मित्रों,
मेरे पंचायत चुनाव में आगमन को लेकर युवाओं ने जिस तरह की भावनायें व्यक्त की
वह मुझे उत्साहित भी कर रहा है और जिम्मेदारी का अहसास भी।
मैं आपके इस भावना को कभी कम नहीं होने दुँगा।
मेरे प्रति आपका प्यार, विश्वास और सम्मान..... मेरे जीवन के सभी सम्पदाओं से अधिक मूल्यवान है।
चुनाव तो हार भी सकता हूँ, पहले भी हार चूका हूँ, लेकिन विश्वास नहीं हारा था और आज भी नहीं हारूँगा। आपको मुझपर विश्वास है.... मेरे लिए इससे बड़ी कोई जीत नहीं है।
अब चुनाव में जीत की बात करते है, जिसके लिए ये आवश्यक हैं कि मैं और आप अपने कामिओं को समझे और उसे दूर करें-
पहले आपकी कमियाँ बता देता हूँ...... दूसरों की कमियाँ जल्दी दिमाग में आ जाता है.... अपनी कमियाँ ढूंढने में समय लगता हैं -
1. अपनेपन का भाव -
पंचायत चुनाव में जो भी प्रत्याशी होते हैं वो अपने लोग ही होते हैं... कोई
भाई होता है.. चाचा होता है.. मित्र होता है.....हम समग्रता से पंचायत के विषय में
नहीं सोचकर अपनेपन के भाव से सोचने लगते हैं।
अपनापन होना बड़ी अच्छी बात है.. होना ही चाहिए... लेकिन जब पुरे पंचायत की बात हो.. विकास की बात हो..स्वच्छता.. स्वास्थ.. शिक्षा.. सड़क और नाले की बात हो... तब आपका वही अपना हैं जो इन कामों को सटीकता से कर सकता हो।
2. लोभ का होना -
कुछ लोग पैसे के लिए भी वोट दे देतें हैं... पैसे आपको लाख दो लाख तो मिलता
नहीं... 200-500 ही मिलता है... जिसे मजदूरी करके भी एक या दो दिन में कमाया जा सकता है....
लेकिन यदि आप एक स्वच्छ वातावरण में रहना चाहते हैं... मुफ्त में अच्छी शिक्षा और
स्वास्थ्य चाहते हैं.... तो इन लोभ से बचिए और ऐसे लोगों को चुनिए जो आपके जीवन को
विकसित करने के लिए काम करे।
अब मैं अपनी कमियाँ बताता हूँ -
1. मैं एक राजनितिक व्यक्ति नहीं हूँ -
यदि आप वर्तमान या इतिहास को देखे तो आज भी आपके विदेशमंत्री श्री जयशंकर गैर
राजनितिक व्यक्ति है...श्री राजीव गाँधी पायलट से सीधे प्रधनमंत्री बन गए थे।
जितने भी गैर राजनितिक लोग अचानक से राजनीती में प्रवेश किये... सभी ने परंपरागत राजनितिक लोगों से अच्छा काम किया है।
गैर राजनितिक लोगों की एक विशेषता ये भी होती हैं की उनमे कोई पक्षपात नहीं होता।
2. मैं एक ईमानदार व्यक्ति हूँ -
आप सोच रहे होंगे की ईमानदार होना तो अच्छी बात है लेकिन ईमानदार लोगों की
परेशानी बईमान लेगो से अधिक हैं ...क्योंकि बईमानों की संख्या अधिक हैं... और
लोकतंत्र तो शंख्या का गणित है।
भ्रष्टाचार को हमने इतनी सहजता से स्वीकार कर लिया है कि लालू प्रसाद यादव इज्जत के साथ समाज में घूम रहा है, हाथी पर चढ़ कर।
हमारे पंचायत में जो भी राजनितिक या गैरराजनीतिक लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं वो मुझे कभी बर्दास्त नहीं करेंगे और वो ससक्त लोग हैं। मैं डर या डरा नहीं रहा हूँ.... मैं सिर्फ सावधान कर रहा हूँ।
13 अक्टूबर 2021 (अष्टमी) को जब माता करुणा की मुद्रा में आशीर्वाद देने के लिए तत्पर होती हैं मैं अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर दुँगा।
एक बार फिर से आपका प्यार, विश्वास और सम्मान के लिए आपको अपने ह्रदय के अन्तःकारण से प्रणाम करता हूँ।
सोहन कुमार
10.10.2021
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