिसमें कठिनाई पक्ष... और आनंद पक्ष दोनों विषय आपको बताता हूँ।

1. फुस का घर

इसे बांस और अन्य लकड़ी के सहायता से बनाया जाता है। 50 वर्ष पहले गाँव में अधिकतर घर फुस का हुआ करता था। मैं लगभग 7 वर्ष इस तरह के घर में रहा हूँ।

कठिनाई पक्ष

यह अत्यंत खर्चीला होता है और इसके मरम्मत का कार्य हर समय लगा ही रहता है।

तेज आंधी में यह पूरा क्षत-विक्षत हो जाता है। बारिश में घर में पानी गिरेगा ही।

इस घर को कोई जानवर भी तोड़ सकता है कुत्ते और बिल्ली तो इस घर में घुसने का रास्ता बना ही लेता है।

गोपनीयता नहीं होता और गोपनीय बातों को अत्यंत धीरे से बोलना पड़ता है क्योंकि एक घर से दूसरे घर की आवाज स्पस्ट सुनाई देती है।

बाहरी धूल कण के प्रवेश से साफ सफाई अधिक करना होता है।

आनंद पक्ष

जब बारिश और आंधी नहीं हो तो इस घर से अधिक आनंद और किसी घर में नहीं है।

दिन में कई सुराखों से सूरज की रोशनी आपके घरों में प्रवेश करती है और इस प्रकाश की लम्बी-लम्बी सुनहली रेखाओं का अद्भुद सौंदर्य है।

रात यदि चांदनी है तो आप सोते समय पुरे चाँद के रोशनी को घर के दीवारों को स्पर्श करते महसूस करेंगे और रात यदि अँधेरी हो तो कुछ जुगनू आपके घर में भी प्रवेश कर जायेगी और उसका जलता बुझता दिया मनमोहित करने वाला होता है।

आप प्रकृति के बहुत करीब होते है। घर का और बाहर का वातावण एक जैसा होता है। प्रकृति से इतनी निकटता आपके आत्मबोध को जागृत करने में मदद करता है।

इस घर में जितनी कठिनाई है उससे कई गुना अधिक आध्यात्मिक आनंद है।

2. मिटटी का घर-

इस घर की दीवारें मिटटी की होती है और छत बांस की बत्ती और फुस का मेरे उन 7 वर्षों में फुस के साथ-साथ एक मिटटी का घर भी था।

कठिनाई पक्ष

इस घर में सबसे अधिक उपद्रव चूहों से होती है। चूहे इस घर में अपनी घर आसानी से बना लेते हैं और कभी-कभी उन चूहों को पीछा करते सांप भी घर में घुस जाता है।

बारिश के बाद इस घर के दीवारों को दुरुस्त करना होता है और छत को भी।

आनंद पक्ष

इस घर से अधिक शारीरिक आनंद दुनियाँ के किसी भी घर में नहीं है। मिटटी की दीवारें प्रकृति के बिलकुल बिपरीत व्यव्हार करती है। गर्मी के दिनों में यह घर एकदम ठंढा रहेगा और सर्दी में गर्म। बिना एसी और हीटर का।

इस घर के सजावट को आप बार-बार बदल सकते है और एक नयेपन का एहसास कर सकते है, क्योंकि इस घर में कील ठोकना बहुत आसान होता है और आप जब चाहें अपने घर के कलैंडर फोटो आदि को परिवर्तित करके नयेपन का आनंद ले सकते है। मैं हर महीने घर के स्वरुप को बदल दिया करता था। मैं यदि कभी अपने पसंद का घर बना सका तो मैं मिटटी का घर बनाऊंगा।

