4. गर्भ धारण से बच्चों के जन्म तक (गर्भ संस्कार) (भाग-3)
भाग-6 में हमने
चरित्र निर्माण यात्रा के अपनी नयी दिनचर्या में निम्नलिखित क्रिया कलापों का
विवेचना किया था -
1. पढ़ना-
2. लिखना-
3. सुनना –
4. अपने नन्हे
शिशु से बात करना –
5. घरों को
चित्रों से सजाना-
6. खाना बनाना-
7.घर में झाड़ू
लगाना –
अब हम आगे बढ़ते है -
8. नींद-
आप जितना नींद लेना चाहते है, उतनी नींद
लीजिये, बिना अलार्म
का सोइये औरजब सुखपूर्वक नींद खुल जाये उस समय से अपना दिनचर्या शुरू कीजिये।
ध्यान रखिये जब आप नींद ले रहे है, आपका शिशु भी
नींद ले रहा है, उसे अलार्म
लगा कर मत जगाइए, उसे सुखपूर्वक
विश्राम करने दीजिये, लेकिन नींद
खुलने के बाद उसे आलस्य और प्रमाद का रोग मत सिखाइये…. इसलिए नींद खुलने के बाद प्रसन्नता पूर्वक परमपिता परमेश्वर को इस नवीन दिन और
इस नवीन जीवन के लिए धन्यवाद दीजिये। नींद से उठकर कम से कम 10 मिनट हाथ जोड़कर प्रार्थना कीजिये यदि इससे अधिक देर तक भी ध्यान धार्मिक
पुस्तके पढ़ना और प्रार्थना कर सकते है तो कीजिये। यह समय दिन का सबसे महत्वपूर्ण
समय होता है, यदि आपने इस
समय के 1 घंटा का उपयोग
प्रार्थना/ स्वाध्याय और आभार के भाव को जी लिया तो आपका पूरा दिन प्रार्थना बन
जायेगा और आपका ममतामयी भाव दिन भर बना रहेगा।
आप यह प्रयोग शुरू जरूर कीजिये यदि अच्छा अनुभव ना हो तो इसे बंद करने के लिए आपको कौन मना कर सकता है ? आप इसे कभी बंद नहीं करेंगे, बाद के समय में भी आप इसे जारी रखेंगे। हाँ यदि आपने शुरू ही नहीं किया तब भी परमात्मा आपकी और आपके शिशु की रक्षा करेंगे।
9. स्वच्छता-
तैयार होने में, नहाने में, सजने सँवारने में पुरे इत्मीनान से समय दीजिये, हाथों के स्पर्श से अपने शरीर के दिब्यता को अनुभव कीजिये। अभी आपके शरीर में
एक और शरीर है जो उसी भाव में है, जिस भाव में
आप है। जब आप ऐनक के सामने अपनी सुंदरता को निहारते है……. आपकी मुस्कान आपके शिशु के अत्यंत नन्हे से चेहरे पे मुस्कान ला देगा। अधिक से
अधिक समय प्रसन्नता के भाव में रहिये, अपने अजन्मा
शिशु के लिए।
10.
योग एवं
व्यायाम-
मैंने पिछले लेख में एक वीडियो शेयर किया था, गायित्री परिवार का जिसमे कौन सा योग और व्यायाम करना चाहिए इसका विवरण
विस्तार से है। उस वीडियो को सप्ताह में एक बार जरूर देखिये और उसमे बताये गए योग
और व्यायाम को नियमित और निश्चित रूप से जरूर कीजिये। यह आपके लिए जितना आवश्यक है
उससे कहीं अधिक आपके अजन्मा शिशु के लिए है। बाद के समय में आपके शिशु को सुबह योग
और व्यायाम कराने के लिए अधिक परिश्रम की जरूरत नहीं होगी... वह गर्भ में ही इन
आदतों को सीख लेगा। इस क्रिया से आप एक संतुलित शरीर और संयमित मन के भाव में
होंगे और आपका अजन्मा शिशु भी।
11.
