27 फ़रवरी 2021

अपनेँ बच्चों की परिवरिश कैसे करें ? (भाग 11)

अध्याय 5. प्रथम दिन से 1 वर्ष तक (भाग-1) (प्रसव काल)

आज वह दिन आ गया जिसका इंतजार आप पिछले 9 महीनों से कर रहें है। जब प्रसव पीड़ा शुरू हो जाये। आज कल अधिकतर प्रसव हॉस्पिटल में होता है, लेकिन हॉस्पिटल में जाने से पहले एक बार भगवन के अलावा, अपने पितरों को ध्यान करे और उनकी पूजा कर ले। पितरों की प्रसन्ता से आपका बच्चा यस्वशी होगा और आपको पीड़ा भी कम होगा।

यदि आपका डिलीवरी घर में हो रहा है तो आप सौभाग्यशाली हैं, और मैं आपको 100% सामान्य और अत्यंत कम पीड़ा में प्रसव कराने की अपनी प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति बता देता हूँ।

प्रसव कराने की प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति -

जब प्रसव काल नजदीक आ जाये 100 ग्राम गाय के गोबर का रस बना ले। गाय के गोबर का रस कैसे बनाएंगे इसे समझ लीजिये। साफ सूती का कपडा लीजिये, यदि नया हो तो और भी अच्छा है, लेकिन नया हो फिर भी पानी में गंगाजल डाल कर उस कपडे को भींगा लीजिये, उसके बाद कपडे को अच्छी तरह निचोड़ कर उसके ऊपर गोबर रखिये और पोटली बना कर गोबर के रस को निचोरिये फिर इस रस को 7 बार भींगे हुए सूती कपड़े से छानिये। अब यह छाना हुआ रस वह परम औषधि है जिसका प्रयोग आज तक एक बार भी असफल नहीं हुआ है।

आप सोच रहे होंगे कि उपाय तो अच्छा है, जो प्रयोग एक बार भी असफल नहीं हुआ उससे अच्छा और क्या हो सकता है, जिसमे सफलता कि गारंटी हो। लेकिन गोबर के रस को पीना आपको दुर्लभ लग रहा होगा।

मेरी प्यारी बहन, जब आपको वह दर्द आएगाआपके मुँह के सामने यदि जहर का प्याला रख दे और आपको यकीन हो कि इसको पिने के बाद आपका दर्द कम हो जायेगा और बच्चा बाहर आ जायेगा, तो आप पी लेंगे। आप यह रस बना कर रखिये 1 सप्ताह तक यह ख़राब भी नहीं होता। जब आपको दर्द आएगा उस समय पीजिये, अभी मत सोचिये कि मुझे पीना है, फिर वह रस आप बनाएंगे ही नहीं।

आप रस बना कर रखिये उस समय यदि आपको पिने का मन नहीं हो तो मत पीजिएगा।

हमारे ऋषिओं ने प्रसव कि जो बिधि बताया है वह उतना कठिन नहीं होगा जितना किया ही ना जा सके।

आज भी हमारे देश में कामधेनु चिकित्सा पद्धति द्वारा प्रसव क्रिया सम्पादित होता है और 100% सफल होता है। लेकिन ज्यादा पढ़ी लिखी महिलाओं को हमारी बात को समझने में कठिनाई होगी।

नाल छेदन संस्कार-

बच्चे के जन्म के बाद जो पहला काम होता है वह है नाल छेदन संस्कार। हमारी संस्कृति में प्रसव क्रिया के सभी कार्यों को संस्कार का नाम दिया गया है क्योंकि इस अवधि कि प्रत्येक क्रिया बच्चे के संस्कार को प्रभावित करता है।

नाल छेदन संस्कार में हम माँ से बच्चे के नाभि को काट कर अलग करते है।

आज कल हॉस्पिटल में नर्स के द्वारा ही नाल छेदन संस्कार होता है जिसमे चाकू से नाभि को काट कर अलग कर दिया जाता और कोई इन्फेक्शन ना हो इसके लिए कोई दवा लगा दिया जाता है।

नाभि छेदन एक अत्यंत महत्व का संस्कार है, क्योंकि नाभि का सीधा सम्बन्ध मष्तिस्क के साथ है। नाभि को दूसरा मुख बताया गया है। पुरे गर्भ काल में बच्चे नाभि के द्वारा ही पोषण प्राप्त करता है।

नाभि छेदन कैसे करे ?

1. जिस चाकू से नाभि काटना हो पहले उसे खूब गर्म कर ले फिर उसे गौमूत्र में डाल कर ठंढा कर दे, फिर इस चाकू का प्रयोग नाभि काटने में करें।

2. नाभि काटने के बाद कोई लोशन या दवा ना लगाए। एक कटोरे में गौमूत्र लेकर उसमे हल्दी मिला दे और कटे हुए नाभि पर लगा दे कोई इन्फेक्शन नहीं होगा, आपका बच्चा चिड़चिड़ा नहीं होगा एकदम शांत स्वभाव का होगा।

बातें छोटी छोटी है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत बड़ा है।

बच्चे का पहला स्नान-

आज कल बाजार में बच्चों के उपयोग की जाने वाली बस्तुओं का जितना बड़ा बाजार है, उतना जवान लोगों के उपयोग की जाने वाली बस्तुओं का नहीं है। आपको बच्चो के कपडे जितने महंगे मिलेंगे उतने जवान लोगों के नहीं मिलेंगे।

कारन साफ है बच्चे के प्रति आपका भावनात्मक लगाव है और दुकानदार इस बात को जनता है। चलिए आप कपडे महंगे देना चाहते है तो दे दीजिये और यदि पैसे अधिक है तो जरूर दीजिये लेकिन बेबी सोप और पाउडर आदि अपने बच्चे को मत लगाइये उसे भविष्य का चर्म रोगी मत बनाइये।

क्या करे ?

पहली बार जब आप अपने बच्चों को नहला रहें है उससे पहले उसे गौमूत्र से मालिश कीजिये, फिर गोबर, घी, दही और दूध से मालिश कीजिये उसके बाद उसे कुशोदक जल से स्नान कराइये। कुशोदक जल किसे कहते है समझ लीजिये। रात को ताम्बे के बर्तन में जल रख कर उसमे 1-2 कुश रख दीजिये। सुबह कुश को निकाल दीजिये और उस जल से स्नान कराइये।

आपके बच्चे को पुरे जीवन कोई भी चार्म रोग नहीं होगा……. इसे या तो मान लीजिये या प्रयोग करके देख लीजिये।

परिवरिश की यह श्रृंखला चलती रहेगी, और पढ़ते भी बहुत ध्यान से है I इसे शेयर भी कीजिये ताकि उचित लोगों तक यह पहुँच सके।

आभार

सोहन कुमार

मोगा पंजाब दिनांक- 27.02.2021





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