25 जनवरी 2021

अपने बुढ़ापे को शानदार कैसे बनायें ?

 मित्रों

यदि आपकी उम्र 50 को पार कर गया तो यह लेख आपके लिए है और मेरे लिए भी।

बुढ़ापा जीवन का एक ऐसा अंतराल है, जो अधिकतर लोगों के लिए एक त्रासदी है। ऐसा क्यों होता है कि एक शानदार जीवन जीने वाला व्यक्ति भी बुढ़ापे में त्रासदी को झेलता है ?

मैं अपने बुढ़ापे की तैयारी के सिलसिले में 2017 में जोधपुर के एक बृद्धाश्रम का निरीक्षण किया था। मैं लगभग पूरा दिन उस आश्रम में ही रहा। उस आश्रम में बृद्ध पुरुष एवं महिला दोनों के रहने का इंतजाम था। उस दिन एक महिला का पुत्र आने वाला था। वह महिला इतनी खुस हो रही थी... इतनी बेसब्री से इंतजार कर रही थी..... सबको बता रही थी कि आज उसका बेटा उससे मिलने के लिए आने वाला है। मैं जब तक रहा तब तक उसका बेटा तो नहीं आया था। लेकिन मुझे उसके भावों को देख कर उसके त्रासदी के कारणों का पता लग गया और वह कारण है -

बच्चों से अत्यधिक ममता रखना- आज भी वह महिला उस पुत्र को देखने के लिए लालायित है जिसने उसे घर से निकाल कर बृद्धाश्रम में रख दिया। यदि आपके ममता की सीमा यहाँ तक है तो आप के लिए ये व्यव्हार उचित है। गीता में भगवान् ने सभी दुखो का कारण ममता को बताया हैजो मुझे प्रत्यक्ष दिख रहा था।

मैंने जितने लोगों से बात किया, किसी भी बृद्ध महिला को अपने बेटों से शिकायत नहीं थी, सबको अपने बहुओं से शिकायत थी। बृद्ध पुरुषो को तो अपने बेटों से भी थोड़ा शिकायत था लेकिन उनको भी बहु से बड़ा शिकायत था।

बहुओं से होने वाली शिकायत की थोड़ी चर्चा कर लेते है -

आप जब अपने बेटे की शादी करते है, और वह कमा रहा होता हैआजकल तो कमाना शुरू करने के बाद ही शादी होता है। वह आत्मनिर्भर होता है,… आप पर उसकी निर्भरता होती नहीं है। उसे अपने ससुराल में जो आदर, सम्मान और पहचान मिलता है….उसे लगता है कि यही वो लोग है जिनको मेरे काबिलियत और मेरे रुतबे की समझ है…… जो मेरे माता पिता में नहीं है…… यहीं से आपकी उपेक्षा शुरू हो जाती है आपके बेटे के द्वारा।

पत्नी भी नयी होती है….. उस समय खूबसूरत भी होती है। उसे भी अपना रुतबा दिखाना होता है। और उस भाव में वह अपने पत्नी और ससुराल वाले के साथ आपसे इतनी दूर निकल जाता है कि यदि वह कभी पीछे मुरकर देखे भी तो आप कहीं नजर नहीं आएंगे।

उसके बाद आपके सामने कुछ प्रश्न खड़ा हो जायेगा-

१. आपने अपने जीवन में क्या किया ?

२. आपने अपने बच्चों के लिए क्या किया ? और यदि किया तो कौन नहीं करता है ?

३. आपने अपने जीवन में इतनी गलतियां क्यों की ? आपके जीवन के सारे गलतिओं की लिस्ट आपके सामने होगी। और आपको बताया जायेगा कि इस काम को किस तरह किया जाना चाहिए था।

प्रश्न तो आपके सामने अनेकों होंगे लेकिन आप प्रश्न को नहीं सुन रहें है क्योंकि आपके सामने आपका बुढ़ापा बिकराल दैत्य की तरह आपको घुर रहा है आपको भयभीत कर रहा है…..और सहारे के लिए आपको वही कमजोर लाठी दिख रहा है और डुबते को तिनके का सहारा समझ कर आप इन प्रश्नो को अनसुनी कर देते है।

मित्रों इस पुरे प्रकरण में आपकी बहु कहीं नहीं है। वह सहज अवस्था में है। आपके प्रति उनका कृतज्ञ होना या बहुत अधिक आदर होने का कोई कारण भी नहीं है। बहुओं को तो अनावश्यक बदनामी झेलनी परती है।

आइये इस कमजोर लाठी को तोड़कर फेकते है और एक शानदार बुढ़ापे की योजना बनाते है। 

जीवन तो बीत ही गया है अब तो सिर्फ मजे लेना बाकि रह गया है।

इसके लिए क्या करे ?

