06 फ़रवरी 2021

अपनेँ बच्चों की परिवरिश कैसे करें ? (भाग 8)

 4. गर्भ धारण से बच्चों के जन्म तक (गर्भ संस्कार) (भाग-4)

9 महीनों की इस पावन यात्रा को तीन चरणों में बाँटा गया है यहाँ हम तीनों चरणों में होने वाली शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों और उस पर होने वाली संभावित प्रतिक्रिआओं का विश्लेषण करेंगे।

प्रथम तिमाही

9 महीनों की इस यात्रा का यह पहला पड़ाव है जिसे गर्भाधान से लेकर 12 सप्ताह तक माना गया है।

3 महीने का यह पहला पड़ाव सबसे अधिक सम्बेदंशील है।

इस अवधि में बाहर से शारीरिक परिवर्तन कम दीखता है, लेकिन निषेचन क्रिया के बाद, आपके शरीर के अंदर तेजी से परिवर्तन होने लगता है, मातृत्व सम्बन्धी कई नए हार्मोन्स बनने लगते हैं। इस अवधि में आप शरीर के भीतर एक विचित्रता का अनुभव करते है जिसे आपने पहले कभी नहीं किया था। कभी कभी आप अपने नियंत्रण से बहार हो जाते हो, आप रोना नहीं चाहते हैं, लेकिन आँसुओं को नहीं रोक पाते है, हँसना नहीं चाहते है, लेकिन मुस्कराहट पर नियंत्रण नहीं है। कभी कभी अपने वजूद को एक अलग आयाम में पाते हैं। आपको क्या हो रहा है ? आप समझ नहीं पाते।

पहली तिमाही में गर्भावस्था के सामान्य लक्षण-

1. मासिक धर्म का रूक जाना -

यह गर्भावस्था का पहला लक्षण है। निषेचन के बाद आपका शरीर कई श्राव और हार्मोन्स उत्पन्न करता है जो आपके मासिक धर्म को तब तक रोक देता है जबतक शिशु का जन्म नहीं होता।

2. स्तन में संवेदनशीलता -

इस दौरान स्तन अधिक सम्बेदंशील हो जाता है, हल्का दर्द भी रहता है। निप्पल के आस-पास का गहरा क्षेत्र और गहरा हो जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से कहें तो इसका कारण शरीर के हार्मोन्स का बदलाव है। और आध्यात्मिक दृष्टि से देखे तो जो जीव इस दुनियाँ में प्रगट होने वाला है, उसके भोजन का इंतजाम माता के शरीर में किया जा रहा है। भगवान् कितनी तत्परता से हमारे जीवन के रक्षा के लिए क्रियाशील हैं। जड़ा सोचिये। और आभार प्रगट कीजिये।

3. थकावट का अनुभव होना -

आपके शरीर के अंदर बहुत सारे बदलाव हो रहे हैं और आपके शरीर को उनको समायोजित करने के लिए कठिन श्रम करना पर रहा है। यह आपको थकावट अनुभव करा सकता है।

4. आपका पेट कब्ज हो सकता है -

बदलते हुए हार्मोन के कारण आपका शरीर अलग तरीके से काम करना शुरू कर दिया है, यह शरीर के अन्य कार्यों को भी धीमा कर देता है। यह आपके पाचन क्रिया को भी धीमा कर सकता है और आपको कब्ज हो सकता है।

5. सीने में जलन-

ये अस्थायी लक्षण हैं जो शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी के कारण होते हैं और जैसे-जैसे गर्भावस्था आगे बढ़ती है ये कम हो जाते हैं।

6. भोजन के प्रति रूचि और अरुचि-

इस अवधि में भोजन के प्रति आपकी रूचि में भरी बदलाव आ सकती है, जो भोजन पहले आपको पसंद था हो सकता है अभी आपको वो बिलकुल ही पसंद ना आये, और जो पसंद नहीं था उसमे आपकी आपकी रूचि बढ़ सकती है। इस सब का कारण हार्मोन में परिवर्तन है जो आपके शरीर के अंदर चल रहा है।

उपरोक्त वर्णित लक्षणों के अलावा, पहली तिमाही में बार बार उलटी करना, बार बार मूत्र का बेग आना ऐंठन, चक्कर आना, सिरदर्द या कमरदर्द का अनुभव करना बहुत सामान्य है। ये सभी गर्भावस्था के बहुत सामान्य लक्षण हैं जो यह बताते हैं कि आपके शरीर में बदलाव हो रहे हैं।

यह समय आपके मानसिक और मनोवैज्ञानिक हलचल का भी होता है। जब आप पहली बार महसुस करती है कि आप माँ बनने वाली है, आप एक अलग ही दशा को अनुभव करते है।