3. सम्मलित टॉयलेट और बाथरूम वाला पक्का घर

मैं इस तरह के घर में लगभग 4 वर्ष रहा हूँ।

कठिनाई पक्ष

इस प्रकार के घर में आपको अधिक कठिनाई तब होती है जब आपके साथ के लोग जो टॉयलेट और बाथरूम को सम्मलित रूप से उपयोग करते हैं वे सफाई पसंद नहीं हो या लापरवाह हो। यदि किसी ने टॉयलेट को गन्दा करके छोर दिया तो वह बड़े परेशानी का कारण बन जाता है। जब आपको टॉयलेट का बेग प्रवल हो और वह बंद मिले तो एक बेचैनी को अनुभव करेंगे। यदि उनके बच्चे ज्यादा नटखट हो तो आपको परेशानी हो सकती है।

आनंद पक्ष

दुर देश में आपके जो सबसे नजदीकी लोग हैं वो यही हैं आपके बीमारी में आपके किसी भी संकट में आपके यहाँ जब कोई मेहमान जाते हैं आपको जब कभी अपने बच्चों को घर पर छोड़कर बाहर जाना होता हैंउस समय ये आपको अपने सगे भाई की तरह नजर आएंगे।

साथ में चाय पीना... कभी उनके घर का... कभी आपके घर का... आपके आत्मीयता को बढ़ता है। होली दिवाली रमजान किसी भी पर्व में आपको अपने घर का याद नहीं आएगा।

यहाँ कभी-कभी झगड़ा भी होता है लेकिन यहाँ आपको प्रेम प्रवाहित करने का अवसर है।

4. फ्लैट-

यहाँ आपको कोई नाम से नहीं जानता यहाँ आपका नंबर होता है जैसे 304 वाले अंकल 203 वाली ऑन्टी। मैं लगभग 15-16 वर्ष फ्लैट और बंगलो में रहा हूँ।

कठिनाई पक्ष

आज अधिकतर लोग फ्लैट में रहते है या रहना चाहते हैं। शहरों के ये ऊँचे-ऊँचे फ्लैटनुमा मकान कंक्रीट का एक ऐसा जंगल है जहाँ एकाकीपन के अवसाद से अधिकतर लोग विक्षिप्त हैं।

सबसे अधिक आत्महत्या फ्लैट में रहने वाले लोग करते हैं। चाहे नशा का सेवन हो या तस्करी का धंधा या कोई अन्य कुकर्म अधिकतर फ्लैट में होते हैं।

कोई किसी को पूछता नहीं है, कोई किसी को जानता नहीं है। एक साथ इतने सारे लोग रहते है और उनके बीच इतनी अधिक दुरी है, कोई मतलब नहीं है।

फ्लैट के अंदर कोई मरता है या मार दिया जाता है तो तब तक पता नहीं चलता जब तक लाश का दुर्गन्ध घर से बाहर नहीं निकले।

इतना अकेला जीवन... इतना नीरस जीवन... यह जीवन भी है या नहीं ?

फ्लैट में भी त्यौहार आदि में सम्मलित रूप से कुछ कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है लेकिन वह इतना अधिक प्रोफेशनल होता है जैसे यदि खाने का आयोजन रखा गया तो आपसे आदमी के हिसाब से चंदा लगेगा जैसे होटल में बिल दिया जाता है।

फ्लैट में आप बिना किसी दूसरे के हस्तक्षेप से अपना जीवन जी सकते हैं, यदि हस्तक्षेप नहीं होगा तो झगड़ा भी नहीं होगा और यदि झगड़ा नहीं होगा तो कभी प्रेम भी नहीं हो सकता। यह नियम हैआप उसी को सबसे अधिक प्रेम करते हैं जो आपसे झगरने के लिए तैयार बैठा हो। आप पति-पत्नी का उदाहण ले सकते हैं।

आनंद पक्ष

यदि आप आत्मसंयमी है, जीवन का कोई निश्चित लक्ष्य है और उसमे पुरे मन से लगे हुए हैं तो फ्लैट सबसे अधिक सुरक्षित जगह है यहाँ किसी से कोई परेशानी नहीं होगी, कोई अवरोध नहीं होगा।