आहार-
आहार के विषय में जो वैज्ञानिक खोज है, उस पर मुझे यक़ीन नहीं है। जब दुनियाँ के वैज्ञानिकों ने सूर्य और पृथ्वी के
दुरी को नाप लिया तब जाकर उसे हमारे धर्मों के बातों पर विश्वास हुआ। हम तो सूर्य
और पृथ्वी के दुरी को हजारों वर्ष पहले नाप चुके थे.... सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण
का पता तो 10 रूपये के
पंचांग से चल जाता है, जिसके लिए
नासा ने इतना बड़ा प्रयोगशाला बना कर रखा है।
अभी दुनियाँ के वैज्ञानिको को ये पता लगाना बाकि है कि जितने भी तरह के मांसाहार हैं वो सब स्वास्थ के लिए...संतुलित मन और स्वभाव के लिए जहरीला और अत्यंत ही हानिकारक है जो हमारे धर्म ग्रंथों में लिखा हुआ है।
बहन आपको डॉक्टर मना नहीं करेगा बल्कि प्रोटीन और बिटामिन के नाम पर अंडा और मांसाहार को प्रोत्साहन भी दे सकता हैं। मैं तो ना डॉक्टर हूँ और ना वैज्ञानिक, मैं तो बस अपने सनातन धर्म में विश्वास रखने वाला एक अदना सा आपका भाई हूँ। मैं अपने विश्वास के आधार पर ये विनती करता हूँ कि इन 9 महीनों में मांसाहार का सेवन ना करें।
जब आप भोजन करें, बिलकुल धीरे धीरे करे और महसूस करें कि आपका शिशु भी मेरे साथ भोजन कर रहा हैं, तीखी मिर्च और मसालेदार भोजन नहीं करें। अधिकतर फल, सलाद, कच्चा और भींगा हुआ अनाज ही लें।
यह जीवन आपके लिए तपस्या है, तपस्वनी की
तरह जीवन जिए। आप एक तपस्वी/तपस्वनी को प्रगट कर पाएंगे।
12. प्रार्थना –
गर्भवती माता के लिए हमने ये प्रार्थना तैयार किया है जिसे सुबह शाम के
अतिरिक्त कभी भी किया जा सकता है, इसको अपने
आवाज में रिकॉर्डिंग करके भी बार बार सुना जा सकता है।
गर्ववती माता के लिए प्रार्थना जो बच्चों के लिए करना है।
हे परमपिता परमेश्वर, आप सभी के प्राणों के प्राण, दुखः विनाशक, सुख स्वरुप, सारे जगत के पिता, उत्पन्न करने वाले, दिव्य शक्ति प्रदान करने वाले है I…… आपने मुझे मातृत्व का वरदान देकर मेरे जीवन को धन्य कर दिया…. इसके लिए आपको अंतःकरण से धन्यवाद । मै आपके इस अंश का भी आभारी हूँ , जिसने इस जगत में प्रगट होने के लिए मेरे कोख का चयन किया। मैं आपके इस स्वरुप को आपके ही अनुरूप बना सकूँ ऐसा मुझे आशीर्वाद दीजिये।
हे सर्वरक्षक परमेश्वर, आप ही सम्पूर्ण जगत की रचना उसका संरक्षण, सम्बर्धन और भरण पोषण करते है। मैं तो आपके इस अंश को जन्म देने का निमित मात्र हूँ। मैं अपने कर्तव्यों का निर्वाहन ममता रहित होकर करूँ, इसका आशीर्वाद दीजिये।
हे प्रभु, मैं ऐसा महसूस कर रही हूँ की आप मुझे एक श्रेष्ठ संतान को जन्म देने के लिए मार्गदर्शन दे रहें है……. और यह एह्साह मुझे धैर्य और साहस प्रदान कर रहा है। मैं अपने चित में शांति, मन में प्रसन्नता और शरीर में स्वस्थ और स्फूर्ति को अनुभव कर रही हूँ। मैं अपने संतान की कल्पना में आनंद, उमंग,उत्साह और अनुग्रह की भाव से अभिभूत रहती हूँ। मैं इन दिनों प्रेम के एक नए और विस्तृत आयाम को अनुभव कर रही हूँ।
हे पञ्च तत्व परमेश्वर….. पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश…….मेरे कोख से वीर.. साहसी… बुद्धिमान…. चरित्रवान.... विवेकवान….. दयालु…..क्षमाशील….. उदार…. पराक्रमी… एवं उच्च आदर्शों को पालन करने वाला व्यक्तित्व प्रगट कीजिये।
हे परमेश्वर.... मेरा शिशु धार्मिक, आस्तिक, सुखी, संतोषी, एवं आध्यात्मिक हो। वह संकल्प शक्ति और आत्मविश्वास से भरपूर हो।
हे गोविन्द, हे राधे, मुझे पता है, मेरे कोख से
आप स्वयं प्रगट हो रहे हो। इस धरती पर मेरे संतान के रूप में आपका अभिनन्दन है ………. आपका अभिनन्दन है…………….आपका अभिनन्दन
है I
सावधानियां –
1. इस प्रार्थना
को यदि माताएं भाव पूर्वक विश्वास के साथ करें तो वे निश्चित ही वे एक दैविये गुण
से युक्त संतान को जन्म दे सकेंगे और उनको जन्म के समय कोई कठिनाई भी नहीं होगी
क्योंकि जब इश्वरिये गुणों का अवतरण होता है तो माता को जन्म देने में कठिनाई नहीं
होती।
2. यह प्रार्थना आराम से बैठ कर कीजिये, कमर या पीठ को सहारा दे सकते है।
3. इसे सुबह उठते ही और रात को सोते समय जरूर कीजिये, इसके अतिरिक्त दिन में कभी भी कर सकते है।
4. यह प्रार्थना करते समय अपनी आँखों को बंद रखिये और अपने दोनों हाथों को पेट पर रखिये।
5. ध्यान रखिये आप अपने संतान के लिए अपने संतान से प्रार्थना कर रहे है।
गर्भ संस्कार के इस प्रकरण को अगले भाग में जारी ररखेंगे।
अगले शनिवार को फिर मिलेंगे रात को 9 बजे।
आभार
सोहन कुमार
sohankumarroy.blogspot.com
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विनीत
मोगा, पंजाब 30.01.2021
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