07 जनवरी 2024

अपने जीवन का लक्ष्य क्यों और कैसे बनाएं ?

 जीवन में लक्ष्य उतना ही आवश्यक है, जितना एक शिकारी को अपने शिकार पर निशाना साधना..... एक शिकारी यदि बिना निशाना साधे तीर चलाएगा तो क्या होगा ? वही ऐसे लोगों का होता है जो बिना लक्ष्य का जीवन जी रहें है। गलती से यदि तीर लग गया तो जित गए, लेकिन इसकी संभावना कितनी है ?

हमें अपना लक्ष्य क्यों बनाना चाहिए ?

हमारे जीवन का लिखित लक्ष्य और उसे बार बार पढ़ने से हमारा विचार इस ब्रम्हांड से बार बार संपर्क स्थापित करता है और हमारे विचारों को भौतिक रूप से हमारे जीवन में प्रगट कर देता है, जिसे "आकर्षण का नियम" कहतें है।

"आकर्षण का नियम" क्या है ?

आकर्षण का नियम ये कहता है कि यदि कोई भी विचार,कामनाएँ या लक्ष्य... जिस पर आप यदि पूरी सिद्दत से विश्वास करें तो वह आपके जीवन में प्रगट हो जाएगा।

रोंडा बर्न, नेपोलियन हिल,  नॉर्मन विंसेंट पील आदि कई आधुनिक विचारकों ने... और अपने सनातन धर्म में भी "यद् भावं तद् भवति" का उल्लेख है, अर्थात आप जैसा सोचते हैं वैसा ही बन जाते हैं।

तुलसीदास बाबा ने भी लिखा है "जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी".... प्रभु के रूप में आप सिर्फ राम को नहीं बल्कि अपने किसी लक्ष्य को भी देख सकते है।

"आकर्षण का नियम" आपके जीवन में कैसे काम करेगा ये बताने से पहले मैं अपने जीवन में घटित कुछ घटनाओं का जिक्र करना चाहूंगा।

हाल ही में मैं जापान का यात्रा किया हूँ, मैं विदेश भ्रमण का लक्ष्य लगभग 30 वर्ष पहले बनाया था और ये लक्ष्य मैं जिस समय बनाया था और इस लक्ष्य का विचार मैं सिर्फ मन में नहीं किया था... इसे लिखा था और सिर्फ लिखा नहीं था... अपना पासपोर्ट भी बनवाया था और उस समय मेरे लिए पासपोर्ट बनाने का खर्चा भी मेरे लिए बहुत बड़ी रकम थी। 

उस समय यदि मेरे उन लक्ष्यों को कोई मेरा शुभचिंतक पढ़ लेता तो मुझे पागलखाने भेजने में जड़ा भी विलम्ब नहीं करता, थोड़ा बहुत पागल तो समझता था.. लेकिन इस हद तक के पागलपन का किसी को पता नहीं था।

जीवन के सुनहले सपने उस समय आपको जरूर देखना चाहिए जब आप अत्यंत कठिनाइयों से गुजर रहें हों।

इसके कई लाभ हैं -

1. जब आप अपने सुनहले सपनों की कल्पना करते हैं और उसे लिखते हैं... तो थोड़ी देर के लिए आप अपने वर्तमान के कठिनाइयों को भूल जाते हैं और थोड़ी राहत को अनुभव करते हैं... जैसे जेठ की कड़कती धुप में घने बृक्ष का छावं।

2. आपके सपनो को साकार होने का आत्मविश्वास आपके अंदर के सकारात्मकता    को कई गुना बढ़ा देगा।

3. आपको वर्तमान की कठिनाइयाँ तुच्छ नजर आने लगेगा।

4. आपका  आत्मविश्वास आपके कार्यक्षमता को बढ़ा देगा।

5. आपका आत्मविश्वास आपके पारिवारिक और व्यावसायिक माहौल को ऊर्जावान बना देगा।

6. आपका ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ जाएगा। और

7. आप चाहे कुछ भी खो दें... चाहे कितना भी नुकसान हो जाय... आशा की एक किरण आपको हमेशा दिखाई देता रहेगा।

"आकर्षण का नियम" के कई उदहारण मेरे जीवन में घटित हुआ है। 2011 में मेरी नौकरी छूट गयी थी और 4 महीने बेरोजगार रहा और उस समय मैं योजना बनाया कि अमुक महीना से मेरा वेतन दुगुना हो जाएगा... वह महीना इस समय मुझे याद नहीं है लेकिन आश्चर्य जनक रूप से ठीक उसी महीने में मुझे दुगुने वेतन का नौकरी मिल गया, जिस महीने का मैंने योजना बनाया था।

मैंने अपने बच्चों के शादी का लक्ष्य उस समय बनाया जब वो 8 वीं क्लास में पढता था। बच्चों की शादी कैसे करें कि जीवन पर्यन्त परिवार संतुलित रहे.....आज वह साकार रूप में है।

मैं किसी अच्छी बहु की तलाश में नहीं था। मैं एक अच्छे ससुर (पिता) बनने का लक्ष्य बनाया था।

"आकर्षण का नियम" काम करता है इसे मैं अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव और प्रयोगों से जानता हूँ। मेरे जीवन के अधिकांश लक्ष्य "आकर्षण के नियम" के कारण पुरे हुए। कुछ लक्ष्य तो आश्चर्यजनक ढंग से ठीक उसी समय पुरे हुए जितना समय सीमा हमने निर्धारित किया था।

मेरे पास लक्ष्यों की एक लम्बी सूची है.. एक मोटी किताब है... मेरे लक्ष्यों की सूची में मेरे व्यक्तिगत लक्ष्यों के अलावा अनेकों पारिवारिक, सामाजिक, राजनैतिक, स्वास्थ्य, आर्थिक, पर्यावरण आदि लक्ष्यों की एक बहुत लम्बी श्रृंखला है, भला सपनों की सूची बनाने में कंजूसी क्यों करता ?... पूरा होना या नहीं होना तो बाद की बात है .. उसे लिख लेना तो अपने हाथ की बात थी।

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मेरे जीवन का कोई भी व्यक्तिगत लक्ष्य ऐसा नहीं है, जो पुरे नहीं हुए।

मेरे सामाजिक, राजनितिक... आदि अनेकों  लक्ष्य जो पुरे नहीं हुए... जीवन अभी भी बाँकी है.. पता नहीं पुरे हो भी जाएँ ........!

