15 सितंबर 2021

आओ गीता सीखें। (भाग-2 ) विद्यार्थिओं के लिए

 

मित्रों,

यह लेख 7 वर्ष से लेकर 20 वर्ष के बच्चों के लिए है। मेरे मित्रों के समूह में इस उम्र के बच्चे शायद नहीं होंगे.... लेकिन हजारों ऐसे माता पिता मेरे मित्रों के समूह में हैं, जिनके बच्चे 7 वर्ष से लेकर 20 वर्ष तक के हैं और मैं उन माता -पिता से निवेदन करूँगा कि मेरे इस लेख को वे अपने बच्चों तक पहुँचाये या अपने तरीके से बच्चों को इस दिशा में प्रेरित करें।

मेरे प्यारे बच्चों,

विद्यार्थी वह व्यक्ति होता है जो कोई चीज सीख रहा होता है। तुम इस समय सीखने की दिशा में कार्य कर रहे हो। आदमी चाहे तो जीवन भर सीखता रह सकता है…. लेकिन इस समय तुम्हारी जो सीखने की क्षमता हैऔर तुम्हारे पास सीखने लिए जितना समय है.. वह बाद में नहीं रहेगा।

तुम दूसरी-तीसरी कक्षा में हो या हाई स्कूल में पढ़ रहे हो या इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट आदि की पढ़ाई कर रहे हों। जो भी कर रहे हैं उसे लगन से करना।

एक बात ध्यान रखना तुम अपनी पढ़ाई के लिए जितनी मेहनत कर रहे हो .. तुम्हारे माता पिता तुमको पढ़ाने के लिए तुमसे अधिक मेहनत कर रहें हैं.. ये बात आज तुम्हारे अनुभव में नहीं आएगा…. ये बात अनुभव में तब तक नहीं आएगा जब तक तुम खुद माता पिता नहीं बन जाते। अभी तुमको इस बात को बिना अनुभव का ही विश्वास करना चाहिएजैसे लोग भगवान पर विश्वास करते हैं।

तुम यदि भगवान को भी सिर्फ विश्वास नहीं बल्कि अनुभव करना चाहते हो तो मैं तुमको सलाह दूँगा कि तुम अपने दिनचर्या में 40 मिनट का समय गीता सिखने में लगाओ।

तुमको गीता क्यों सीखनी चाहिए ?

1. शिक्षा का उद्देश्य

हमारे उपनिषद में विद्या का अर्थ इस तरह समझाया गया है -

विद्यां ददाति विनयं विनयम ददाति पात्रताम् ।

पात्रताम् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥

अर्थात, विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है।

आधुनिक शिक्षा में विनय सीखने की कोई किताब ही नहीं है…. साधारण विद्या से विनय तो नही जन्मता बल्कि अहंकार मज़बूत होता जाता है। आज कल प्रायः जो जितना ज्यादा पढ़ लिख लेता है उतना ही अहंकारी हो जाता है ।

2. जीवन का चरम उद्देश्य

मनुष्य जीवन का चरम उद्देश्य इंजीनियर, डॉक्टर या मैनेजर आदि बनना ही नहीं हैये सब तो जीवन यापन के साधन हैंये सब बनने के बाद भी अंत में मरोगे।

गीता सिखने के बाद भी मरोगे लेकिन तब सिर्फ तुम्हारा शरीर मरेगा तुम अपने आत्मा के अमरत्व को अपने जीवन में ही समझ चुके रहोगे।

3. वर्तमान शिक्षा पद्धति

आज के आधुनिक शिक्षा पद्धति में तुम तकनिकी ज्ञान हासिल कर लोगे.. लेकिन इस तकनिकी ज्ञान में सम्बेदनाओ को सीखने की कोई किताब नहीं हैइसलिए अधिक पढ़ने लिखने के बाद लोग अधिक सम्बेदनहीन होते जा रहे हैअपने माता पिता को अपने से दुर कर देते हैंउनको अपमानित करते हैंउनको बृद्धाश्रम में छोर आते हैंऐसा सिर्फ पढ़े लिखे लोग करते हैंअनपढ़ ऐसा नहीं करता है।