पहली तिमाही का में वरतने वाले कुछ सावधानियाँ-

पहली तिमाही में गर्भपात का सबसे ज्यादा खतरा (भ्रूण की स्वाभाविक मृत्यु) माना जाता है, इसलिए इस अवधि में सबसे अधिक सावधान और जागरूक रहने कि आवश्यकता है। निम्नलिखित बातों का ध्यान रखे -

1. धूम्रपान या कोई भी नशे का इस्तेमाल नहीं करे -

यदि आप धूम्रपान या अन्य नशे के इस्तेमाल को बंद नहीं कर सकते है तो मैं आपको सलाह दूंगा कि आप माँ बनने कि इच्छा को त्याग दीजिए। डॉक्टर आपको ऐसा सलाह नहीं देगा...... वह कोई न कोई उपाय बता देगा या नशे के डोज को कम करने का सलाह देगा। मैं आपको माँ बनने कि इच्छा को त्याग करने का सलाह दूंगा। ऐसे मनुष्य को इस संसार में क्यों लाना जो जीवन भर बीमार हो, मानसिक रूप से विक्षिप्त हो और इस संसार पर बोझ हो। आप अनाथालय से बच्चे लाकर अपने बच्चे के शौक को पूरा कीजिये।

2. यात्रा ना करे-

यात्रा तो पुरे 9 महीना ना करे तो सबसे अच्छा, परन्तु इस अवधि में तो बिलकुल ही ना करे।

3. योग और व्यायाम -

हमने भाग-5 में गायित्री परिवार का एक वीडियो शेयर किया है उससे अधिक व्यायाम नहीं करे।भाग -5 में दिए गए वीडियो को इस पूरी 9 महीनों की पावन यात्रा में हर सप्ताह अवश्य सुने।

उस वीडियो का लिंक मैं यहाँ भी दे रहा हूँ।

https://www.youtube.com/watch?v=QP_HlIgqWVk&t=7s



4. आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग-

आज मोबाइल के उपयोग को बंद नहीं किया जा सकता है लेकिन उसके उपयोग को कम किया जा सकता है, उसे अपने शरीर के संपर्क से दूर रखा जा सकता है, स्मार्ट फ़ोन के बदले साधारण फ़ोन का इस्तेमाल किया जा सकता है। मेरे कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि टेक्नोलॉजी के उपयोग को न्यूनतम रखा जाना चाहिए। अब न्यूनतम कि सीमा सबके लिए अलग अलग है। अपने विवेक का इस्तेमाल कीजिये।

पहली तिमाही का एक्शन प्लान-

अपने दिनचर्या को व्यवस्थित कीजिये जसमे हमने 12 क्रिया कलापों का विवेचना किया था

1. पढ़ना

2. लिखना

3. सुनना

4. अपने नन्हे शिशु से बात करना

5. घरों को चित्रों से सजाना

6. खाना बनाना

7.घर में झाड़ू लगाना

8. नींद

9. स्वच्छता

10. योग एवं व्यायाम

11. आहारऔर

12. प्रार्थना

बहन आपको भाग-6 और भाग-7 को फिर से पढ़कर अपने दिनचर्या को व्यवस्थित कर लेना चाहिए।

मैं आपको हाथ जोड़कर बिनती करता हूँ कि इस दिनचर्या को पालन नहीं करने का कोई भी बहाना मत बनाइये। इस दिनचर्या को गरीब से गरीब और अमीर से अमीर बहनें पालन कर सकती है। इस दिनचर्या को पालन करने में यदि कोई कठिनाई हो तो आप मुझसे पूछिए। आप अपने दिनचर्या में इन 12 सुत्रों का पालन कीजिये.... आप एक महान संतान को उत्पन्न कर पाएंगे...... इस बात में मुझे जड़ा भी संदेह नहीं है। इस दिनचर्या के भाव को समझिये और उसका पालन कीजिये। यह दिनचर्या आपको एक महान माता का दर्जा दिला सकता है और इसे कोई भी बहनें आराम से कर सकती है।

हमने भाग-7 में जो प्रार्थना बताया है उसकी कॉपी यहाँ शेयर कर रहा हूँ। इसका प्रिंट निकाल लिजिये और रोज कम से कम दो बार श्रद्धापूर्वक पढ़िए।

Prarthna - Copy

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यह लेख बहनो के लिए है, भाइयों को इसे पढ़ने में रूचि नहीं हो सकता है। इस लेख को बहनो तक पहुँचाने का कृपा कीजिये।

अगले शनिवार को फिर मिलेंगे रात को 9 बजे।

आभार

सोहन कुमार

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विनीत

मोगा पंजाब 06.02.2021



 

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