1. ममता को छोड़ दीजिये

ममता को छोड़ने का अर्थ ये नहीं की आप कठोर हो जाइये। कठोरता तो ममता से भी अधिक नुकसानदायक है। आप समता में आ जाइये। समता का अर्थ हुआ कि यदि वह ख़ुशी मना रहा है तो बेगानी शादी में बैंड बजाने मत पहुँचिये और यदि दुःख में आ गया है तो उसके लिए ईश्वर से प्रार्थना करने के अलावा कोई सहायता मत कीजिये। ईश्वर से प्रार्थना तो सबके लिए कीजिये बेटे के लिए तो कीजिये ही, बहु के लिए भी कीजिये, उसके बच्चे के लिए भी कीजिये, उसके ससुराल वाले के लिए भी कीजिये। किसी के प्रति मन में दुर्भाव मत रखिये। दुर्भावना आपके मन को दूषित कर देगा और शरीर को बीमार।

2. कुछ समय तक सिर्फ अपने लिए कमाइए-

ऐसा देखने में आता है कि अधिकतर लोग जब तक उनमे काम करने कि क्षमता है, तब तक कमाते ही रहते है और वो भी अपने लिए नहीं…. अपने बच्चों के लिए….. बच्चों में भी खासकर बेटे के लिए।

जो बच्चा अपने माँ बाप के कमाई पर जितना ज्यादा निर्भर होता है वह बच्चा अपने माँ बाप को उतना ही अधिक अपमानित करता है।

मेरे पास उदहारण है I कुछ दिन पहले मैंने पढ़ा था की रेमंड कंपनी, जो कपडा बनती है, उसके मालिक को उसके बच्चे ने कारोबार से बेदखल करके रास्ते पर भटकने के लिए छोड़ दिया। एक आम आदमी रेमंड के मालिक से ज्यादा पैसा तो कमा नहीं सकता। यदि उसे भी बच्चों से अपमानित होना पड़ा, तो इतना तो तय है कि पैसे के बल से आप बच्चों के आतंक का सामना नहीं कर पाएंगे।

तब करे क्या ?

3. बच्चों के प्रति अपने उत्तरदायित्व की सीमा निर्धारित कीजिये

बच्चों के परिवरिश का दायित्व तो हमारा है ही, लेकिन इसकी कहीं ना कही सीमा जरूर होना चाहिए। सीमा का निर्धारण कैसे करे -

A. समय के द्वारा- हम एक समय निर्धारित कर सकते है कि बच्चे को 20 वर्ष या 25 वर्ष या कोई भी अंक जो आपको उपयुक्त लगता हो उस समय तक, बच्चे की देखभाल करेंगे, जो भी हमारा सामर्थ्य होगा, हम करेंगे, उसके बाद जो भी करेंगे वो अपने लिए करेंगे।

B. धन की मात्रा के द्वारा - आप धन की सीमा निर्धारित कर सकते है कि हम अपने बच्चे के लिए १० हजार 10 लाख जो भी आप रकम तय करते है उस रकम से अधिक बच्चे को नहीं देंगे, उसके बाद जो भी रहेगा उसे हम अपने लिए रखेंगे।

C. किसी कार्य की सम्पन्नता तक - जैसे ग्रेजुएशन करने तक हम देखभाल करेंगे, या नौकरी लगने तक लेकिन यदि उसे जीवन भर नौकरी ही ना लगे इसलिए इसकी भी एक सीमा तय कर सकते है, शादी होने तक या अन्य कोई भी।

हो सकता है कि आपके बच्चे आपके इस सीमा ननिर्धारण से नाराज हो जाय, लेकिन नाराज तो वह रेमंड के इतना धन बना लेंगे तब भी हो सकता है। इसलिए उसकी चिंता मत कीजिये। अपने बुढ़ापे की चिंता कीजिये जो बिकराल दैत्य की तरह आपकी और बढ़ रहा है।

