08 अगस्त 2020

टेलीविज़न चर्चा (भाग- 1)

 

मित्रों,

आज टीवी की चर्चा करते है, जो हमारे सोचने की दिशा को प्रभावित करता है। टीवी की चर्चा यदि होगी तो पहले विज्ञापन की चर्चा करनी ही पड़ेगी। विज्ञापन टीवी का आधार है और ये विज्ञापन हमारे जीवन को, हमारे जीवन मूल्यों को, हमारे स्वास्थ्य को और हमारे चरित्र को भी नष्ट करके रख दिया है। आज हमारे पुरे देश में शायद ही कोई परिवार होगा जो पूर्णतः स्वस्थ होगा, और यदि वह पूर्णतः स्वस्थ होगा तो निश्चित रूप से वह विज्ञापन देखकर अपने घर का खान पान तय नहीं करता होगा।



यह टीवी का विज्ञापन घर-घर में रिफाइन तेल, कोल्ड ड्रिंक्स, आयोडीन युक्त नमक, मिनरल वाटर और अनगिनत जहरीली पदार्थों का प्रचार इस प्रकार से किया की हम उसका सेवन करके अपने को एडवांस समझने लगे और आज पूरा देश बीमार हो गया।



हमें बीमार करने में हमारे सुपर स्टारों का बहुत बड़ा योगदान रहा, अमिताभ बच्चन जी पेप्सी बेचते थे, पेप्सी पीकर बीमार भी हुए, प्रचार करना तो उन्होंने छोड़ दिया, लेकिन एक बार अपने चाहने वाले को ये बता सकते थे की हमने पेप्सी बेचना छोड़ दिया क्योंकि यह हानिकारक है, अब तुम भी मत पीना। लेकिन नहीं बताएँगे क्योंकि उनको हमारे स्वस्थ की चिंता नहीं है, उनकी दुकानदारी चलनी चाहिए, हमारे देश के भारत रत्न भी विज्ञापन के मैदान में है, वो भी आपको बता रहें है की आपको कौन सा बिस्कुट खाना है, कौन सा इन्वर्टर लगाना है।

मित्रों, हमारे दादा दादी नाना नानी आदि जो भोजन किया करते थे वह सर्वश्रेस्ट था, वे लोग अपनी लम्बी और स्वस्थ जीवन को जिया है।

विज्ञापन देखकर उसे अपने जीवन में न अपनाये, चाहे विज्ञापन करने वाला कितना भी बड़ा सुपर स्टार या भारत रत्न ही क्यों न हो।

उसे अपने सम्मान का मर्यादा नहीं है, हमें हमारे और हमारे परिवार के स्वस्थ की जिम्मेवारी हमारी खुद की है, अपने पूर्वजों से सीखिए इन सुपर स्टार को अपने जीवन में दखलअंदाजी मत करने दीजिये।

हम टीवी के इस चर्चा को आगे भी जारी रखेंगे।

आप मेरी बात को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसके लिए आपका बहुत आभार। अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिये।

आभार 

सोहन कुमार 

08.08.2020



 

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