29 मई 2021

भारत के मुसलमान ( भाग-1) (भारत - इजरायल सम्बन्ध)

 मित्रों,

इस देश के वो मुसलमान.. जो इस देश को अपना देश मानते हैं और इस देश को आगे बढाने में लगे हैं मैं उनका अभिनन्दन करता हूँ।

मैं यदि स्वतंत्र भारत के महापुरुषों का सूचि बनाऊँ तो सबसे ऊपर में डा अब्दुल कलाम का नाम लिखूंगा।

लेकिन हमारे इसी देश में जिन मुसलमानो को पाकिस्तान और अरब देश प्रिये हैं.. जो कश्मीर में धारा 370 हटाने के विरोध में खड़े हैं…. जो इजरायल को समर्थन देने से नाराज हो सकते हैंजो भारत तेरे टुकड़े होंगे इंसा अल्ला-इंसा अल्ला की नारा लगाते हैंमैं उनको फांसी पर लटका देने का सिफारिश करूँगा।

भारत के विरोध में सिर्फ मुस्लिम ही नहीं खड़े हैं कुछ मुस्लिम नस्ल के सेक्युलर टाइप हिन्दू भी खड़े हैं।

आजकल इजरायल फिलिस्तीन युद्ध चर्चा का विषय है। इस लेख में हम इजरायल भारत सम्बन्ध और इजरायल से सिखने योग्य बातों की चर्चा करेंगे।

एक स्वतंत्र देश बनने के वक़्त में भारत और इजरायल के बीच महज नौ महीने का फ़र्क़ है। 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र देश बना और 14 मई, 1948 को इजरायल।

इजरायल बनने की जो कहानी है वो यहुदिओं के अत्याचार से शुरू होता है। यहूदी धर्म का जन्म पैगंबर इब्राहिम से माना जाता है, जो ईसा से 2000 साल पहले हुए थे । जर्मनी में हिटलर शासन के दौरान 60 लाख यहुदिओं की हत्या कर दी गई थी जिसके बाद यहुदिओं ने धर्म के आधार पर एक देश का निर्माण किया।

हिटलर शासन के दौरान 60 लाख यहुदिओं को मार् दिया गया था और यहुदिओं के पास इसका डाटा है परन्तु पिछले 1400 वर्षों से अब तक मुसलमानों द्वारा (अफगानिस्तान,पाकिस्तान,बांग्लादेश, ईरान आदि देशों में और भारत के कश्मीर,केरल, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में) कितने हिन्दुओं का हत्या हुआ है और कितने हिन्दुओं को मुस्लिम बना दिया गया इसका हमारे पास ना कोई डाटा है और ना ही हमने इसके लिए कभी कोई चिंता किया।

आज दुनियाँ में हिन्दुओं की वही हालत है जो इजरायल बनने से पहले यहुदिओं की थी।

दुनियाँ में इजरायल ही एक ऐसा देश है की यहूदी चाहे किसी देश में रह रहा हो वो जब चाहे इसराइल में आकर रह सकता अर्थात यहूदी चाहे किसी भी देश में जन्म ले उसे इजरायल की नागरिकता स्वतः मिल जाती है।

इस देश को मान्यता देने के लिए हमारे अरब प्रेमी श्रीमान नेहरू जी को अत्यंत कष्ट हो रहा था। नेहरू जी को महान वैज्ञानिक आइंस्टाइन ने 4 पन्ने का एक पत्र लिखा और इजरायल को मान्यता देने का आग्रह किया।

ध्यान दीजिये आइंस्टाइन कोई राजनेता नहीं थे.. वे वैज्ञानिक थे.. वे भी यहूदी थेऔर यहूदी के लिए अलग देश के निर्माण की दिशा में पहल कर रहे थे।

आइंस्टाइन को लगता था कि अगर इस तरह का कोई देश बनता है तो यहूदियों से जुड़ी संस्कृति, और दुनिया भर में बिखरे यहूदियों के बीच एक भरोसा जगेगा।

हमारे हिन्दू धर्म के लोग यदि विज्ञानं से दसवीं पास कर लिया तो अपने को वैज्ञानिक सोच और सेक्युलर समझने में बड़ा गौरवान्वित महसूस करता है। ध्यान दो आइंस्टाइन उस समय भी और आज भी दुनियाँ के महानतम वैज्ञानिक हैं ।

नेहरू फिलिस्तीन के बंटवारे को लेकर सहमत नहीं थे। नेहरू को यहुदिओं के दर्द का अहसास नहीं था उनको इजरायल में रह गए मुसलमानों का चिंता सता रहा था।उनका कहना था कि फिलिस्तीन में अरबी सदियों से रह रहे हैं। यह यहूदी देश बनेगा जो उचित नहीं होगा। नेहरू ने आइंस्टीन की चिट्ठी के जवाब में यही कहा भी था।

उसी काल खंड में पाकिस्तान में रह गए हिन्दुओं के ऊपर अत्याचार पर भी नेहरू और गाँधी मौन रहा करते थे और भारत में भी मुस्लिम हिन्दुओं पर अत्याचार कर सके इसकी उन्होंने पुख्ता इंतजाम कर दिया था, मुस्लिम पर्सनल लॉ आदि को मान्यता देकर। और जो हिन्दू पाकिस्तान में अपनी जमीन जायदाद छोड़कर भारत आये थे उनकी सुध लेने वाला उस समय भी कोई नहीं था।

