दिनांक 16.12.2020 को हमने अपने
पैतृक सम्पति को अपने भाइयों के बीच बटवारे के कार्य को सम्पन्न किया…. जिसे मैं पिछले 4 वर्षों से
प्रयास कर रहा था। इसे मैं अपने जीवन की बड़ी नहीं तो छोटी उपलब्धि जरूर मानता हूँ
और इसे आपके साथ शेयर कर रहा हूँ।
यदि अभी तक आपके भाइयों के बीच पैतृक सम्पति का बटवारा नहीं हुआ है तो इसे आप जरूर पढ़िए।
हमारे भाइयों के बीच भी वैसा ही सम्बन्ध है जैसा आपको अपने भाइयों से सम्बन्ध
है। घर अलग है… लेकिन घर घर
की कहानी एक ही है। परन्तु हम सभी भाई आपस में एक बात पर सहमत थे कि हमारे बीच
सम्बन्ध चाहे कितना भी ख़राब हो जाये हम किसी अन्य व्यक्ति को समझौता कराने के लिए
नहीं बुलाएँगे। हम अपनी मामला को आपस में ही सुलझाएंगे।
पहला सुत्र -
आपसी बटवारे में अपने भाइयों के अलावा किसी भी व्यक्ति को मत बुलाइये।
आपके मन में एक प्रश्न आ सकता है कि आपका भाई वैसा नहीं है जैसा मेरा भाई है ?
मित्रों, मैं आपको पुरे
विश्वास और अनुभव से ये बात बताता हूँ कि इस दुनिया में आपके भाई से बढ़कर आपका
सुभचिन्तक कोई नहीं है। बस जब आपकी शादी हुई तो आपके भाइयों के बीच के प्रेम के
अंकुर को कोई सींचने वाला नहीं रहा। आपकी पत्नी अपने भाइयों के प्रेम के अंकुर को
तो सींच रही है उनको आपके भाइयों से क्या लेने देना है ? यह मैं बहनो को उल्हाना नहीं दे रहा हूँ…. यह एक सहज प्रक्रिया है….. उनको अपने
भाईओं से प्रेम होना एकदम सहज है और आपके भाइयों से प्रेम नहीं होना भी सहज है।
आपके भाइयों से आपके पत्नी को प्रेम क्यों होगा ? यदि होगा तो यह असहज है।
आपके भाइयों के बीच का प्रेम सूखता गया और आपके पत्नी के भाइयों का प्रेम बढ़ता
गया। आप देखिये किसी घर में कोई समारोह हो तो आपका भाई-भाभी उपस्थित रहे या न रहे
आपका साला सरहज जरूर उपस्थित मिलेगा। यह बस प्रेम को सींचने भर का मामला है। आपने
इस पर ध्यान ही नहीं दिया और धीरे धीरे आपको लगने लगा कि आपका भाई अच्छा नहीं है।
जड़ा अपनी शादी से पहले अपने भाई के किसी व्यवहार को याद करके देखिये, आपके लिए जान देता था कि नहीं ?
