मित्रों,
यह शीर्षक आपको थोड़ा अटपटा लग रहा होगा। कृपया इस लेख को
अंत तक पढ़े... इसके बाद भी यदि आपको अटपटा लगे तो शिकायत करें।
यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार तो योगी का स्थूल क्रिया है, योगी का सूक्ष्म उद्देश्य तो संसार को एक नई दिशा प्रदान करना है।
इस देश के स्वतंत्रता के लिए... इस देश के भलाई के लिए… हमारे लिए… हमारे आने वाले पीढ़ी के लिए… जिन्होंने कष्टों का सामना किये और अनेकों ने प्राणों तक का वलिदान कर दिए…. मैं उन सबको योगी मानता हूँ।
गाँधी जी तो राष्ट्रीय योगी हैं।
इस देश को आजादी दिलाने के लिए गाँधी जी का बड़ा योगदान हैं… लेकिन सबसे बड़ा नहीं… और जितना बड़ा योगदान हैं उससे कई गुना अधिक सम्मान उनको प्राप्त हो गया है। इस देश का 75 % सड़के और संस्थाएँ, गाँधी जी के नाम से है.. शेष 25% चाचा नेहरू के नाम से। गाँधी जी का फोटो हमारे रुपयों पर है।
यह देश बड़ा है या गाँधी ? आप सोचने लग जायेंगे.....................
गाँधी जी को इस देश से बहुत प्यार था…. लेकिन नेहरू को वे भारत देश से कम प्यार नहीं करते थे।
सुभाष चन्द्र बोस ने तो 21 अक्टूबर 1943 को ही स्वतंत्रता की घोषणा कर दी थी और आजाद हिन्द सरकार की स्थापना कर ली थी।
जिस सरकार के पास 40000 सैनिक था और जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी थी…. उस आजाद हिन्द सरकार को बापू और चाचा ने समर्थन क्यों नहीं दिया ???
बापू को आजादी इस शर्त पर चाहिए कि देश का प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू हो… इसके लिए यदि देश का बॅटवारा करना पड़े..... वो भी मंजूर है।
दूसरी बार 15 अगस्त 1947 को नेहरू को प्रधानमंत्री बनने की शर्त पर जब स्वतंत्रता मिली। इसमें एक समझने वाली बात ये है कि अंतरिम सरकार के प्रधानमंती बनने के लिए कांग्रेस प्रदेश कमेटी के 15 सदस्यों के पास प्रेसिडेंट पद पर नॉमिनेट करने की पावर थी।
15 में से 12 सदस्यों ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को अध्यक्ष पद के लिए नॉमिनेट किया.... बाकी तीन ने किसी का नाम भी आगे नहीं बढ़ाया.... यहां ध्यान देने वाली बात ये थी कि जवाहरलाल नेहरू का नाम किसी भी सदस्य ने नॉमिनेट नहीं किया।
गाँधी अपने देश सेवा के कीमत पर नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया। गाँधी अपने सेवा के लिए बड़ी से बड़ी कीमत ले चुके हैं।
नेहरू सरकार ने आजाद हिन्द फ़ौज के सेनाओं को भारतीय सेनाओं में दाखिला क्यों नहीं दिया ?
आजाद हिन्द बैंक कि सम्पति कहाँ गयी ?
कई ऐसे प्रश्न है जिसके उत्तर का प्रतीक्षा देश को है।
भारत के पहले प्रधानमंत्री सुभाष चंद्र बोस थे, जवाहरलाल नहीं। और सुभाष चंद्र बोस के गरिमामयी इतिहास को छिपाने के लिए ये बापू-चाचा कितना ही खेल खेल ले। सूर्य तो प्रगट होकर रहेगा।
आजाद हिंद सरकार के 75 साल पूर्ण होने पर इतिहास मे पहली बार साल 2018 मे नरेंद्र मोदी ने किसी प्रधानमंत्री के रूप में 15 अगस्त के अलावा लाल किले पर तिरंगा फहराया।
गाँधी जी को मैं राष्ट्र पिता इसलिए नहीं मानता हूँ क्योंकि कोई भी पिता अपने बच्चे को अलग देखना नहीं चाहता है… लेकिन इन्होने नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने के लिए और मुसलमानो के तुष्टिकरण निति के कारण इस देश को बिभाजित कर दिए। 10 लाख लोगों कि बली चढ़ गयी, लाखों स्त्रियाँ अपहरण और बलात्कार का शिकार हुई।
देश का बटवारा इसलिए हुआ क्योंकि मुसलमानों को धर्म के आधार पर अलग देश चाहिए …… तो फिर हिन्दू को क्यों नहीं चाहिए ?