5. बंगलो

यह फ्लैट के जैसा ही है इसमें बस इतना सुबिधा है कि आप जमीन पर हैं और यदि कभी घर के बाहर बैठे है और आते जाते किसी ने एक मुस्कान दे दिया... बस यही एक संतोष का विषय है।

6. घर विहीन लोग -

मुझे घर विहीन रहने का अनुभव नहीं है... लेकिन हमारे देश में लाखों ऐसे व्यक्ति हैं जिनको घर ही नहीं है। उनका जीवन कैसा है ?

इसका कल्पना करना भी कठीन है... जो सोने लिए तो सड़क के फुटपाथ का उपयोग कर लेता है... लेकिन अन्य मानवीय गोपनीय जरूरतों को... जो सिर्फ घर में पूरा किया जा सकता है... उसे कैसे पूरा करता होगा ?

"अपना घर" कैसा होता है ?

"अपना घर" वो नहीं होता जो हमारे माता-पिता ने हमारे लिए बनाया था।

"अपना घर" वो भी नहीं होता जो हमारे बच्चों ने बनाया या ख़रीदा और हमें उस घर के किसी कोने रहने की अनुमति हो।

"अपना घर" वो भी नहीं होता जहाँ आपके बच्चों ने बेमन से आपका नेम प्लेट तो लगा दिया है, लेकिन आपको रहने नहीं देना चाहता।

"अपना घर" वो नहीं है जो हम किराये देकर रहते है या कम्पनियाँ हमें रहने के लिए देती है।

"अपना घर" मैं फ्लैट को भी नहीं मानता हूँ जहाँ बाहरी दीवारों को अपने पसंद के रंग से रंग भी नहीं सकते।

तो फिर "अपना घर" कैसा होता हैं ?

"अपना घर" तो वो होता है जो अपनी जमीन पर हो छोटा हो बड़ा हो फुस का हो मिटटी का हो संगमरमर का हो।

"अपना घर" वो होता है जहाँ आप मास्टर बैडरूम का उपयोग कर रहे हैं।

"अपना घर" वो होता है जहाँ आप डाइनिंग टेबल के मास्टर चेयर पर बैठकर भोजन करते हैं।

"अपना घर" वो होता हैं जहाँ आपकी मर्जी से सभी वस्तुओं को व्यवस्थित किया गया है।

"अपना घर" वो होता हैं जहाँ बच्चे आपके अधीन हैं... और आप अपने माता-पिता के।

क्या आपके पास "अपना घर" है ?

"अपने घर" का एक आध्यात्मिक पक्ष

इस दुनियाँ में अपना जैसा कुछ भी नहीं है। मन्ना डे ने एक गीत गया है- "वो दुनिया मेरे बाबुल का घर ये दुनियाँ ससुराल". ससुराल में मस्ती करने के दिन सिमित होते हैं बाबुल के घर तो जाना ही पड़ेगा।

हालाँकि ये पंक्ति महिलाओं के लिए ठीक नहीं बैठता है यदि कोई महिला कलाकार इसे गयी होती तो बोलती - "ये दुनियाँ मेरे बाबुल का घर वो दुनियाँ ससुराल।"

मन्ना डे के इस शास्त्रीय संगीत का आनंद लीजिये

https://www.youtube.com/watch?v=gMT5-nTq5Jo

आप जिस किसी भी हालात हैं वहाँ खुशियाँ तलाशिये. वह हर किसी के पास मंडरा रहा है।

अगले भाग में हम घर के कुछ और अर्थो का विश्लेषण करेंगे।

आप मेरे लेख को बहुत ध्यान से पढ़ते हैं. आपका अभिनन्दन है।

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आभार

सोहन कुमार

जोधपुर से मोगा जाते हुए ट्रैन में दिनांक 08.04.2022 (शुक्रबार)



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