13 अप्रैल 2021

नव वर्ष मंगलमय हो !

 

मित्रों,

आज हमारा नव वर्ष है….. और हमारी संस्कृति………

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत ।।

अर्थात "सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।"


हमारी संस्कृति संसार की सर्वोत्कृष्ट संस्कृति है। हम अपनी संस्कृति को नहीं मानने वाले को काफीर नहीं समझते है। हम उसके लिए भी मंगलकामना करते है। हमारा कोई दुश्मन नहीं है। हम अपनी संस्कृति को मनवाने के लिए कभी किसी पर कोई दबाब नहीं डाला। क्योंकि हमारे लिए तो सभी एक सामान है।


अपने पूर्वजो के वैज्ञानिकता पर विश्वास कीजिये। हमने सूर्य और चन्द्रमा के दुरी को आज से 5000 वर्ष पहले माप लिया था और उसी समय से हमें सूर्य और चंद्र ग्रहण का ज्ञान है।

अपने पूर्वजों का सम्मान कीजिये। मूर्खों का नक़ल मत कीजिये।


आज आपको अंग्रेजी नव वर्ष के सम्बन्ध में राष्ट्रकवि श्रद्धेय श्री रामधारी सिंह दिनकर जी की इस प्रशिद्ध कविता को जरूर पढ़ना चाहिए ।

ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं,

है अपना ये त्यौहार नहीं,

है अपनी ये तो रीत नहीं,

है अपना ये व्यवहार नहीं।

धरा ठिठुरती है सर्दी से,

आकाश में कोहरा गहरा है,

बाग बाज़ारों की सरहद पर,

सर्द हवा का पहरा है।

सूना है प्रकृति का आँगन,

कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं

हर कोई है घर में दुबका हुआ,

नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं।

चंद मास अभी इंतजार करो,

निज मन में तनिक विचार करो,

नये साल नया कुछ हो तो सही,

क्यों नकल में सारी अक्ल बही।

उल्लास मंद है जन -मन का,

आयी है अभी बहार नहीं,

ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं,

है अपना ये त्यौहार नहीं,

ये धुंध कुहासा छंटने दो,

रातों का राज्य सिमटने दो,

प्रकृति का रूप निखरने दो,

फागुन का रंग बिखरने दो,

प्रकृति दुल्हन का रूप धार,

जब स्नेह सुधा बरसायेगी,

शस्य श्यामला धरती माता,

घर -घर खुशहाली लायेगी,

तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि,

नव वर्ष मनाया जायेगा,

आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर,

जय गान सुनाया जायेगा,

युक्ति प्रमाण से स्वयंसिद्ध,

नव वर्ष हमारा हो प्रसिद्ध,

आर्यों की कीर्ति सदा -सदा,

नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा,

अनमोल विरासत के धनिकों को,

चाहिये कोई उधार नहीं,

ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं,

है अपना ये त्यौहार नहीं,

है अपनी ये तो रीत नहीं,

है अपना ये त्यौहार नहीं ।।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर

आप मेरे लेख को बहुत ध्यान से पढ़ते है….. आपको कोटि कोटि नमन और नव वर्ष की हार्दिक बधाई।

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आभार

सोहन कुमार

मोगा पंजाब दिनांक- 13.04.2021


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