06 मार्च 2021

अपनेँ बच्चों की परिवरिश कैसे करें ? (भाग 12)

 5. प्रथम दिन से 1 वर्ष तक (भाग-2) (एकांतवास)

पिछले अध्याय में हमने जिन विषयों की चर्चा किया वह था-

1. प्रसव कराने की प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति -

2. नाल छेदन संस्कार-

3. बच्चे का पहला स्नान-

इस अध्याय में में हम प्रसव के बाद एकांतवास का अर्थ, उसकी उपयोगिता और इस अवधि में बरतने वाली सावधानिओं की चर्चा करेंगे।

प्रसूति के बाद एकांतवास का क्या अर्थ है?

हमारा देश परम्पराओं का देश है, हमारी परम्पराएँ हमारी जीवन शैली रही है…. एक ऐसी जीवन शैली जो इतनी वैज्ञानिक है कि हमें प्रसव जैसी जटिल क्रिया के लिए भी कभी डॉक्टर की जरुरत नहीं थी। हमने पश्चिमी जीवन जिसे हम आधुनिक जीवन शैली कहते है और जिसे अपनाकर हम अपने को स्मार्ट समझते है।

क्या मिला हमें इस तथाकथित आधुनकता से ? बीमारी, शारीरिक और मानसिक कमजोरी, अपने मेहनत के कमाई को डॉक्टर को अर्पित कर देना, मेडिकल इंश्योरेंस के नाम पर अरबो खरबो का कारोबार जो हमारी बीमारी और हमारी मूर्खता के वजह से चल रही है।

विचार कीजिये और इन मूर्खतापूर्ण जीवन शैली से बहार निकलिए। अपने लिए नहीं तो अपने बच्चे पर कृपा कीजिये। उसे अपने पारम्परिक जीवन शैली में विकसित होने दीजिये।

एकांत का बहुत सीधा अर्थ है जहाँ कोई नहीं हो, लेकिन बच्चा तो है, लेकिन बच्चा आपसे अलग नहीं है। 9 महीने तक वह आपके शरीर के अंदर था और आँखों से ओझल, अब वह शरीर के बहार है और आँखों के सामने….. लेकिन अभी वह आपके प्राण से अलग नहीं है।

एकांतवास में क्या करें- ?

1. अधिकतर समय एकांत में रहिये सिर्फ अपने बच्चे के साथ-

आप जिस घर में एकांतवास कि प्रक्रिया से गुजर रहे है उस घर में कम से कम लोगों का आना जाना होना चाहिए। किसी भी अन्य व्यक्ति से कम से कम संपर्क रखिये, यहाँ तक कि अपने पति से भी। अधिकतर समय अपने बच्चे के साथ बिताइए, उससे बातें कीजिये, उसके साथ खेलिए और जब वह सो जाये आप भी आराम कर लीजिये। घर के बहार भी अनावश्यक मत निकालिये।

2. मन को प्रसन्न रखिये --

मन की प्रसन्नता तो जीवन के हर घड़ी में आवश्यक है लेकिन इस समय विशेष प्रसन्नता की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि आप बहुत थक गयी है, आप शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर अस्त व्यस्त हो चुके है और यदि आप चाहते है की आप जल्दी से अपनी पूर्व अवस्था में लौट आये तो मन कि प्रसन्नता एक ऐसे रामबाण औषधि है जो आपको इस अस्त व्यस्तताओं से बहार निकल देगी। मन कि प्रसन्नता के लिए आप मधुर संगीत का आनंद ले सकती है।

3. मोबाइल इंटरनेट एवं अन्य रेडियशन युक्त उपकरण से दूर रहिये-

आज कल मोबाइल के बिना मन को प्रसन्न रखना थोड़ा कठिन मालूम देता है, लेकिन मैं आपसे विनती करता हूँ कि बच्चों को मोबाइल से जरूर ही दूर रखिये और आप भी मोबाइल के संपर्क में कम से कम रहिये। ये रेडिएशन बहुत ही हानिकारक है, बच्चों कि स्थिति में तो यह कभी कभी जान भी ले सकता है।

क्या आपको पता है दुनिया के सबसे अमीर आदमी बिल गेट्स ने अपने बच्चों को 14 साल की उम्र तक मोबाइल नहीं दिया था। इसी तरह स्टीव जॉब्स ने 2011 में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपने बच्चों को कभी भी आईपैड इस्तेमाल नहीं करने दिया था।

आजकल के अमीर घरों में मोबाइल तो बच्चों के खेलने कि वस्तु हो गयी है, मैं आपको दुनियाँ के सबसे अमीर आदमी का उदहारण दिया हूँ। इसलिए बहन आपके पडोसी क्या कर रहे है इसे मत देखिये मैं आपको दुनियाँ के महान लोग क्या कर रहे है और अपने बच्चे को महान कैसे बना सकते है, इसे सीखा रहा हूँ ।

4. प्रतिदिन अपनी मालिश करवाइये -

एकांतवास् के दौरान दिन में एक बार माँ के पुरे शरीर की मालिश होना आवश्यक है, अपने स्तनों और निपल्स को छोड़कर। इससे आपके थके हुए शरीर को काफी आराम मिलेगा। यह आपके रक्तसंचार में भी मदद करता है। मालिश के लिए जो तेल का उपयोग किया जाता है वह भारत के बिभिन्न प्रदेशों में भिन्न भिन्न है उत्तर भारत में सरसों का तेल, दक्षिण भारत में नारियल के तेल का प्रयोग किया जाता है, कई प्रदेशों में बादाम, तील, जैतून सूर्यमुखी आदि तेलों का भी प्रयोग होता है। यदि आप उत्तर भारत के रहने वाले है तो आपको मैं सरसों के तेल को थोड़ा लहसुन या अजवाइन के साथ गर्म करके फिर उसे ठंढा करके मालिश करने का सलाह दूंगा।