हिन्दुओं को तो हिदुस्तान में भी दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया। हिन्दुओं के लिए संबिधान बना और मुसलमानो के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ।
जो मुसलमान भारत में रहना स्वीकार किया उसे भारत के संबिधान के अंतर्गत क्यों नहीं रखा गया ? जिनको पर्सनल लॉ की जरुरत थी वे पर्सनल देश में क्यों नहीं चले गए ?
बटवारे के बाद जब पाकिस्तान में हिन्दुओं और सिखों का क़त्ल हो रहा था। हिन्दू औरतों को नग्न करके जुलुस निकला जा रहा था… गाँधी जी एक वक्तव्य दे देते कि मुसलमानों को ऐसा नहीं करना चाहिए………. इतनी शर्म तो होनी ही चाहिए।
लेकिन जो हिन्दू पाकिस्तान से जान बचाकर भारत आ गए और
दिल्ली के व्यर्थ पड़े मस्जिदों में शरण ली… उन हिन्दुओं के पुनर्वास
का कोई व्यवस्था किये बगैर उसे मस्जिद से निकालने के लिए गाँधी ने अनसन का धमकी
दिया और उसे मस्जिदों से बाहर निकलवाया।
जिस दिन उन निस्सहाय हिन्दुओं को दिल्ली के मस्जिद से बाहर निकाला जा रहा था। बहुत तेज वारिस हो रही थी और नाथूराम गोडसे वहां मौजूद थे।
नाथूराम गोडसे ने गाँधी को क्यों मारा ?
1. भारत का अब और बिभाजन नहीं -
15 अगस्त 1947 को, जिस दिन देश आजाद हुआ उस दिन भारत के नक़्शे में कश्मीर, जूनागढ और हैदराबाद नहीं था।
कश्मीर- यहाँ के राजा हरि सिंह पहले तो भारत पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र रहना चाहते थे… लेकिन जब पाकिस्तान ने आक्रमणक कर दिया तो वे भारत के साथ संधि कर ली… लेकिन जवाहरलाल नेहरू ने शेख अब्दुल्ला…. जो उनके के मित्र थे… कश्मीर को 370 का विशेष धारा देकर उनको कश्मीर का प्रधानमंत्री बना दिया।
मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को इस विवाद को अंत करके कश्मीर को भारत में विलय किया।
जूनागढ़ - यहाँ के नवाब मोहब्बत महाबत खानजी थे जो
पाकिस्तान में शामिल होना चाहते थे, सरदार पटेल ने कूटनीतिक ढंग से नवाब खानजी को पाकिस्तान
भगाया और 20 फरवरी, 1948 को वहाँ जनमत करा
कर जूनागढ़ को भारत में विलय कर लिया।
हैदराबाद - यहाँ के निजाम मीर उस्मान अली भी भारत पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र रहना चाहते थे। उस समय में उस्मान विश्व के सबसे धनी व्यक्ति थे।
अंग्रेजों के जमाने में भी हैदराबाद का अपना अलग सिक्का, कागज के नोट और स्टाम्प
था। निजाम की अपनी
सेना और सरकार थी।
सरदार पटेल ने 13 सितंबर 1948 (सोमवार) को हैदराबाद में सैन्य कार्रवाई करके 5 दिनों में 2000 से अधिक निजाम के सैनिको को मारकर 17 सितंबर 1948 की शाम को उससे समर्पण करवाया। भारतीय सेना ने भी 66 जवान खोए और 96 जवान घायल हुए।
आप सोच रहे होंगे कि मैं विषय से भटक रहा हुँ।
आप इन घटनाओ के तारीख को एक बार फिर से देखिये, ये सारे तारीख 30 जनवरी 1948 के बाद का है। .
आप क्या सोचते है की यदि गाँधी होते तो हैदराबाद के मुस्लिम सेनाओ के संहार के लिए भारतीय सेना को अनुमति मिल जाती ? गांधीजी अनसन पर नहीं बैठ जाते ?
