5. प्रथम दिन से 1 वर्ष तक (भाग-4) (बच्चे की मालिश-2)
पिछले अध्याय में हमने पढ़ा था की मालिश कौन करे और मालिश से होने वाले निम्नलिखित लाभों के बारे में चर्चा किया था
1. स्पर्श का लाभ-
2. नींद अच्छी आती है -
3. तनाव कम होता है और
मांसपेशिओं को आराम मिलता है -
4. तंत्रिका तंत्र उत्तेजित
होता है-
5. पाचन,
रक्त
संचार और सांस लेने में फायदा -
इस
अध्यायमे हम सीखेंगे कि…… मालिश कैसे करे ?
1. स्थान का चयन
कीजिये-
मालिश करने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान जमीन पर चटाई बिछाकर उसपर हल्का गद्देदार कपडा बिछा दीजिये फिर ऊपर से हल्का तौलिया या चादर बिछा दीजिये जो अक्सर तेल लगने के कारण गन्दा हो जाता है और जिसे मालिश के बाद आसानी से साफ किया जा सके। बैठने के स्थान पर तेल और काजल रख लीजिये।
तेल कौन
सा प्रयोग करे यह निर्धारित नहीं है। बिभिन्न प्रदेशों में अलग अलग तरह के तेलों
का प्रयोग होता है। मौसम के हिसाब से भी तेलों के प्रकार में परिवर्तन होता है
जैसे शर्दी में सरसों का और गर्मी में नारियल का तेल प्रयोग करना चाहिए। दिन में
जितनी बार मालिश करते है आप अलग अलग समय में अलग अलग तेलों का प्रयोग कर सकते है।
सबसे अधिक ध्यान रखने कि बात ये है कि जो भी तेल प्रयोग कर रहे है वह शुद्ध और
प्राकृतिक होना चाहिए।
शुद्ध और प्राकृतिक तेल कहाँ से लाएँ ?
भारतीय बाजार में कोई भी तेल शुद्ध और प्राकृतिक नहीं है चाहे वह पतंजलि हो या डाबर। जो बस्तु बंद डब्बे में मिल रहा है वह शुद्ध और प्राकृतिक नहीं है।
इस बात को
फिर से बता रहा हूँ ……………. जो बस्तु बंद डब्बे में मिल
रहा है वह शुद्ध और प्राकृतिक नहीं है ……..चाहे वह पतंजलि हो या डाबर।
शुद्ध और
प्राकृतिक तेल प्राप्त करने का एक ही देशी उपाय कारगर है,
बाजार से
सरसों, राई,
तिल,
मूंगफली,
आदि जो भी
तेल आप चाहते उस तेलहन अनाज को बाजार से खरीद लीजिये और कोल्हू पर जाकर अपने सामने
में तेल निकलवा लीजिये।
काजल भी
शुद्ध देशी गाय के घी का प्राकृतिक ढंग से अपने घर में बनाइये।
2. स्वयं को तैयार कीजिये –
मालिश करने से पहले अपने आप को तैयार कीजिये जैसे किसी अत्यंत महत्वपूर्ण काम को करने से पहले, अपने आप को तैयार किया जाता है।
किसी भी
नकारात्मक मानसिक दशा में बच्चे की मालिश मत कीजिये।
नकारात्मक
मानसिक दशा क्या है ? इसे समझिये।
आपका शरीर
कमजोर है और आपको तकलीफ हो रहा है यह नकारात्मक मानसिक दशा नहीं है। यह वर्तमान
परिस्थिति है। परिस्थिति सुखदायी या दुखदायी हो सकता है। आपका शरीर कमजोर है या
आपके जीवन में कोई ऐसा अप्रिय व्यक्ति है जिसे आप अपने जीवन से निकाल भी नहीं सकते
है। यह आपकी परिस्थिति है आपका सोच नकारात्मक तब होगा जब आप अपने स्वस्थ्य के लिए
निराश हो जायेंगे या जो व्यक्ति आपको पसंद नहीं उससे बदला लेने का मन बनाएंगे।
सकारात्मक मानसिकता तुरंत कैसे बनाये ?
आपको शारीरक या मानसिक जो भी तकलीफ है उसके लिए थोड़ा रो लीजिये। शारीरिक तकलीफ के लिए ईश्वर से विनती कीजिये। आपके तकलीफ में थोड़ी कमी तुरंत आ जाएगी। मानसिक तकलीफ के लिए जिस व्यक्ति से तकलीफ है उसे क्षमा कर दीजिये।
किसी से
भी जितना घृणा करते है उससे अधिक अपने बच्चो से प्यार कीजिये।
क्षमा एक
ऐसी रामबाण औषधि है जो मानसिक तकलीफ को तुरंत आराम देती है।
आपको अपने
बच्चों के मालिश के लिए तुरंत तैयार होना है। ईश्वर से प्रार्थना कीजिये और जिससे
शिकायत है उसे क्षमा कर दीजिये। आप तुरंत सकारात्मक मानशिक दशा को ग्रहण कर लेंगे।
अपने
हांथो को अच्छी तरह साबुन से धो लीजिये और साफ तौलिये से पोछ लीजिये,
तेल काजल
आदि को अपने नजदीक रख लीजिये ताकि आपको बार-बार अपने जगह से उठना ना परे। मालिश के
सतह पर बैठिये…बच्चे को अपने गोद में रखिये।
3. अपने हथेलिओं को रिचार्ज कीजिये –
अपने दोनों हथेलिओं को 10 सेकंड तक देखिये, फिर 10 सेकंड तक आँख बंद करके, अपने शरीर के सम्पूर्ण ऊर्जा को अपने हथेलिओं में अनुभव कीजिये। इसे आप अपने हथेलिओं को रिचार्ज करना कह सकते है। यह बहुत कारगर है। 20 सेकंड का यह अभ्यास आपके मालिश करने के गुणवत्ता को 50% तक बढ़ा देगा।
आप अपना
ध्यान शरीर के जिस अंगों पर ले जाते है वह अंग अधिक सक्रिय और सम्बेदंशील हो जाता
है। आप यह प्रयोग करके देख लीजिये आप अपना ध्यान अपने शरीर के किसी अंग पर ले
जाइये, आप अपना ध्यान अपने शरीर के
जिस अंग पर ले जायेंगे वहाँ आप एक सनसनाहट को अनुभव करेंगे।
मालिश
करने से पहले अपने हांथों को रिचार्ज जरूर कर लीजिये।
यह कारगर
है…….. यह उपयोगी है…………
यह अत्यंत
प्रभावशाली है। यदि आपको इस बात पर यकीन नहीं है तो 20
सेकंड में
आपका क्या बिगड़ जायेगा बहन। आप 20 सेकंड तक अपने हथेलिओं पर
ध्यान दीजिए। 10 सेकंड आँख खोलकर और 10
सेकंड आँख
बंद करके। आप खुद महसूस भी करेंगे। अपने हाथों से बच्चों के स्पर्श को आप जागरूकता
के साथ अनुभव कर पाएंगे और अपने प्यार और ममता को जागरूकता के साथ बच्चों में
सम्प्रेषित कर सकेंगे।
मालिश करने से पहले 20 सेकंड के लिए
हाथों को रिचार्ज करना कभी मत भूलिए।
4. बच्चे को मालिश के लिए तैयार कीजिये –
बच्चे को मालिश के लिए तैयार करने के लिए सबसे पहले उसके हाथों में थोड़ा तेल लगाइये, इतना से ही वह समझ जायेगा कि उसका मालिश होने वाला है और यदि उसका मूड नहीं होगा तो वह विरोध शुरू कर देगा, उसका विरोध रोने के रूप में हो सकता है या वह अपना शरीर आपको समर्पित नहीं करेगा इधर उधर भागने का कोशिस करेगा। यदि बच्चे का मूड मालिश करने का बिलकुल ही ना हो तो थोड़ी देर के लिए मालिश को स्थगित कर दीजिये और उसके साथ खेलिए। उसके आँखों में आँखे डालकर बात कीजिये, उसे हिलाइये डुलाइये, गाना सुनाइये, आप अपना दुखड़ा भी सुना सकते है, आप रो भी सकते है, आपका रोना देखकर बच्चे आपको समझने का कोशिश करेगा। हर समय हँसना और खिलखिलाना ही नहीं समझाना है। रोना और दुःख को भी समझाना है। आज यदि आप दुखी है, आप यदि रोना चाहते है तो बच्चों के सामने कोई नाटक करके हँसने की जरुरत नहीं है, आप रोइये, आप रो कर अपना दुःख उसे बताइये।
आपका रोना
और आपका दुःख देखकर आपके बच्चे को दुःख नहीं होगा,
बल्कि
उसकी समझदारी बढ़ेगी। दुःख तो उसके जीवन में भी आना ही है ,
चाहे आप
कितना ही रोली उसे सुना दीजिये।
आपके
बच्चे की जीवन में कोई दुःख नहीं आये इसकी ना कामना कीजिये और ना आशा। उसके जीवन
में दुःख आएगा इसकी गारंटी है। इसलिए वह अपने दुखदायी परिस्थिति को कैसे हैंडल
करता है……………. ये समझाना है।
कैसे
समझायेंगे………………… ?
