5. प्रथम दिन से 1 वर्ष तक (भाग-3) (बच्चे की मालिश)
पिछले अध्याय में हमने प्रसूति के बाद एकांतवास के विषयों को समझा था और
एकांतवास में क्या करें ?इस सम्बन्ध
में निम्नलिखित विषयों का चर्चा किया था -
1. अधिकतर समय
एकांत में रहिये सिर्फ अपने बच्चे के साथ-
2. मन को प्रसन्न
रखिये --
3. मोबाइल, इंटरनेट एवं अन्य रेडियशन युक्त उपकरण से दूर रहिये-
4. प्रतिदिन अपनी
मालिश करवाइये -
5. प्रतिदिन
बच्चे का मालिश कीजिये या करवाइये
6. अधिकतर आराम
कीजिये -
7. संतुलित आहार
लीजिये-
8. बच्चे को दूध
पिलाना सीखिए - और
9. कृत्रिम
पदार्थों के उपयोग से बचिए -
इस अध्याय में में हम बच्चों के मालिश करने के विषयों को सीखेंगे।
नवजात शिशु की मालिश करना भी हमारे देश की प्राचीन परंपरा है और आज के आधुनिक
डॉक्टर भी मालिश करने की सिफारिश करते है। लेकिन मालिश सिर्फ स्वास्थय का विषय
नहीं है यह मानसिक और भावनात्मक विषय भी है।
मालिश कौन करे ?
बच्चे की मालिश यदि माँ स्वयं करे तो सबसे अच्छा। आपको नहीं आती तो कोई बात नहीं अभी मैं सीखा रहा हूँ, सीख लीजिये। माँ के अलावा भी घर का कोई भी सदस्य बच्चे की मालिश कर सकता है। आज कल बच्चे की मालिश के लिए प्रशिक्षित बाई मिल जाता है लेकिन कृपा करके उस व्यक्ति से मालिश मत करवाइये जिसे मालिश के बदले आपको पैसे देने पड़े। पैसे देकर आप अपनी मालिश करवा लीजिये लेकिन बच्चे की मालिश यदि पैसे के लिए कोई कर रहा है तो उसका उतना ही लाभ होगा जितना डॉक्टर बताता है।
मालिश का समय बच्चे के लिए वह समय होता है जब वह अपने सम्पूर्ण भावनाओं को व्यक्त करने का कोशिश करता है। उसके पास अभी शब्द नहीं है लेकिन इस समय आप उसके सभी भावनाओं को स्पष्टता से समझ सकते है। उसका रोना, उसका हँसना, कभी खिलखिलाना, कभी मालिश के लिए आराम से तैयार होना, कभी तैयार नहीं होना। बिना शब्द का इससे अधिक अभिव्यक्ति आप बच्चे में किसी भी अन्य समय में नहीं पाएंगे। दूध पीते समय वह आँख बंद करके भी दूध पी लेगा लेकिन ये समय उसके उत्सव का समय है।
उसके उत्सव में आप हिस्सा लीजिये।
उसके उत्सव का कीमत मत दीजिये उसके उत्सव का हिस्सा बनिए।
मालिश के और क्या क्या लाभ है ?
1. स्पर्श का लाभ-
स्पर्श का अनुभव हम सभी को है आज भी यदि आप अपनी माँ को स्पर्श करे, आप अलग अनुभव करेंगे, पिता को स्पर्श करेंगे तो एक दूसरा अनुभव होगा। हरेक व्यक्ति के स्पर्श का जो अनुभव है वह उसके विचार को अपने में अनुभव करने जैसा है, इसलिए अपनी संस्कृति में चरण स्पर्श का रिवाज है, जब आप किसी के चरण को स्पर्श करते है तो उसके विचार को अपने में अनुभव करने लगते है। इसलिए बड़े लोगों के विचारों को ग्रहण करने का यह आसान साधन था। आज कल कोई चरण तक तो झुकता ही नहीं जींस पेंट के कारण और यदि झुक भी जाये चरण तो मिलेंगे नहीं, जुते ही मिलेंगे।
चरण स्पर्श विचारवान लोगों के अच्छे विचारों को आसानी से ग्रहण करने का एक
वैज्ञानिक रिवाज है।
यदि आपको स्पर्श के सूक्ष्मता का अभी तक अनुभव नहीं हुआ है तो अभी कर लीजिये।
किसी को गले लगा कर देखिये। किसी का भी स्पर्श आपके मनोभावों को बदल कर ही रहेगा।
ऐसा संभव ही नहीं है कि आप किसी को स्पर्श करे और अपने मनोभावों को बिलकुल ही ना
बदलने दे। इसे आप कभी भी प्रयोग कर लीजिये।
सोचिये यदि स्पर्श के बाद आप भी अपने मनोदशा को प्रभावित होने से नहीं रोक
पाते है तो बच्चे के स्पर्श से उसका मनोदशा कितना प्रभावित होता होगा ?