5. प्रतिदिन बच्चे का मालिश कीजिये या करवाइये --

बच्चे के मालिश के सम्बन्ध में अगले अध्याय में विस्तार से चर्चा करेंगे और यह एकांतवास के बाद भी जारी रहता है।

6. अधिकतर आराम कीजिये -

इस समय आराम करना उतना आसान नहीं होता जबकि इस समय आपको आराम की बहुत आवश्यकता है। आपका बच्चा दिन रात कभी भी दूध पिलाने के लिए या पेशाब करके आपके आराम में बाधा दे सकता इसलिए एकांतवास आवश्यक है……आपके पास कोई दूसरा काम नहीं है और जब बच्चा आराम कर रहा है आप भी आराम कर लीजिये।

7. संतुलित आहार लीजिये-

आमतौर पर यह माना जाता है की प्रसूति के बाद नई माँ के शरीर के संतुलनमें बदलाव आता है और बहुत खून जाने के कारण "ठंडी अवस्था" में चला जाता है। इसलिए एकांतवास का भोजन अक्सर ऐसी सामग्रियों से बनाया जाता है, जो गर्माहट देने वाली मानी जाती हैं। माना जाता है की यह गर्म खाद्य पदार्थ माँ को शिशु के जन्म के बाद जल्द ठीक होने में मदद करते हैं। दूध, दाल,लौकी और तोरी दूध की आपूर्ति बढ़ाने के लिए अच्छे माने जाते हैं। फल, फलों का जूस आदि ठंढे पदार्थ ना ले।

8. बच्चे को दूध पिलाना सीखिए -

यदि यह आपका पहला बच्चा है तो बच्चे को दूध पिलाना आपके जीवन का पहला अनुभव है। दूध पिलाने के सम्बन्ध में थोड़ी सावधानी ये रखे कि जब बच्चे को दूध पिलायें तो बैठकर सावधानी से और प्रेमपूर्वक दूध पिलायें। लेटे हुए और अनमने ढंग से दूध ना पिलाये। यह वैसा ही है जैसे कोई आपके सामने में खाना रख दे और चला जाय…... और कोई आपको सामने बैठकर खाना खिलाये....... आपको पूछे खाना कैसा है? दोनों में कितना फर्क है ?

सावधानी पूर्वक और प्रेमपूर्वक दूध पिलाने से आपके बच्चे अधिक स्वस्थ, और ऊचे मनोबल बाला होगा। बातें छोटी छोटी है लेकिन असर बहुत जबरदस्त है।

9. कृत्रिम पदार्थों के उपयोग से बचिए -

बच्चों के नहाने, श्रृंगार करने, दूध या दवा के रूप में किसी भी कृत्रिम पदार्थों का उपयोग मत कीजिये। आजकल बाजार में बच्चों के उपयोग के लिए बिभिन्न प्रकार का सामिग्री उपलब्ध है और उसका कीमत इतना अधिक है कि आपको लगेगा कि इसमें जरूर कुछ खास बात है एप्पल मोबाइल कि तरह, और उसके ऊपर बच्चे का इतना प्यारा तस्वीर होता है, भला कौन ऐसा बच्चा नहीं चाहेगा ........बहन इस धोखे से बच कर रहना वरना आप पुरे जीवन के लिए अपने बच्चे को बीमार बना दोगे।

नहाने के लिए मुल्तानी मिटटी का उपयोग कीजिये, कभी कभी पंचगव्य स्नान कराइये जो मैंने पिछले अध्याय में बताया था।

तेल के लिए शुद्ध सरसों, नारियल या कोई भी तेल लगाइये लेकिन वह डब्बे वाला मत खरीदिये चाहे वह पतंजलि का ही क्यों न हो। कोल्हू पर जा कर सामने में तेल निकलवाइये और उसका उपयोग कीजिये।

काजल के लिए देशी गाय का दिया जलाकर काजल बनाइये।

रात को सोते समय बच्चे के ओठ और नाभि पर देशी गाय का घी लगा दीजिये।

यदि माँ का दूध कम पर रहा हो तो गाय का दूध प्रयोग कीजिये। गाय के दूध को भी 2-3 बार मलाई निकलने के बाद ही बच्चे को पिलाइये। बकरी का दूध भी अच्छा है। डब्बे वाला दूध कभी मत दीजिये।

शर्दी, दस्त आदि की हालत में प्रकृतिक जड़ी बूटी का इस्तेमाल कीजिये दवा कभी मत पिलाइये।

कोई भी पॉवडर, क्रीम, काजल आदि का प्रोयोग मत कीजिये।

यदि आपने एकांतवास का उपयोग सावधानीपूर्वक किया तो 40 दिन के बाद आप फिर से उसी रूप में आ जायेंगे जिस रूप में आप 9 महीना 40 दिन पहले थे।

कुछ महिलाये प्रसव का बाद पुरे जीवन बीमार और अवसाद जैसी अवस्था में रहती है, जिसका कारण एकांतवास के समय को सावधानीपूर्वक नहीं उपयोग करना हो सकता है।

एकांतवास का आनंद लीजिये।

अगले अध्याय में हम सीखेंगे बच्चे की मालिश कैसे करे ?

आप मेरे लेख को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसे शेयर भी कीजिये ताकि उचित लोगों तक यह पहुँच सके।

आभार

सोहन कुमार

मोगा पंजाब दिनांक- 06.03.2021



 

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