अभी आपको
जो दुःख है, उसे आप कैसे हैंडल कर रहे है
अपने बच्चे को समझाइये।
आपको ऐसा
लगता है कि वह क्या समझेगा ?
आप जो उसे
लोरी सुना रहें हैं, उसे भी वह नहीं समझ रहा है।
आप हँस रहे है वह नहीं समझ रहा है कि आप क्यों हँस रहे है,
लेकिन वह
भी बिना सोचे समझे हँसने लगता है। जब आपको रोना आ जाय आप रोइये।
हम अपने
बच्चे को सिर्फ हँसना सिखाते है, इसलिए जब उसके जीवन में रोने
का परिस्थिति आता है……..जो आना ही है…..
लेकिन उस
परिस्थिति को वह अक्सर ठीक से हैंडल नहीं कर पाता….
क्योंकि
बचपन में उसने भूख और शारीरिक तकलीफ के अलावा अन्य किसी कारण से रोने की कला सीखा
ही नहीं है।
बच्चे को
सिर्फ हँसना ही नहीं रोना भी सिखाइये।
बच्चे का
मालिश तब तक शुरू मत कीजिये जब तक वह मालिश के लिए तैयार नहीं हो जाता है।
5. मालिश की शुरुआत पैरों से कीजिये -
जब लगे कि बच्चा मालिश के लिए तैयार है, तो सबसे पहले उसके पैरों की मालिश करें। आप अपनी हथेलियों पर थोड़ा तेल लें और उसके तलवों पर हल्के हाथों से मालिश करें। उसके पैरों की उंगलियों और एड़ियों पर मालिश करें। फिर हथेली से पैर के नीचे और ऊपर हल्का हाथ फेरें। फिर धीरे-धीरे पंजों और पैरों के नीचे अंगूठे को गोल घुमाते हुए मालिश करें।
फिर एक
पैर को ऊपर उठाएं और टखने पर हल्के-हल्के हाथ फेरें। फिर हाथ को जांघों पर ले
जाएं। ऐसे ही आप दूसरे पैर पर भी मालिश करें।
अब हाथों
से बच्चे की जांघों को हल्के-हल्के दबाएं।
अब शिशु
की टांगों को घुटने से मोड़ते हुए घुटनों को हल्के हाथों से पेट पर दबाएं। ऐसा
करने से शिशु के पेट से गैस बाहर निकल जाएगी।
6. हाथों की मालिश -
पैरों के बाद शिशु के हाथों की मालिश करें। इसके लिए शिशु के हाथ पकड़ें और उसकी हथेलियों पर हाथ फेरें।
अब तेल से
उसकी हथेलियों से लेकर उंगलियों के पोरों तक हल्की मालिश करें।
अब धीरे
से बच्चे के हाथों को मोड़ें और धीरे-धीरे उसके हाथ के पिछले हिस्से से कलाई तक
मालिश करें।
अब कलाई
पर हाथों को गोल-गोल घुमाते हुए मालिश करें।
7. सीने और कंधों की मालिश -
अब बारी आती है शिशु के सीने और कंधों की मालिश करने की। इसके लिए आप शिशु के दोनों कंधों के से सीने तक धीरे-धीरे मालिश करें।
इस
प्रक्रिया को दो से तीन बार दोहराएं।
फिर हल्के
हाथों से सीने के बीच में हाथ रखते हुए बाहर की तरफ मालिश करें।
8. पेट की मालिश -
पेट काफी नाजुक होता है, इसलिए उस पर दबाव न डालें। आप सीने के नीचे से पेट की मालिश करना शुरू करें।
फिर दोनों
हाथों को गोल घुमाते हुए शिशु के पेट और नाभि के पास मालिश करें।
9. सिर और चेहरे की मालिश -
इसके लिए आप शिशु के माथे पर तर्जनी उंगली रखें और हल्के दबाव से उसके चेहरे पर मालिश करें।
फिर ठोड़ी
से अपनी उंगलियों को गालों की ओर ले जाते हुए सर्कुलर मोशन में मालिश करें। दो से
तीन बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।
इसके बाद
