19 अक्टूबर 2020

अलीनगर विधान सभा क्षेत्र ( वोट किसे दे ) भाग-3

 मित्रों,

इस क्षेत्र के उम्मीदवारों में मेरे गाऊँ के एक प्रत्याशी हैं - श्री विनोद मिश्रा, मेरे अभिभावक तुल्य है, कई अवसरों पर इन्होने मुझे उपकृत किया है, इनकी बिनम्रता अनुकरणीय है। ये राजद के उम्मीदवार है, जबकि ये बीजेपी के कार्यकर्ता थे।

इन्होने बीजेपी का दामन छोड़कर, निर्दलीय उम्मीदवार ना होकर, राजद को क्यों चुने ? ये मुझे पता नहीं….. लेकिन वे हमसे कई गुना अधिक राजनितिक समझ रखते है और आज के समय में पार्टी बदल लेना कोई बड़ा अपराध नहीं है।

परन्तु मैं राजद के सम्बन्ध में अपनी क्या मान्यता रखता हूँ इसकी बिवेचना आज के लेख में करेंगे।

श्री लालू जी अत्यंत सामान्य परिवार के होते हुए भी उस ज़माने में पटना विश्वविद्यालय के बी.न कॉलेज से एलएलबी और राजनीति विज्ञान में मास्टर थे। श्री लालू जी सिर्फ वोटरों को लुभाने के लिए अशिक्षित जैसे अंदाज अपनाते थे, वास्तव में वे अत्यंत बुद्धिमान थे। इनके बच्चों को लगा कि जब नकली अशिक्षित बिहार को चला सकता है तो असली अशिक्षित तो पूरा देश चला लेगा और वे अशिक्षित होना चुन लिए।

1990 में जब वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने- जरा उस समय के सामाजिक परिस्थितिओं को याद कीजिये जब कोई अछूत या पिछड़ा वर्ग ब्राह्मणो के सामने बैठ नहीं सकता थाश्री लालू जी ने इन वर्गों को एक सम्मान दिया। इस सम्मान के लिए श्री लालू जी भारत के इतिहास में सदा याद किये जायेंगे। अगर वे गुंडागर्दी और घोटाले से बचे होते तो वे भारत के नेल्सन मंडेला होते।

अछूतों और पिछड़ो को आगे बढाने का काम जो किया जा सकता था, या जो करना चाहिए था, वह पूरा हो चूका है। अब कोई पिछड़ा नहीं रहा और कोई ब्राह्मण भी नहीं रहा। पिछड़ों को अपने अधिकार का ज्ञान हो गया।

श्री लालू जी के कार्यकाल का दूसरा पहलु था, गुंडागर्दी, लूटपाट, अराजकता, अपहरण, बहन और बेटी के साथ बदसलूकी। उनके बेटी के शादी में कार के शोरूम से सभी नयी गाड़ियों को लूट लेना, फर्नीचर और सोफे के दुकानों को लूट लेना, इन सब बातों को भी नहीं भुला जा सकता है।

मित्रों, श्री लालू जी के जीवन के दो पहलू थे परन्तु इनके बच्चों ने सिर्फ उनके दूसरे पहलू को ही सीखा है, न ही शिक्षा से सरोकार रहा और ना ही समझदारी से।

अब हम 1990 को छोड़कर वर्तमान हालत के कुछ मुद्दों कि चर्चा करते है।

धरा 370 का हट जाना वर्तमान समय का एक ऐसा मुद्दा है जिस पर गौर किया जाना चाहिए। धरा 370 के हट जाने से भारत का क्षेत्रफल 222,236 वर्ग किलोमीटर बढ़ गया।

जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, ये सिर्फ आप नारा लगा सकते थे I

वहाँ भारत का संबिधान लागू नहीं था I वहाँ भारत के सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू नहीं था। वहां का झंडा तिरंगा नहीं था। यदि अपने तिरंगे के निचे जम्मू कश्मीर आ गया तो इस देश के मुस्लिम का क्या अहित हो गया ?

अभी फारुख अब्दुल्ला चीन कि मदद से धारा 370 को फिर से बहाल करेगा। अब्दुल्ला के इस बयान का निंदा किस किस ने किया ? यदि निंदा नहीं किया तो क्यों नहीं किया ? और यदि नहीं किया तो क्या हमें उस पार्टी की निंदा नहीं करना चाहिए ?

CAA से मुसलमानों का क्या नुकसान हो रहा है ? कोई समझा सकता है ?

मित्रों पहले ये देश है, फिर कोई जात या धर्म।

आप मेरी बात को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसके लिए आपका अभिनन्दन। चुनावी माहौल में 2 गज के दुरी का ध्यान रखिये।

आप मेरे ब्लॉग - sohankumarroy.blogspot.com को subscribe जरूर कर लीजिये यदि आप मेरे विचारों से सहमत नहीं रहते है तब भी।

 आभार

सोहन कुमार

19.10.2020



 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें