01 मई 2021

कोरोना से कैसे बचे ? (भाग-3 अंतिम भाग)

मित्रों,

आजकल कोरोना से बचने के लिए सोशल मीडिया पर इतने सारे उपाय आ रहे हैं…. मैं निवेदन करता हूँ कि बिना सोचे समझे और बिना विशेषज्ञ के सलाह के या बिना प्रामाणिक श्रोत के उसको अमल में ना लाएँ।

मेरे लेख के उपायों को आप अमल में ला सकते है, मैंने इसे प्रामाणिक श्रोतो से संगृहीत किया है और निजी प्रयोग कर रहा हूँ और लाभ ले रहा हूँ।पिछले दो भागों में हमने निम्नलिखित उपायों का वर्णन किया था -

1. योग कीजिये -

2. खाने-पीने में सावधानी रखिये -

3. दिन में दो बार हर्बल काढ़ा पीजिये-

4. दिन में एक बार स्टीम ( भाप) लीजिये -

5. गुड़ के साथ लौंग चबाइए -

6. मास्क पहनना /बार-बार साबुन से हाथ धोना और 2 गज की दूरी रखने का सख्ती से अमल कीजिये।

7. जब आप बाहर जाकर घर आते है- पहले नहाइये -

8. आजवाइन, लौंग और कपुर का एक छोटी पोटली बनाइये और सूंघते रहिये-

9. टीवी पर समाचार मत देखिये -

10. संगीत सुनिए-

11. एक घंटा प्रतिदिन पीपल के छांव में बैठिये -

12. ईश्वर पर विश्वास रखिये

इस अंतिम भाग में हम निम्नलिखित विषयों पर चर्चा करेंगे -

1. इस बिषय के पिछले दोनों भागों को एक बार फिर से पढ़ लीजिये -

2. शादी, उपनयन, मृत्यु भोज या अन्य किसी भी समारोह में सम्मलित मत होइए-

इस बीच मुझे, मेरे कई मित्रों और रिश्तेदारों के बच्चों के शादी का निमंत्रण था, और मैं बहुत पहले उसमे सम्मलित होने का छुट्टी और टिकट दोनों ले लिया था, परन्तु महामारी के इस बढ़ते प्रकोप के कारण मैंने अपने सभी व्यक्तिगत यात्राओं को स्थगित कर दिया और व्यावसायिक यात्राओं को जितना कम कर सकता था उतना कम कर दिया।

जीवित रहेंगे तो कम से कम वे उलहाना तो दे सकेंगे और मैं क्षमा भी माँग सकूंगा। यदि जीवित ही नहीं बचा तो उलहाना किसको देंगे और क्षमा कौन माँगेगा ?

3. शादी के सम्बन्ध में -

रिश्ते की तारीख यदि तय हो गयी है तो मैं शादी कर लेने से मना नहीं करूँगा लेकिन इस समय अत्यंत सादगी में शादी कीजिये। यदि संभव हो तो मंदिर में कर लीजिये 1000 बारातिओं से अच्छा एक भगवान का साक्षी होना होगा।

सोचिये यदि आपके शादी में कोई बीमार हो गया या किसी का देहांत हो गया……. आप जीवन में कभी marriage anniversary नहीं मना पाएँगे…. marriage anniversary के दिन आपकी खुशियाँ गायब हो जाएगी की नहीं ? …. कोई रिस्क मत लीजिये मित्र।

मंदिर में शादी कर लीजिये या पारिवारिक सदस्यों के बीच social distance maintain करके सादगी से शादी कर लीजिये और जब यह महामारी ख़त्म हो जाये अपनी anniversary या अन्य किसी भी अवसर पर शानदार पार्टी दे दीजिये। खुशियां मानाने के लिए अवसरों की कहाँ कमी है? इस समय कोई रिस्क मत लीजिये।

4. मुंडन, उपनयन या अन्य समारोह के सम्बन्ध में -

इस सम्बन्ध में भी वही नियम है जो शादी के सम्बन्ध में है। सादगी से कीजिये। मंदिर में कीजिये। पारिवारिक सदस्य मिल कर कर लीजिये।बाहरी किसी भी व्यक्ति को मत बुलाइये। जब दिन अच्छे होंगे सबको बुलाकर जश्न मनाइये। इस वक्त अपनी जान को सुरक्षित रखिये और अपने लोगों की भी जान बचाइए।

5. मृत्यु भोज के सम्बन्ध में -

मैं देख रहा हूँ कि इस भयानक महामारी में भी मृत्यु भोज बंद नहीं हो रहा है। आज भोज करने का रिवाज अनुपयुक्त, अव्यवहारिक और असामयिक हो गया है।

भोज का रिवाज उस समय उपयुक्त था, जब समाज गरीब था और एक आम आदमी को अच्छा और भरपूर भोजन नसीब नहीं था। और मृत्यु भोज में अच्छा और भरपूर भोजन करके वह अत्यंत संतुष्टि को महसूसता था। और ऐसे मान्यता थी कि इससे दिवंगत आत्मा को तृप्ति मिलती है।

हमारे समाज में भोज करना एक समाजिक स्टेटस भी हो गया है. फलां आदमी 5 गाऊँ खिलाया तो अब कोई 10 गाऊँ को खिलायेगा तब ही वह फलां आदमी से बड़ा हो सकता है। हर आदमी एक दूसरे से बड़ा दिखाना चाहता है।

व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं के लिए कम और समाज में अपना स्थान रखने के लिए ज्यादा उत्सुक है। और भोज एक ऐसा सामाजिक मंच है जहाँ आप अपने को साबित कर सकतें है कि आप कितने बड़े है।

मैं कहता हूँ कि क्या जरूरत है इस आडम्बर की जिसमे समाज का किसी भी रूप में भला नहीं हो रहा है। अब एक समय खाना खाकर संतुष्ट होने का समय बहुत पीछे छूट गया।

और इस समय ! ……….आप लोगों के जान के साथ खिलवाड़ करके अपना स्टेटस दिखाना चाहते हैं ?………. बंद कीजिये इसे।

दिवंगत आत्मा के शांति के लिए कोई ऐसा पुण्य का काम कीजिये जिससे सामाजिक कल्याण हो। जिस कार्य से किसी का भी कल्याण नहीं हो...... उस कार्य से दिवंगत आत्मा को शांति नहीं होगा।

आप एक समय खाना खिला कर किसी का कल्याण नहीं कर रहे हैे।

निमंत्रित व्यक्ति से मैं निवेदन करूँगा कि वे आदर पूर्वक निमंत्रण को अस्वीकार कर दें।

आप हमारे लेख को बहुत ध्यान से पढ़ते है, आपका अभिनन्दन है।

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अगले रविवार को मदर्स डे हैं.... अगले शनिवार को "मदर्स डे पर विशेष" जरूर पढियेगा।

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आभार

सोहन कुमार

मोगा, पंजाब दिनांक – 01.05.2021 ((शनिवार) (बैशाख कृष्ण- पंचमी)



 

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