सैन्य कार्रवाई तो नेहरू भी नहीं चाहते थे उन्हें डर लग रहा था कि कहीं पाकिस्तान ना हमला कर दे….. लेकिन गाँधी तो ये होने ही नहीं देते…………
नाथूराम गोडसे ने भारत के एक और होने वाले
विभाजन की हर सम्भावना को समाप्त कर दिए।
2. मुस्लिम तुष्टिकरण
गाँधी के मुसलमान प्रेम का आलम ये था कि तुर्की के खलीफा (धार्मिक नेता) के चुनाव के लिए उन्होंने खलाफत आंदोलन को न सिर्फ समर्थन दिया 23 नवंबर, 1919 को ‘अखिल भारतीय खिलाफत कांफ्रेंस’ में उनको अध्यक्ष बनाया गया।
जिन्ना मुस्लमान होकर भी कहा था कि खिलाफत ‘पुराने जमाने’ की चीज है और उसका साम्राज्य अब नहीं रह सकता।
जिन्ना ने गांधी को चेतावनी दी थी कि मुल्ले-मौलवियों को राजनीतिक मंच देकर वह बड़ी भूल कर रहे हैं। इस मसले पर लाला लाजपत राय, एनी बेसेंट, रवींद्रनाथ टैगोर, श्रीअरविंद आदि मनीषियों ने भी सार्वजनिक चिंता प्रकट की थी।
इस्लाम के लिए मुसलमानों में आवेश पैदा कर, उसमें हिंदुओं को झोंककर, गांधी जी ने जो आंधी पैदा की, उससे समाज में गहरी दरार पड़ी।
‘इस्लाम खतरे में’ के नारे से मुसलमानों में ‘काफिरों’ के विरुद्ध जिहादी जोश भरा। फलत: मालाबार में अगस्त 1920 में हिंदुओं पर ऐसे हृदयविदारक अत्याचार किए गए कि डॉ. आंबेडकर के शब्दों में, ‘समग्र दक्षिण भारत के हिंदुओं में भय की एक भयानक लहर दौड़ गई।’ किंतु गांधी जी ने उन अत्याचारों की निंदा तक करने से परहेज रक्खा।
कांग्रेस नेता और विद्वान केएम मुंशी के अनुसार अधिकांश नेता मानते थे कि गांधी जी एक गलत उद्देश्य के लिए अनैतिक काम कर रहे हैं जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा होगी ।
खिलाफत आंदोलन के दौरान और खिलाफत के खात्मे के बाद हिंदुओं को इस्लामी रोष का शिकार बनाया गया।
स्टैनले वोलपार्ट ने अपनी पुस्तक ‘जिन्ना ऑफ पाकिस्तान’ (1984) में लिखा है कि खिलाफत के खात्मे पर पूरे भारत में जहां-तहां मुसलमानों ने हिंदुओं पर गुस्सा उतारा। हत्या, दुष्कर्म, जबरन धर्मांतरण, अंग-भंग और क्रूर अत्याचार किए।
गाँधी का मुस्लिम तुष्टिकरण और नाथूराम गोडसे के मन के भावों की व्याख्या हम अगले लेख जारी रखेंगे।
आज के अध्याय को इस बात से समाप्त करेंगे कि मैं सभी स्वतंत्रता सेनानियों को योगी मानता हुँ, लेकिन नाथूराम गोडसे को अनासक्त योगी क्यों मानता हुँ ???
इस देश के जितने स्वतंत्रता सेनानी हुए सबके बलिदानों का हम ऋणी हैं… उनके जिन्दाबाद का नारा लगाते हैं…. उनकी जयंती मानते हैं… फूल माला चढ़ाते हैं… लेकिन नाथूराम गोडसे के बलिदान को हम घृणा करते हैं। ये बात गोडसे हत्या करने से पहले जानते थे। नाथूराम गोडसे के इस भाषण को सुनिए ।
https://www.youtube.com/watch?v=BSUTpyhz7xA
हमें सरकारी किताबों में पढ़ाया गया कि नाथूराम गोडसे एक
सिरफिरा किस्म का आदमी था… आपने भी पढ़ा होगा।
ऐसा बलिदान.... जिसे कोई आसक्ति नहीं हो... प्रसंसा तक का लोभ नहीं हो… घृणा करने वाले के प्रति भी जिसके मन में करुणा हो...... और घृणा करने वाले के लिए ही जो अपने जीवन का बलिदान कर दे … अनासक्त नहीं तो और क्या कहेंगे ???
आप मेरे किसी-किसी लेख को पसंद नहीं भी करते होंगे लेकिन मैं आपको कभी भी कोई अप्रमाणिक जानकारी नहीं दूँगा।
इतिहास को दुबारा से समझने की जरुरत है।
भारतियों की याददास्त बहुत कमजोर है, आज जो अफगानिस्तान में हो रहा हैं। भारत में मुग़ल काल से ये होता रहा है।
कश्मीर में भी सिर्फ 31 साल पहले 19 जनवरी 1990 को ऐसा ही हुआ था। फर्क सिर्फ इतना है कि कश्मीर में चरमपंथी मुसलमान हिन्दुओं को भगा दिया था.... अफगानिस्तान में चरमपंथी मुसलमान नरमपंथी मुसलमान को भगा रहा है।
हमें एक ऐसा देश चाहिए जहाँ हम सुरक्षित रह सके वरना इतिहास के कई जातिओं की तरह हम भी इस संसार से विलुप्त हो जायेंगे।
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आभार
सोहन कुमार
खेडाप्पा,जोधपुर,राजस्थान दिनांक – 21.08.2021 (शनिबार))
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