बच्चे के बालों की जड़ों में तेल लगाकर इस तरह मालिश करें,
जैसे शैंपू
करते हैं। बच्चे का सिर बेहद नाजुक होता है,
इसलिए
बेहद हल्के हाथों से मालिश करें।
10. पीठ की मालिश -
इसके लिए बच्चे को पेट के बल लिटाएं और बच्चे के हाथों को सामने की ओर रखें।
अब
उंगलियों के पोरों को शिशु की पीठ के ऊपरी हिस्से पर रखें,
फिर
गोल-गोल घुमाते हुए नीचे की ओर लेते जाएं। इस प्रक्रिया को दो से तीन बार दोहराते
हुए बच्चे की पीठ की मा्लिश करें। ध्यान रहे कि रीढ़ की हड्डी पर उंगलियों को न
रखें।
11. बच्चे की मालिश कितनी बार करनी चाहिए?
शुरुआती तीन महीने तक दिन में दो बार शिशु की मालिश की जाती है। उसकी कितनी बार मालिश करनी चाहिए, इस बारे में ठीक-ठीक बताना मुश्किल है। यह इस पर निर्भर करता है कि बच्चे को मालिश का कितना मजा आ रहा है और आपके पास कितना समय है।
12. शिशु की मालिश के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बातें -
शिशु की मालिश के लिए बहुत ठंडे तेल का इस्तेमाल न करें। अगर ठंड का मौसम है, तो आप तेल को हल्का गर्म कर सकती हैं।
मालिश
करते समय आप अपने बच्चे की आंखों में देखें। इससे बच्चा आपकी तरफ देखेगा और आप
दोनों का रिश्ता मजबूत होगा।
तेल मालिश
के बाद बच्चे को कम से कम 10-15 मिनट के बाद ही नहलाएं। इससे
ज्यादा देर तक शरीर पर तेल लगा न छोड़ें।
मालिश
करते समय तेल उसकी आंखों में न जाए। इससे उसकी आंखों में जलन हो सकती है।
मालिश
करने के बाद शिशु को गुनगुने पानी से नहलाएं। इससे तेल अच्छी तरह हट जाएगा।
बच्चे के
भोजन और मालिश के बीच 30 से 45
मिनट का
अंतराल रखें। खाने या दूध पिलाने के तुरंत बाद मालिश करने से उसे उल्टी हो सकती
है।
13. शिशु की मालिश कब नहीं करनी चाहिए ?
अगर आपको लगे कि किसी तेल के इस्तेमाल से शिशु की त्वचा पर कुछ निशान पड़ रहे हैं, तो इसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए। ऐसे में आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही मालिश करने का फैसला लें।
जब बच्चा
सो रहा हो, तो उसकी मालिश न करें I
शिशु को
बुखार होने पर या उसकी तबीयत खराब होने पर मालिश नहीं करनी चाहिए या बहुत हलकी
मालिश करना चाहिए।
14. बच्चे की मालिश कब
बंद करनी चाहिए?
शिशु की
मालिश कब तक करनी चाहिए, इसकी कोई निश्चित आयु नहीं
है। जब तक आप चाहें, तब तक अपने शिशु की मालिश कर
सकती हैं। कई परिवारों में शिशु के पांच-छह साल का हो जाने पर भी मालिश करना बंद
नहीं किया जाता। इतनी आयु के बच्चों की मालिश सप्ताह में तीन से चार बार की जाती
है। बहरहाल, आपको शिशु की मालिश कब तक
करनी है, यह आप पर निर्भर करता है।
अगले अध्याय में हम सीखेंगे कि 1 शाल तक बच्चों के साथ कैसा व्यव्हार करना चाहिए।
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आभार
सोहन
कुमार
मोगा
पंजाब दिनांक- 27.03.2021
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