बच्चे को स्पर्श कीजिये। अपने प्यार के भावना को उस तक पहुँचाइये। अपने आदर, सदभावना, नम्रता, प्रियता, सम्मान आदि के
भाव को पहुँचाइये।
इसे मैं मालिश का सबसे बड़ा लाभ मानता हूँ।
2. नींद अच्छी आती है :
अच्छी नींद आने में मालिश अहम भूमिका निभाती है। सोने से पहले शिशु की मालिश करने से शिशु के शरीर में अधिक मेलाटोनिन उत्पन्न होता है। यह हार्मोन अच्छी नींद के लिए जरूरी माना जाता है।
3. तनाव कम होता है और मांसपेशिओं को आराम मिलता है -
मालिश से शिशु का तनाव कम होता है। शिशु की मालिश से उसके शरीर में खुशी को महसूस कराने वाला हार्मोन ऑक्सीटोसीन जारी होने लगाता है, साथ ही तनाव का कारण बनने वाला हार्मोन (कोर्टिसोल) में कमी आती है। इसके अलावा बच्चे की मांसपेशियों में आराम मिलता है, जिससे आपके बच्चे का विकास तेजी से होता है।
4. तंत्रिका तंत्र उत्तेजित होता है-
शिशु की मालिश करने से उसका तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) उत्तेजित होता है और मांसपेशियों के तालमेल में भी सुधार होता है।
5. पाचन, रक्त संचार और सांस लेने में फायदा : -
शिशु की मालिश करने से शिशु का रोना कम हो जाता है और उसका पाचन व रक्त संचार दुरुस्त होता है। साथ ही उसे श्वसन संबंधी फायदे भी होते हैं। इसके अलावा, शिशु की मालिश करने से गैस व कब्ज जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं।
अब हम सीखते………………… है मालिश कैसे करे ?
बहन……. आपके बच्चे के मालिश के लिए आपके घर के जो भी बुजुर्ग महिलायें है उनसे अधिक प्रशिक्षित और कोई नहीं है, लेकिन आज कल अधिकतर घरों में बुजुर्गों के लिए स्थान ही नहीं है, उनके जीवन के इन वास्तविक अनुभवों का कोई जरूरत नहीं समझते या आज के समय में इसकी कोई जरूरत हो ही नहीं………..
आज हर काम के लिए प्रशिक्षित लोग मिल जाते है ; प्रशिक्षित लोगों के द्वारा मालिश करने से आप उसके शारीरिक विकास के लिए निश्चिंत हो सकते है, लेकिन उसके मानसिक और भावनात्मक स्तर को सम्बेदनहीन बनने से नहीं बचा सकते।
मालिश शब्द के उच्चारण से मस्तिष्क में कुछ पहलवान जैसा आकृति बनता है, लेकिन यह मालिश ऐसा नहीं है।
इस समय बच्चों के शरीर का स्पर्श उसके मानसिक और भावनात्मक स्तर को अत्यंत
प्रभावित करता है।
मालिश करने के इस अध्याय को अगले अध्याय में जारी रखेंगे।
आप मेरे लेख को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसे शेयर भी कीजिये ताकि उचित लोगों तक यह पहुँच सके।
आभार
सोहन कुमार
मोगा पंजाब दिनांक- 13.03.2021
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