4. अपने आमदनी और खर्चे का हिसाब रखिये

यह सारी सीमाएँ आप तब निर्धारित कर सकते है, जब आपके पास अपनी आमदनी और खर्चे का हिसाब हो। होता ये है कि बच्चे जो कमाते है उसे तो वो अपनी निजी कमाई मानते है और आप जो कमाते है उसे भी वो अपनी आमदनी मानते है। मतलब कि बच्चे के कमाई पर आपका अधिकार नहीं है, लेकिन आपके कमाई पर बच्चे का अधिकार है। आपके कमाई पर तो उसका शुरू से अधिकार रहा है। लेकिन जब उसने अपनी कमाई को अपना मान रहा है….. आपका नहीं मान रहा है.... तो आपको भी अब से अपनी कमाई को अपना ही मानना चाहिए………………………….. यही समता है।

5. जीवन के कुछ भाग को खर्च करने के लिए बचा कर रखिये -जीवन के अंतिम समय तक कमाने के ही चक्कर में मत रहिये। अपने बच्चों के उत्तरदायित्व की सीमा आपने निर्धारित कर लिया। अब अपने जीवन के अंत समय तक के लिए अपने खर्चे का भी आकलन कर लीजिये। ऐसा मन ही मन मत कीजिये कॉपी कलम लेकर हिसाब कर लीजिये। बुढ़ापे के सभी खर्च, यदि पेंशन मिल रहा हो तब तो कोई बात ही नहीं, यदि पेंशन नहीं मिलने वाला हो तो बिना परिश्रम का कुछ पैसे जीवन भर आते रहे इसका इंतजाम कर लीजिये। बच्चे बेरोजगार है इसकी चिंता मत कीजिये, भूख लगेगा तो रोजगार ढूंढ लेगा, अपनी चिंता कीजिये, आपको भूख लगेगा तब भी आपको रोजगार नहीं मिलेगा।

अपने लिए इतना पैसा जमा मत कीजिये कि उसे जमा करते करते आपका जीवन बीत जाये। बाद में आपके बच्चे मजे लूटेंगे।

जीवन का मजा लीजिये, पैसा कमाना बन्द कर दीजिये, कमाते कमाते ही मत मरिये। जीवन चूक जायेगा।

यदि आपकी आर्थिक हालात अच्छी ना हो तो आपको ऐसा लगेगा कि यह लेख आपके लिए नहीं है। यदि आपकी आर्थिक हालात अच्छी नहीं है तो यह लेख खास करके आपके लिए ही है। जीवन निर्वाह के लिए आर्थिक हालात से अधिक मानसिक हालात को दुरुस्त रखना ज्यादा महत्व रखता है। हम तो सिर्फ मानसिक हालात को सही रखने का उपाय करते है और यदि आर्थिक हालत अच्छी ना हो तब तो सिर्फ मानसिक हालात को ही दुरुस्त करने का उपाय बचता है।

6. स्वस्थ रहिये -

मैंने जब बुढ़ापे को शानदार बनाने के विषय पर लिखने के लिए सोचा तो मैं पहला स्थान स्वस्थ को देना चाहता था, लेकिन लिखने से पहले मुझे बृद्धाश्रम का ध्यान आया, इसलिए मैं पहले बच्चों से तालमेल बिठाने के विषय का चर्चा किया, जो बुढ़ापे के लिए स्वास्थय से भी अधिक महत्व का है।

बच्चे यदि आज्ञाकारी रहे तो शानदार बुढ़ापे के लिए और क्या चाहिए ! लेकिन आज के बच्चे की जिम्मेवारी कौन ले ?

इस विषय के अगले भाग को जल्द लेकर आएंगे।

आप मेरे लेख को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसके लिए आपको बहुत धन्यवाद।

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आप मेरे ब्लॉग sohankumarroy.blogspot.com को जरूर subscribe कर लीजिये । मैं पारिवारिक और सामाजिक जटिलताओं का चिंतन करता हूँ और उसे सुलझाने का रास्ता तलाशता हूँ, ताकि इस अनमोल जीवन को अधिक सुख, शांति और भाईचारे के साथ से जिया जा सके।

 25.01.21



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