हमारे समाज में एक कहावत प्रचलित है
"मुर से सुद अधिक प्यारा होता है।"
मैंने इस लेख में पढ़ने और लिखने में सुबिधा के लिए दादा/दादी/नाना/नानी के लिए एक ही शब्द का प्रयोग किया हूँ "दादा" और पोता/पोती/नाती/नतिनी के लिए एक शब्द "पोता "। मूलरूप से इसमें तीसरी पीढी के भावनाओं का विश्लेषण है।
क्या कारण है कि मुर से सुद अधिक प्यारा हो जाता है
?
1. मुर हमें अर्जित करना पड़ता है, मेहनत से बनता है। सूद मेहनत से नहीं आता.. सिर्फ इन्तजार करने से आ जाता है.. वरदान कि तरह।
2. आप अपने बच्चों के बचपन को देखा है..लेकिन इस तरह से नहीं देखा..
कि यह कैसा है ? बल्कि इस तरह देखा.. कि इसे
कैसा होना चाहिए..?
"पोता " को जब
आप देखते है तब आपको ये समझ में आता है.. कि मेरा बच्चा वास्तव कैसा था.... अधिक प्यार
आएगा की नहीं... ?
3. आप अपने बच्चे के बचपन को उस तरह देखा नहीं... और जिस तरह का
देखना चाहते थे.. आज वह उस तरह का है नहीं....क्योंकि आप अपने बच्चे के अकेले मालिक
तो थे नहीं...आपसे बड़ा मालिक ईश्वर थे.. उनकी मर्जी से जैसा बनना था बन गया... वह बिलकुल
आपके अनुरूप तो बन नहीं पाया।
"पोता " को देखकर
आपका सपना एक बार फिर से जागृत हो जाता है। यह जीवन सपनों का ही तो खेल है.....उस पर
अधिक प्यार आएगा कि नहीं ?
4. आप अपने बच्चों को उतना इत्मीनान से और बीना उद्देश्य के कभी
समय दिया नहीं.. जितना इत्मीनान और निरुद्देश्य
"पोता " को दे पाते हैं। शकुन और इत्मीनान के क्षण में आनंद नहीं आएगा ?
5. आप बच्चों के साथ जब भी रहे कुछ समझाने के लिए रहे, "पोता
" के साथ आप समझाने के लिए नहीं.. कुछ
समझने के लिए रहते है.. प्रार्थना की तरह।
6. आप "पोता " के बात को जितना ध्यान से सुनते हैं...
अपने बच्चों का नहीं सुना.. बच्चों के बातों को ध्यान से सुनना एक अद्भुद अनुभव है।
7. आप "पोता" के साथ रहते हैं.. बिना चिंता के.. न उसके
पढ़ाई के फिश की चिंता.. न उसके कपडे और खिलौने की चिंता..और यदि बहुत छोटा है तो न
उसके टट्टी साफ करने का चिंता। यदि स्कूल जाने लायक हो गया तो स्कूल तक पहुंचने की
जिम्मेदारी मिल सकती है.. लेकिन आप घुटनों के दर्द का बहाना करके इससे भी पिंड छुड़ा
सकते है।
बताइये जहाँ इतनी स्वतंत्रता हो वहाँ आनंद नहीं तो
कहाँ है ?
8. पुरे घर में ही दो ही पीढ़ी पूरा स्वतंत्र रहता है.. एक "दादा"
दूसरा "पोता " । दुर्भाग्य से आज
अधिकांश घरों में "दादा" का अभाव
हो गया है।
अपने घर में "दादा" को स्थान दीजिये वह फल नहीं देता..लेकिन
छाया देता है।
लोग
अपने
घर
में "दादा" को स्थान क्यों नहीं देना चाहते हैं ?
1. "दादा" आपके घर में आपसे कम महत्व के स्थान पर नहीं
रहेंगे... मन से नहीं रहेंगे...मज़बूरी हो तो बात अलग है।
2. "दादा" आपके
अच्छी बात को भी आसानी से नहीं मानेंगें..जैसे आपने उनके कई अच्छी बातों को नहीं माना।
3. "दादा" के सामने आप घर में कोई मनमानी व्यवहार या अपने
बॉस या व्यवसाय का खीज घर में नहीं निकाल सकते ।
4. आर्थिक कठिनाइयां के बारे
में आप सोचते होंगे...लेकिन यह वास्तविक
नहीं है "दादा" किसी भी आर्थिक कठिनाई
में रह सकते है यदि उसे उचित सम्मान मिले ।
5. आपके पत्नी/पति को पसंद आना चाहिए।
आप अपने बच्चों के लिए "दादा" को कब बुला रहें है ?
आप मेरे लेख को उतने ही ध्यान से पढ़ते हैं जितना ध्यान से मैं लिखता हूँ।
आपका आभार।
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अगले सप्ताह फिर किसी विषय पर।
आपका मंगल हो।
सोहन कुमार।
ट्रेन में। दरभंगा से पुणे जाते समय। 20.01.24

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