बटवारे के समय अपने उस भाई को याद कीजिये जब आपका शादी नहीं हुआ था। आपके किसी
बात से वह इनकार नहीं कर पायेगा।
दूसरा सुत्र –
पैतृक सम्पति में आप बराबर के हिस्सेदार नहीं है ।
हमने अपने खेती के किसी भी जमीन को टुकड़ों में नहीं बाँटा। प्लाट के हिसाब से
बाँट लिया। यदि हम उस सम्पति का बिलकुल बराबर का हिस्सा चाहे तो हमें सभी जमीन को
बराबर टुकड़ों में बाँटना होगा जिस पर एक तो खेती करना मुश्किल होगा….. दूसरा कई टुकड़ों का देख रेख भी मुश्किल होगा। और यदि आप प्लाट के हिसाब से
बांटते है तो उसे बराबर करना मुश्किल होगा क्योंकि कोई प्लाट उपजाऊ होगा कोई
बलुआही होगा कोई बड़ा होगा कोई छोटा होगा।
जड़ा सोचिये आप सभी भाइयों का शरीर एक ही माँ-बाप से उत्पन्न हुआ लेकिन सभी
बराबर कहाँ हुआ ? कोई छोटा हुआ, कोई बड़ा हुआ, कोई गोरा हुआ, कोई काला हुआ। ये तो चलो, माँ-बाप के बस
में नहीं है……. लेकिन माँ-बाप
भी अपने सभी बच्चों को एक ही निगाह से कहाँ देखता है किसी से अधिक प्यार करता है
किसी को देखना भी नहीं चाहता।
यदि आप प्यार और अपनापन में भी बराबरी के हिस्सेदार नहीं हो तो जायदाद में
बराबर क्यों ढूंढ रहे हो ? किसी को थोड़ा
कम ज्यादा मिल सकता है। अपने हिस्से जो आ गया उसे अपने पूर्वजों का उपहार समझ कर
प्रसन्नता पूर्वक आभार सहित स्वीकार कर लीजिये। इस सम्पति को आपने अर्जित नहीं
किया जिसने इसको अर्जित करके आपके लिए छोड़ गया पितृ पक्ष में उसे एक लोटा जल दे
दीजिये।
तीसरा सुत्र –
अमीन का चुनाव सावधानी पूर्वक कीजिये ।
गाऊँ में मैंने देखा है कि जो अमीन होता है वह सिर्फ खेतों को नापने या उसका
हिसाब करने भर का काम नहीं करता, वह पंच और
सलाहकार भी होता है । किसी भी पंच को बीच में नहीं रखना तो बटवारे का पहला सुत्र
है…. अमीन भी ऐसा
होना चाहिए जो सिर्फ अपना काम करे पंच का काम ना करे वरना वह आपको उलझा देगा। अमीन
को सिर्फ जमीन को नापने, उसका हिसाब
करने, दस्तावेज
तैयार करने आदि का ही काम लें। बटवारा कैसे करना है इसकी सलाह अमीन से बुल्कुल ना
ले, यह विचार
विमर्श अपने भाइयों में ही करे।
अंतिम सुत्र -
जीवित माता पिता के लिए -
मैं उन माता-पिता से निवेदन करता हूँ कि वे अपने जीते जी अपने जायदाद को अपने
बच्चों के बीच बाँट दें। आप अपने बच्चों के लिए इससे बड़ा उपहार और कुछ नहीं दे
सकते है। आपके जाने के बाद आपके बच्चों को जायदाद के बटवारे में कितना मुश्किल
होगा इसे यदि आपने अपने भाइयों से बटवारा किया है तो आपको मालूम होगा।
परन्तु मालूम होने पर भी हमें एक भ्रम रहता है कि हमारा भाई अच्छा आदमी नहीं
था इसलिए मुझे परेशानी हुआ लेकिन मेरे बच्चे ऐसा नहीं है।
एक दूसरा भ्रम ये होता है कि हमें लगता है कि हमारे बच्चे कभी अलग होंगे ही
नहीं।
आप अपने सभी भ्रम को पाल कर रख सकते है, हो सकता है कि वह आपका भ्रम नहीं बल्कि वास्तविकता हो। हो सकता है कि आपके
बच्चे कभी अलग नहीं हो लेकिन फिर उसके भी तो बच्चे होंगे।
बटवारे का मामला जितनी पीढ़ी पीछे चली जाती है उतनी ज्यादा उलझ जाती है। अपने
जीते जी अपनी जायदाद को अपने बच्चों के बीच बाँट देना एक समझदारी भरा काम है। आप
उसे फालतू के तनाव देने से मुक्त कर देते है। आपके बाँट देने से किसी को कोई एतराज
नहीं होगा, एतराज होगा तो
भी कुछ नहीं कर सकता है।
यदि आप चाहते है कि आपके बच्चे आपको दुनियाँ छोड़ने के बाद शांति से और भाईचारा
बना कर रखे तो अपने जायदाद को बाँट कर जाइये। आपको इस दुनिया से जाने का तारीख
मालूम नहीं है इसलिए इस काम में आज से लग जाइये।
आप मेरे लेख को पसंद करते है इसके लिए आपका हार्दिक अभिनन्दन।
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आभार
09.01.2021

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