मैं तो ऐसा मानता हूँ कि ऐसे पढ़े लिखे से तो अनपढ़ होना अच्छा है।

इस दुनियाँ में जितने भी बड़े आतंकवादी हैं, सब पढ़े लिखे हैं, कोई अनपढ़ नहीं है।

अधिकतर शराबी और नशेरी लोग पढ़े लिखे होते हैं।

कॉलेज और युनिवर्सिटी में नशा का जितना कारोबार होता है अशिक्षित समाज में उतना नहीं होता।

सभी बलात्कारी और अत्याचारी लोग पढ़े लिखे होते हैं।

मैं तुमको डरा नहीं रहा हूँ यह आज के शिक्षा की जीवंत सच्चाई है।

अपने नियमित शिक्षा के साथ साथ 40 मिनट गीता पढ़ने में दो । तुम वास्तविक पढ़े लिखे लोग बन पाओगे ।

4. जीवन का वास्तविक विकास-

गीता पढ़ते पढ़ते तुम्हारी चेतना निर्मल और शुद्ध हो जायेगी।

मन की चंचलता दुर होगी और संयम का विकास होगा।

चरित्रवान बनने की प्रेरणा मिलेगी।

अपने कर्तव्यों के प्रति दृढ़ता और कर्मठता बढ़ेगी।

मस्तिष्क को याद करने और याद रखने की क्षमता बढ़ जायगे।

सम्बेदनशीलता में विकास होगा।

व्यव्हार में शिष्टता बढ़ेगी।

आचरण में अनुशासन बढ़ेगा।

क्षमाशीलता और उदारता के महत्व का ज्ञान होगा।

सम्पूर्ण गीता को कंठस्थ करने में कितना समय लगेगा -

श्रीमद्भागवद्गीता में कुल 700 श्लोक हैं, यदि हम एक दिन में एक श्लोक याद कर ले…. जो बहुत आसान है मैं 58 वर्ष की अवस्था में एक श्लोक याद कर लेता हूँ तो 2 वर्ष में पूरी गीता कंठस्थ हो जायेगी।

शुरू अभी से करो 4 अक्टूबर से नया बैच शुरू हो रहा है।

फॉर्म ध्यानपूर्वक निम्न लिंक से अभी भरो -

https://reg.learngeeta.com/

यह निःशुल्क हैक्लास शुरू करने के बाद यदि लाभदायक नहीं लगे तो बंद करने के लिए कौन मना कर सकता है ?

लेकिन मुझे ये संदेह है कि इतना पढ़ने के बाद भी तुम फॉर्म भरोगे या नहीं….. लेकिन मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि यदि तुमने फॉर्म भर दिया तो इसे बंद नहीं कर पाओगे।

इस कोर्स के लिए कितनी योग्यता चाहिए ?

आपके पास एक स्मार्ट फ़ोन हो और 40 मिनट का समय हो इससे अधिक और कुछ नहीं चाहिए।

मित्रों, आप भी यदि प्रयत्न करें तो आप भी गीता पढ़ना सीख सकते हैंपरन्तु यदि आप अपने को असमर्थ पाते हैंतो बच्चों को जरूर सीखा दीजियेबच्चों को सीखाने में उसका कोई बहाना मत सुनिए।

यदि आपके बच्चे 7 वर्ष के हो चुके हैं तो उसे यह फॉर्म भरवा दीजिये।

आप मेरे लेख को बहुत ध्यान से पढ़ते हैं इस पर अमल भी कीजिये।

इस लेख के कमेंट में मुझे सिर्फ दो बातें लिखे, मैंने फॉर्म भर दिया या मेरे बच्चे ने फॉर्म भर दिया। और कोई बात कमेंट में मत लिखे।

sohankumarroy.blogspot.com को subscribe कर लीजिये।

आभार

सोहन कुमार

खेडाप्पा,जोधपुर,राजस्थान दिनांक – 15.09.2021 (बुधबार)



 

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