(जन प्रतिनिधि के लिए विशेष।)
मित्रों,
आज मैं अपने
ही पिछले 2 लेखों को फिर
से पढ़ रहा था तो मुझे लगा कि जो इस समय हमारे वर्तमान जन प्रतिनिधि हैं वे आहत हुए
होंगे, इसलिए मैं इस
लेख में अपनी भावना को अधिक स्पस्टता से समझाने का प्रयास करूँगा।
हमारी जो अविकास यात्रा है उसकी जिम्मेवारी सिर्फ वर्तमान जन प्रतिनिधिओं का नहीं है, यह पिछले 50 साल की कहानी है जिसे मैं देखते आ रहा हूँ। और वर्तमान जन प्रतिनिधि इस अविकास यात्रा की एक कड़ी मात्र हैं। खुरपी और हँसुआ बेचने वाला पाली आज नगर पंचायत हो गया, और हम एक दूसरे पर ब्लेम गेम खेल रहें है।
मैं घनश्यामपुर के उसी मध्य विद्यालय से पढ़कर और उसी लाल मास्टर साहब, और ताराकांत मास्टर साहब के द्वारा आज एक सम्मानित नौकरी कर रहा हूँ। आज वह मध्य विद्यालय चपरासी बनाने की योग्यता नहीं रखता। क्या बदल गया ? प्राइवेट स्कूल के अनट्रेंड टीचर को पढ़ाने की इतनी कला आती है। सरकारी स्कूल के ट्रेंड टीचर क्या कर रहे है ? इस व्यवस्था को किसने बिगाड़ा। कौन जिम्मेबार है इसका …………………………… ?
आप अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं है। गाऊँ के हरेक बच्चा को उचित शिक्षा मिले ये आपकी जिम्मेवारी थी।
आप जन
प्रतिनिधि नहीं बल्कि एक आम जनता बनकर सोचिये आपको मेरे से नाराजगी कम हो जाएगी।
अगले लेख मे मैं बताऊंगा की हमारा आदर्श पंचायत कैसा होना चाहिए और यह कैसा होगा ?
चुनाव यात्रा का यह श्रृंखला घनश्यामपुर पंचायत और 14/1 जिला परिषद क्षेत्र के हरेक मतदाता को पढ़ना चाहिए।
यदि आपने अपने किसी रिस्तेदार को वोट देने का मन बना भी लिए हैं, तब भी मेरे लेख को पढ़िए जरूर। वोट तो आप अपनी मर्जी ही देंगे बस मेरे निवेदन को पढ़ते रहिये।
इसे शेयर कीजिये। आपका एक कीमती वोट आपके क्षेत्र की दिशा और दशा बदल सकता हैं।
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आभार

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