जीवन के बाद का एक लक्ष्य है "मोक्ष का लक्ष्य"....... उसका पता नहीं.........। 

"आकर्षण का नियम" आपके जीवन में भी काम करे इसके लिए आपको क्या करना चाहिए ?

A. अपने सपनों को लिखिए....... कैसे लिखें ?

1. आप अपने जीवन में जो भी चाहतें है उसे लिखिए, सोचने में संकोच मत कीजिय, कंजूसी भी मत कीजिये, ये भी मत सोचिए कि इतने बड़े सपने पुरे कैसे होंगे, खुलकर अपने सपनों को कागज पर साकार कर दीजिये।

2. लिखने में वर्तमान काल का उपयोग कीजिये जैसे कि वह अभी ही आपके पास है।

3. एक समय सीमा निर्धारित कीजिये।

4. अपने सपनो को जीवंतता और बरीकिओं से लिखिए।

उदाहण के लिए यदि आप अपने घर का लक्ष्य बनाते हैं तो ऐसा लिखिए कि मैं अपने 3/4/5 बेडरूम या बंगले में जनवरी 25/28/27 से रह रहा हुँ।  आप जिस प्रकार का बेड रूम, किचेन, दरवाजा, खिरकी, बालकोनी, गार्डन आदि जो भी आप अच्छी से अच्छी कल्पना कर सकते हैं, उसे विस्तार से लिखिए।

आप चाहें तो आप जैसा पडोसी चाहते है, उसे भी लिख लीजिये। लिखने में भला जाता क्या है  ?

मैंने कभी घर का लक्ष्य नहीं बनाया इसलिए या तो किराये के घर में रहा या लगभग बेघर जैसा रहा।

आप जीवन में जो भी चाहते है उसे पुरे विस्तार से और पुरे इत्मीनान से लिखिए, जैसे यह दुनियां कोई सपने जैसा हो और यह दुनियाँ सपने से अधिक कुछ है भी नहीं।

लिखने में इतनी जीवंतता रखिये की आपको लगे कि यह कोई सपना नहीं बल्कि आपके जीवन की वास्तविकता है।

B अपने लक्ष्यों को बार बार पढ़िए।

अपने लक्ष्यों को कितनी बार और कब पढ़ना चाहिए.. मेरे समझ से इसका कोई नियम नहीं है... आप चाहे तो रोज पढ़ सकते हैं.. सप्ताह में एक बार पढ़ सकते हैं... आप जितनी जल्दी जल्दी पढ़ेंगे उसके प्रगट होने की संभावना उतनी अधिक रहेगी।

मैं अपने जिस लक्ष्य को जल्दी से प्राप्त करना चाहता था उसे मोबाइल में अपने आवाज में रिकॉर्ड कर लेता था और जब भी समय मिलता उसे सुनता था।

C. यदि समय सीमा तक लक्ष्य हासिल नहीं हुआ तो -

1. अपने लक्ष्य के समय सीमा को बढ़ा लीजिये, ऐसा मानिये कि आपने लक्ष्य के समय सीमा का आकलन ठीक से नहीं किया।

2. दूसरी बार भी पूरा नहीं हुआ तो समय फिर से बढ़ा लीजिये तीसरी बार भी बढ़ा लीजिये, चौथी बार समय सीमा को मत बढ़ाइए अपने विश्वास को बढ़ाइए। यदि तीसरी बार भी आप अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पातें है तो निश्चित रूप से ये जान लीजिये कि आपके विश्वास में कमी है, आपने लिख तो लिया लेकिन आपको विश्वास नहीं है। लिखने के साथ साथ आपको विश्वास होना भी उतना ही आवश्यक है।

3. अपने लक्ष्यों को उसके समय सीमा को समय समय पर समीक्षा करते रहिये। समय के साथ जीवन के कुछ लक्ष्य बदलते भी रहतें हैं।       

4. चिंता जड़ा भी मत कीजिये, आपका चिंता आपको अपने लक्ष्यों से और दूर लेकर चला जायेगा। आपके जो लक्ष्य पुरे नहीं हुए, उसे पूरा होना भी नहीं चाहिए।

लक्ष्य बनाने के लिए 1 जनवरी जैसा कोई शुभ मुहूर्त नहीं होता जैसे शादी या गृहप्रवेश का होता है। जिस दिन आप अपना लक्ष्य बनाते हैं.... आप उठकर खड़े हो जातें है और आपका नवजीवन शुरू हो जाता है।

इस समय दुनियाँ के आवादी का सिर्फ 3% लोग ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाते हैं।

आप अपना लक्ष्य कब बना रहें हैं ?

आप मेरे लेख को बहुत ध्यान से पढ़तें हैं , आपका अभिनन्दन।

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अगले सप्ताह फिर किसी विषय पर।

आपका मंगल हो।

सोहन कुमार।

चातर,घनश्यामपुर 

07.01.2024 (रविवार)

 

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