मित्रों
हमारे देश के संबिधान के निर्माताओं ने इस अगरे पिछड़े की लड़ाई में इस देश को पिछड़ा देश जरूर बना दिया।
सवर्ण होने का जितना दुःख मुझे आज हो रहा है उतना कभी नहीं हुआ, उस दिन भी नहीं जिस दिन मेरे उन मित्रों को जो तथाकथित पिछड़े वर्ग के थे सरकारी
नौकरी लग गयी और मुझे प्राइवेट फॉर्म में काम करना पड़ा।
आज यदि मैं पिछड़े वर्ग का होता और ये बात लिखता तो वह अधिक प्रभावी होता और
मुझे अपनी जाती के पक्ष में लिखने का आरोप भी नहीं लगता।
हमारे देश के कई पिछड़े वर्ग के मेधावी और चरित्रवान लोग है, जिन्होंने आरक्षण का लाभ लेने से मना कर दिया। मैं उनको ह्रदय से नमन करता
हूँ। परन्तु इतना ही काफी नहीं होगा, उनको इसके
विरोध में आंदोलन करना होगा। जब तक आरक्षण का विरोध पिछड़े वर्ग नहीं करेंगे तब तक
इस आंदोलन सफल नहीं किया जा सकता।
अब सवाल ये है कि पिछड़े वर्ग इसका विरोध क्यों करेंगे, उन्हें तो इसका लाभ मिल रहा है।
मित्रों इस देश के लिए हजारों ने नहीं, बल्कि लाखों लोगों ने अपनी जान दे दिया है।
अपने लाभ के लिए नहीं, इस देश के आन
बान शान के लिए। आरक्षण हमारे देश का कलंक है और पिछड़ा वर्ग इस कलंक को धोकर अपना
स्थान अगरा वर्ग में सुरक्षित कर सकता है।
आरक्षण का लाभ पिछड़ा वर्ग को मिल भी नहीं रहा है। अम्बेदकर आरक्षण के कारण
संबिधान सभा में नहीं पहुंचे थे लेकिन, अपने बच्चों
के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया। आरक्षण का लाभ उन्ही को मिल रहा है जो उस समय भी
अभिजात्य थे। मेरे खेत में काम करने वाला दामोदर बाँतर या ख़ुसर बाँतर उसका पिताजी
भी मेरे खेत में काम करता था और उसका अगला पीढ़ी भी मेरे में काम कर रहा है। आरक्षण
का लाभ उसको नहीं मिल सकता। आरक्षण का लाभ सिर्फ उस समय के अम्बेदकर के बच्चों को
ही मिल रहा है।
इस संसार में सिर्फ दो ही जात है एक अमीर जो अगरा जात है और एक गरीब जो पिछड़ा
जात है। हमारे संबिधान ने अगरे जात के लिए आरक्षण का प्रबंध किया पिछड़ा जात उस समय
भी पिछड़ा था, आज भी पिछड़ा
है और इस व्यवस्था में पिछड़ा ही रहेगा।
हमारे देश के संबिधान के निर्माताओं ने इस आगरे पिछड़े की लड़ाई में इस देश को
पिछड़ा देश जरूर बना दिया।
क्या बिडम्ना है हमारे देश की….. यहाँ सिर्फ 50% सक्षम लोग ही इस देश को चला रहें हैं । 50% सक्षम लोग जो अधिकारी हो सकते थे वे चपरासी बन गए और जो चपरासी के योग्य थे वे
अधिकारी बने हुए है और यह देश चल रहा है…….. मुझे ये बात
सोचकर ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ जाता है क्योंकि वही इस देश को चला रहे है। हम
डॉक्टर भी आरक्षण से बना देते है और यदि मरीज का जान बच रहा है तो आप किसे धन्यवाद
करेंगे ?
हम यदि प्रतिभाओं का सम्मान नहीं करेंगे तो हम कभी अगरा देश नहीं बन पाएंगे ।
मित्रों, हमारे देश के
संबिधान निर्माताओं ने पिछड़ी जाती को अगरी जाती बनाना चाहते थे इस क्रम में
उन्होंने इस देश को ही पिछड़ी जाती का देश बना दिया।
इस आंदोलन को यदि पिछड़ी जाती अगुआई करे तो न सिर्फ इस देश को अगरि जाती का बना
सकता है बल्कि वह खुद भी अगरि जाती का हो जायेगा। अगरा जाती वह है जिसे इस देश की
चिंता है।
आप मेरी बात को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसके लिए आपका बहुत आभार। अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिये।
आभार
सोहन कुमार
06.08.2020

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