08 मई 2021

मदर्स डे पर विशेष

मित्रों,

कल पाश्चात्य मातृ दिवस है और सोशल मीडिया पर लोग….. माँ के चरणों.. में समर्पित नजर आएँगे।

अमेरिका की रहने वाली एक महिला जिनका नाम एना जार्विस था, उन्होंने ही अपने माँ की याद में मदर्स डे की शुरुआत की थी।

अब इसके तारीख पर भी थोड़ा विचार कीजिये….. इसका तारीख निर्धारित नहीं हैइसे मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। छुट्टी के दिन…. काम के दिन में सिर्फ पत्नी बात कर सकती है। माँ से बात करने के लिए छुट्टी होना चाहिए।

मजे की बात ये है कि एना ने कभी शादी नहीं की, तो मातृत्व का व्यक्तिगत अनुभव उसे नहीं था…. लेकिन वो अमरीका की रहने वाली एक महिला थी... जो अपने माँ के याद में.. वर्ष में एक बार.. माँ को याद करने का प्रचलन शुरू किया और हम भी बिना सोचे समझे उसी दिन मदर्स डे मनाने लगे।

हमारी संस्कृति तो माँ-बाप के साथ हमेशा रहने की ….उनका रोज गाली खाने की….. उनसे रोज रूठने और मनाने की रही है…… हमारी संस्कृति को किसी एक दिन मातृ दिवस की आवश्यकता नहीं थी।

हम तो मातृ देवो भव: पितृ देवो भव: वाले लोग थे।

अब हमारी संस्कृति, सभ्यता, मर्यादाएं और परम्पराएं भी बदल रही है। अब हम भी अपने माँ-बाप के साथ रहना पसंद नहीं करते हैं । हमारे देश में भी वृद्धाआश्रम बनने लगी और दिनानुदिन इसकी संख्या बढ़ती जा रही है।

आज के समय में आप चाहे कुछ भी कर लिजियेजिस दिन आपने बच्चे की शादी कर दी….. बच्चे आपको साथ नहीं रहेंगे शायद पहले रोज से ही।

क्या आप शादी के बाद अपने माँ-बाप के साथ है ?

यदि आपका उत्तर हाँ है तो... मैं आपका अभिनन्दन करता हूँ….और आपके पत्नी का चरण बंदन….. क्योंकि बिना पत्नी के सहयोग और उनके सुशील संस्कार से आपका ये ईश्वरीय गुण प्रगट नहीं हो सकता था।

जिस घर में आपके माँ-बाप के साथ आपके बच्चे खुसी से रह रहें हैं...लक्ष्मी और नारायण वहाँ से कहीं नहीं जाते।

यदि आप शादी के बाद अपने माँ-बापके साथ नहीं हैं…..तो मैं एक प्रश्न और पूछूंगा……….. क्यों ?

आपका संभावित उत्तर ये हो सकता है-

1. मेरे माँ-बाप को अपने पैतृक स्थान में रहना ज्यादा अच्छा लगता है।

2. मेरे माँ-बाप हमारे पास बोर हो जाते है।

3. मेरे माँ-बाप शहर के वातावरण में एडजस्ट नहीं कर पाते।

4. मेरे पत्नी से मेरे माँ का नहीं बनती है।

5. मेरे पास रहने का पर्याप्त जगह नहीं है।

ये सभीऔर अन्य सभी….. कारण गलत है…. आप ये समझ लीजिये कि इस संसार का कोई भी जीवित प्राणी अपने बच्चों से दूर नहीं रहना चाहता है….. मनुष्य तो बहुत संबेदनशील है।

और यदि आपको कोई बच्चा हो गया है तो आप अपने आप से भी ये बात समझ सकते हैं…… और आप ये यकीन मानिये कि आपके माँ-बाप भी आपको उतना ही……. या उससे कुछ अधिक ही प्यार करते है…… जितना आप अपने बच्चे को।

अपने माँ-बाप के साथ आप क्यों नहीं रहना चाहते है, इसका वास्तविक कारण मैं बताता हूँ -

1. आपके पत्नी को आपका माँ-बाप पसंद नहीं हैउनको अपना माँ बाप पसंद है...जो एकदम सहज और स्वभाविक है….. लेकिन आप अपना विवेक खो चुके ….और आपको भी अपनी पत्नी का माँ-बाप पसंद आने लगा और अपना माँ-बाप नापसंद होने लगा .... यह एकदम अस्वाभाविक है।

2. आपको अपनी पत्नी की बातों में जितनी बुद्धिमत्ता, शालीनता, व्यवहारिकता और अपने सास ससुर के प्रति जो श्रद्धा और करुणा का भाव दीखता है……..आपको लगता है कि मेरे माँ बाप को इसकी समझ ही नहीं है…. उनकी मति भ्रष्ट हो गयी है। जितना करीब से, मैं अपनी पत्नी को जनता हूँ उतना और कौन जान सकता है ?

