13 फ़रवरी 2021

अपनेँ बच्चों की परिवरिश कैसे करें ? (भाग 9)

4. गर्भ धारण से बच्चों के जन्म तक (गर्भ संस्कार) (भाग-5)

दूसरी तिमाही -

(इसकी अवधि 13 सप्ताह से 29 सप्ताह तक मानी गयी है।)

आपको बहुत बधाई, आपने चरित्र निर्माण के यात्रा के अपनी पहली तिमाही कोजो सबसे अधिक जटिल और सम्बेदंशील थी उसको पार कर चुके है। आपमें मानसिक और भावनात्मक स्थिरता आ चुकी है। दूसरी तिमाही इस पूरी निर्माण यात्रा का सबसे सुखदायी अवधि है। आप बार बार उलटी करने और बार बार पेशाब के बेग से मुक्त हो चुके है। अपने को सहज अनुभव कर रही है। आपका अपना चेहरा अब और अधिक सुन्दर दिखने लगा है।

इस अवधि में शिशु अपना आकार ले चुका होता है। उसके सभी जरुरी अंग जैसे कि दिल, यकृत और गुर्दे आदि सभी की रचना हो चुकी होती है, और कुछ अंग तो काम भी करना शुरु कर दिया है। लगभग 20वें सप्ताह तक आते-आते, आपको अपने पेट में हलचल महसूस होने लगेंगी। इसे स्पंदन कहते हैं, जिस क्षण में आपका शिशु आपको पहला दस्तक देगा, थोड़ी देर तक आपको यकीन नहीं होगा, आप ध्यान से समझने का कोशिस करेंगी, यकीन ही नहीं होगा और जब यकीन हो जायेगा उस पल आप रोयेंगे या हसेंगे ये नहीं कहा जा सकता, लेकिन अचम्भित हो जायेंगे। एक जीते जागते बच्चे को अपने पेट में अनुभव करना इसे कोई अनुभवी स्त्री ही समझ सकती है।

आपको अपने गर्भ में अपने शिशु का प्रत्यक्ष अनुभव होने लगा है। जब भी आप शिशु पर ध्यान ले जाते है, उससे बातें करते है, उसका प्रार्थना करते है, आपका शिशु उस पर प्रतिक्रिया करता है और आप उसके प्रतिक्रिया को समझने लगे है।

दिनचर्या को पालन करने मेंमैं किसी भी तरह के ढिलाई करने का सिफारिश नहीं करूँगा, बल्कि अब आपको बच्चों से बात करने, बच्चों के साथ खाना खाने और बच्चों के प्रार्थना में ज्यादा आनंद आ रहा होगा।

मैं यहाँ गर्भ संस्कार और प्रार्थना का लिंक फिर से दे रहा हूँ। यह वीडियो और यह प्रार्थना आपको देवकी या कौशल्या सा गौरव प्रदान कर सकता है। आप में कृष्ण और राम को प्रगट करने की पूरी योग्यता है। गर्भ संस्कार का यह वीडियो प्रामाणिक है, वैज्ञानिक है, और धर्मानुकूल है। इस वीडियो को प्रत्येक रविवार को देखिये और इस प्रार्थना को कम से कम दिन में दो बार जरूर पढ़िए।

ईश्वर आपका कल्याण करेंगे।

https://www.youtube.com/watch?v=QP_HlIgqWVk&t=7s

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के लक्षण-

दूसरी तिमाही में पहले तिमाही के लक्षणों से छुटकारा मिल जाता है, लेकिन दूसरी तिमाही में कुछ अलग तरह के लक्षण प्रगट होते है जो निम्नलिखित है-

1. गर्भाशय के आकार में वृद्धि के साथ पेट का बढ़ना:-

अब तक शिशु अपना आकर ग्रहण कर चूका है, उसके शरीर के विकास के साथ साथ गर्भाशय के आकार में वृद्धि होने लगता है और उसी के साथ पेट का आकर भी बढ़ता जाता है।

2. सांस फूलना-

यह सामान्य है क्योंकि जैसे जैसे गर्भाशय बढ़ता है, यह डायाफ्राम पर दबाव बनाता है, डायाफ्राम फिर आपके फेफड़ों पर दबाव बनाता है, जिससे हवा का आवागमन में थोड़ी दिक्क्त होती है। अमूमन यह बहुत तकलीफदेह नहीं होता आराम करने से ये तकलीफ दूर हो जाती है।

3. पेट दर्द

आपका गर्भाशय बढ़ रहा है और आसपास के स्नायुबंधों को फैला रहा है। इस कारण से दूसरी तिमाही के दौरान आपको अपने पेट के आस-पास के हिस्से में कुछ तकलीफ हो सकती है। लेकिन बहुत ज्यादा तकलीफ नहीं होगी।

4. सिर दर्द

लगभग हर गर्भवती महिला को सिरदर्द का अनुभव होता है। यह सबसे आम समस्या है। इस समय भरपूर आराम करें।

अंत में

दूसरी तिमाही को आप इस पुरे अवधि का स्वर्ण काल मान सकते है, जब आप सबसे अधिक आराम में होते है। स्पंदन का पहला अनुभव आप इसी काल में ले पाते है। आपके शरीर के साथ एक और शरीर का जुड़ा होना जो आपका संतान हैउसे आप स्पस्टता से इसी अवधि में अनुभव कर पाते है।

इस तिमाही में आपका शिशु लगातार बढ़ रहा है इस तिमाही के खत्म होते-होते, आपका शिशु लगभग 1 किलोग्राम का हो जाएगा।

दूसरे तिमाही का आनंद लीजिये।

तीसरे और अंतिम तिमाही का विश्लेषण को अगले शनिवार, इसी समय लेकर उपस्थित होंगे।

आभार

सोहन कुमार

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विनीत

मोगा पंजाब Date-13.02.2021



 

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