28 सितंबर 2021

पितृपक्ष - एक विवेचना

मित्रों,

इस समय 21 सितंबर, 2021 से पितृपक्ष चल रहा है जो 6 अक्टूबर, 2021 (अमावस्या) तक है। हमारे द्वारा किए गए श्राद्ध कर्म, जलांजलि/तर्पण, पिंड दान एवं अन्य अनुष्ठान आध्यात्मिक ऊर्जा के रूप में हमारे पितरों तक पहुँचते हैं या नहीं इसे तो शायद प्रमाणित नहीं किया जा सकता।

लेकिन तत्काल जो आपको लाभ होता है, वह है आभार प्रगट करने का सकारात्मक मनोदशा।

आभार - एक चमत्कारी मनोदशा

जब आप किसी भी व्यक्ति, वस्तु, घटना या ईश्वर के प्रति आभार प्रगट करते हैं…. आप तत्काल एक सकारात्मक मनोदशा में बिना किसी प्रयास के प्रवेश कर जाते हैं। सकारात्मक मनोदशा में जीने के लिए आभार से अधिक कीमती कोई अन्य भावना नहीं है।

आप इसी समय इसका प्रयोग कर सकते हैं

अपनी आँखे बंद कीजिये किसी ऐसे व्यक्ति को याद कीजिये जो आपके लिए कुछ अच्छा किया हो और हल्की आवाज में बोलिये....... आभार।

आप तत्काल ऐसे मनोदशा में पहुँच जायेंगे जो पुजा.. प्रार्थना.. मन्त्र जाप.. योग.. ध्यान.. तीर्थ यात्रा आदि किसी भी सकारात्मक मनोदशा से अधिक शांतिपूर्ण होगा।

किसके प्रति आभार प्रगट करें

आपके इस दुनियाँ में ऐसा कुछ भी नहीं, ऐसा कोई भी नहीं जिसके प्रति आभार नहीं होना चाहिए। मित्र के प्रति तो आभार होना चाहिए........ शत्रु के प्रति भी आभार होना चाहिए।

मित्रता आपके सामर्थ्य को बढ़ाता और शत्रुता आपके सहनशीलता को।

कोई भी शत्रु आपको नुकसान नहीं पहुँचा सकता, नुकसान तो लोग अपना स्वयं ही करते हैं।

पितृपक्ष हमारे स्वर्गीय माता पिता और हमारे पूर्वजो के प्रति आभार प्रगट करने का एक महान पर्व है।

जीवित माता पिता से आपको शिकायत हो भी सकता है..... स्वर्गीय माता पिता और पूर्वजो के प्रति आभार प्रगट करना ज्यादा कठिन नहीं है।

अब थोड़ी कर्म कांड की चर्चा करते हैं

क्या आपने कभी पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं ? या, किसी को लगाते हुए देखा है ?

क्या फिर पीपल या बरगद के बीज मिलते हैं ?

*इसका जवाब है नहीं*

प्रकृति ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है।

जब कौए इन दोनों वृक्षों के फल को खाते हैं तो उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसिंग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं ।

उसके पश्चात कौवे जहां-जहां बीट करते हैं, वहां वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं। आपने कई मकानों और दीवालों पर पीपल का पेड़ देखा होगा।

पीपल इस संसार का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन देता है और वहीं बरगद के औषधि गुण अपरम्पार है।

कोरोना कल के बाद ऑक्सीजन का महत्व बताने की आवश्यकता नहीं है।

कौए की शंख्या कम होती जा रही है या कह सकते है विलिप्त होती जा रही है। मैं जब बच्चा था तो मुझे याद है कि कौवा मेरे हाथ से रोटी छीन कर भाग जाता था।

अब किसी आंगन में कौवा नजर आता है ?

कौवा के विलुप्त होने के बाद पीपल का पेड़ भी विलुप्त हो जायेगा उसके बाद क्या होगा इसकी कल्पना भी कठिन है।

*मादा कौआ* भादो महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है। जिसे पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है। शायद, इसलिए ऋषि मुनियों ने कौवों के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राघ्द के रूप मे पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी होगी।

जिससे कि कौवों की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जाये।

इसीलिए.... श्राघ्द का तर्पण करना न सिर्फ हमारी आस्था का विषय है बल्कि यह प्रकृति के रक्षण के लिए नितांत आवश्यक है ।

साथ ही... जब आप पीपल के पेड़ को देखोगे तो अपने पूर्वज तो याद आएंगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं।

अपनी संस्कृति हर दृष्टि से उत्तम और वैज्ञानिक है, आस्था बनाये रखें ।

पूर्वजों के प्रति आभार, सम्मान, और उनका पूजा आपके जीवन के हरेक दशा को..... मानसिक दशा को तो तत्काल राहत मिलता है.... इसके अलावा शारीरिक... भौतिक.... सामाजिक आदि सभी दशाओं में सुधार को अनुभव करेंगे।

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आभार

सोहन कुमार

मोगा, पंजाब दिनांक – 28.09.2021 (मंगलवार)



  

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