3. शादी के बाद आपके ससुराल में और शुरू में पत्नी से जो आपको सम्मान मिलता है.. आपको लगता है कि यही वो लोग हैं जिनको मेरे सख्सियत का ज्ञान है…. वरना मेरे माँ-बाप तो मुझे आज भी बुद्धू ही समझते है….. इसलिए आपको लगने लगता है कि मेरे माँ-बाप का व्यव्हार मेरे प्रति उचित नहीं है….. उससे दूर रहना ही अच्छा है।

4. आपको अपनी पत्नी की बात जितनी जल्दी समझ में आ जाता है। माँ-बाप की बातें समझ में नहीं आती। नजदीक की आवाज स्पष्ट सुनाई देती है।

5. शादी के बाद आप अपने पत्नी के साथ स्वछंदता पूर्वक जीवन यापन करना चाहते है…. बीना किसी अवरोध के और माँ-बाप को अवरोध मानते हैं।

6. आप अपने माँ-बाप के सामने एक दूसरे के साथ उतने अशिष्ट व्यव्हार नहीं कर सकते जितने माता पिता के बगैर कर सकतें हैं।

7. आप हम दो और हमारे दो की शपथ कई बार ले चुके हैं। आपकी पत्नी तो अपने माँ-बाप के लिए कभी कभी ये शपथ तोड़ भी देती है, आपसे नहीं टूटता। आप अधिक संकल्पवान हैं।

8. शादी के बाद माँ-बाप के बूढ़े और खूसट चेहरे आपको नहीं भाता….. पत्नी का मोहिनी मुरत लुभाता है।

9. सबसे अंत में और सबसे दुःखद..... अब आपको माँ-बाप की जरुरत नहीं रही.....।

बातें कड़वी है लेकिन यह हमारे समाज का हकीकत बन चुका है।

एक बार निरपेक्ष भाव से आत्म अवलोकन करना मित्र…… रातों रात आपके माँ-बाप बदल गएया आप ???

एक बात ध्यान में रख लो…… आप अपने बच्चे को अच्छे से अच्छे स्कूल में सर्कस के बन्दर की तरह पैसे कमाने की चाहे जितनी भी कलाबाजियां सीखा दो…………….. मानवीय संबेदना तो सिर्फ संयुक्त परिवार में ही सीख सकता है। और उसका सम्बेदनहीनता आपसे अधिक होगा।

यदि आप अपने माता पिता के साथ नहीं रह रहे हो…… तो आपको मदर्स डे जरूर मनाना चाहिए। कम से कम एक दिन याद कर लो अंग्रेजों की तरह।

लेकिन इसके लिए एना जार्विस के माता का उत्सव क्यों मना रहे हो ?

हमारे देश में महापुरुषों का अकाल है ? हम भगवान महावीर की माता त्रिशला, भगवान बुद्ध की माता महामाया, अब्दुल कलाम की माता अशिअम्मा या मोदी की माता हीराबेन के सम्मान में उनकी जन्म तिथि /पुण्य तिथि को क्यों ना मातृ दिवस मनाये ?

महापुरुषों के विषय पर हम बिबाद भी कर सकते है, क्यों ना हम अपने माता के जन्म दिन को मातृ दिवस के रूप में मनायें या फिर हम अपने जन्म दिन को मातृ दिवस के रूप में क्यों ना मनायें ? जिस दिन मेरा जन्म हुआ मेरे माता का भी उसी दिन पुनर्जन्म हुआ था।

एना जार्विस के माता के याद से बाहर निकलकर जड़ा अपने वास्तविक माता के दर्द को समझने का प्रयास कीजिये। मूर्खों की तरह नक़ल मत कीजिये।

इस एना जार्विस से हमें क्या लेना देना ?

आइंस्टीन या न्यूटन की माता होती तो हम मान भी जाते..... इस एना जार्विस का क्या योगदान है हमारे देश के लिए ?

अमरीका के लिए इसका योगदान है…… कम से कम एक दिन तो माता को याद दिलाना सिखाया है।

विदेशी उत्सव को मनाने से पहले उसके कारणों का पता कीजिये, आप राम के होने का वैज्ञानिक प्रमाण ढूंढते है और मदर्स डे बिना प्रमाण का ही मनाने लगते हैं ।



भारत पश्चिम का अंधानुकरण इस भांति कर रहा है कि हर व चीज जो पश्चिम में होती है वह भारत में भी होनी चाहिए बिना उनके आधार, कारण और वैज्ञानिक-पक्ष को समझे।

जो व्यक्ति माता पिता के साथ हैं उनको आदर सहित प्रणाम कर लेने मात्र से ही मातृ दिवस मन जाएगा।

मदर्स डे मत मनाइये माता के साथ रहिये।



यदि आप माता-पिता के साथ नहीं हैं, तो आपको यह लेख पसंद नहीं आएगा लेकिन मैं इसके लिए क्षमा नहीं माँगूँगा बल्कि आपको इस विषय में एक बार फिर से विचार करने का प्रार्थना करूँगा।

आप हमारे लेख को बहुत ध्यान से पढ़ते है, आपका अभिनन्दन है।

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आभार

सोहन कुमार

मोगा, पंजाब दिनांक – 08.05.2021 (शनिबार)) (बैशाख कृष्ण- द्वादशी )



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