नेहरू ने आइंस्टीन की बात तो नहीं मानी लेकिन जब अमेरिका ने माँ-बहन किया तब झख मारकर नेहरू को 17 सितंबर, 1950 को आधिकारिक रूप से इजरायल को संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देना पड़ा। हालांकि ऐसा करने के बाद भी भारत और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध नहीं रहा।

भारत ने 1992 में इजरायल के साथ राजनयिक संबंध बहाल किया, जब भारत में पीवी नरसिंहराव प्रधानमंत्री बने।

नरेंद्र मोदी से पहले कोई भी प्रधानमंत्री इजरायल नहीं गया था।

अब नेहरू के इस अरब (मुस्लिम) प्रेम से अरब ने भारत का कितना साथ दिया ये भी जान लीजिये -

1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में भारत को अरब देशों का साथ नहीं मिला और उन देशों ने इस्लामिक देश पाकिस्तान का साथ दिया। लेकिन इजरायल ने भारत का साथ दिया और सैन्य सामान भी।

उस समय के एक पूर्व भारतीय राजनयिक प्रोफ़ेसर अदारकर के एक लेख का हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने पूछा था, ''हमें अरब देशों के साथ रहने से क्या हासिल हुआ? इससे न तो हमारी न्याय को लेकर प्रतिबद्धता में प्रतिष्ठा बढ़ी और न ही कोई राजनीतिक फ़ायदा मिला.''

1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया तो नेहरू ने इजरायल से मदद मांगी। यरूशलम के इसराइली अर्काइव के दस्तावेजों के मुताबिक 1962 में जब भारत-चीन युद्ध चरम पर था तब इसराइली पीएम डेविड बेन ग्यूरियन ने नेहरू से पूरी सहानुभूति दिखाई और उन्होंने भारतीय बलों को हथियार मुहैया कराने की पेशकश की।

इन दस्तावेजों के मुताबिक भारत उन जलजहाजों से हथियार लाना चाहता था जिन पर इजरायल के झंडे नहीं लगे हों लेकिन इजरायल का कहना था कि बिना इसराइली झंडे के हथियार नहीं भेजे जाएंगे।

बेशर्मी की हद देखिये जो देश हमें मुसिबत में मदद करने को तैयार है उसके झंडे से हमें परहेज है….कहीं इस देश के मुसलमानों को बुरा न लग जाय।

इसके अलावा करगिल युद्ध में भी इजरायल ने भारत का साथ दिया था।

जड़ा सोचियेजब हम पाकिस्तान से लड़ते हैं तो अरब देश पाकिस्तान का साथ देतें है….हर बार इजरायल ने हमारा साथ दिया और हमारे देश के मुस्लिम इजरायल के विरोधी है और अरब का समर्थन करते है। क्या ये देशद्रोही मुसलमान नहीं है ? इनको अपना देश प्यारा है या फिलिस्तीन या पाकिस्तान में रह रहे मुस्लमान।

अब इजरायल के क्षेत्रफल और आवादी का चर्चा करते हैं -

इजरायल का क्षेत्रफल 20,700 वर्ग किलोमीटर जो अपने देश के मणिपुर राज्य के बराबर है। बिहार राज्य में 4 इजरायल समा जायेगा। इससे अधिक जमीन (38,000 वर्ग किमी) तो स्वतंत्र भारत से चीन ने छीन लिया है और पाकिस्तान जैसा कंगाल मुल्क भी हमारे देश के लगभग 78,000 वर्ग किलोमीटर भू-भाग पर अवैध कब्जा जमा रखा है।

इसकी आवादी 1 करोड़ है (हमारे दिल्ली की जनसँख्या 2 करोड़ है) जिसमे 20% (20 लाख) अरब मुस्लिम हैं। अरबों को भी वहां यहूदियों की तरह ही अधिकार दिए गए हैं। सिर्फ मुस्लिम देश में अल्प्सख्यकों को सताया जाता है। (इसकी चर्चा अगले लेख में करेंगे)।

अब इजरायल के ताकत को देखिये -

इजरायल 13 मुस्लिम दुश्मन देशों से घिरा हुआ है। ये हैं मिस्र, सीरिया, जॉर्डन, लेबनान, इराक, अल्जीरिया, कुवैत, लीबिया, मोरक्को, सऊदी अरब, फिलिस्तीन, सूडान और ट्यूनीशिया……… फिर भी सुरक्षित है……. हमें एक छोटा सा कंगाल देश पाकिस्तान नाक में दम करके रखा है।

इजरायल की एयरफोर्स अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथे नंबर पर है।

इजरायल दुनिया को इकलौता देश है जो एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम से लैस है।

अमेरिका की सिलिकॉन वैली के बाद सबसे ज्यादा 3500 टेक्नोलॉजी कंपनियां यहीं हैं।

इजरायल में पहला मोबाइल फोन मोटोरोला बना। पहला एंटी वायरस और पहली वॉइस मेल तकनीक भी इजरायल ने बनाई थी।

1 करोड़ आवादी वाले इस देश में 30 लाख सैनिक है और महिला भी बराबर की संख्या।

15 साल की उम्र में बच्चों के आर्मी ट्रेंनिंग शुरू हो जाती है।

लड़को को 3 शाल और लड़किओं को 2 शाल सेना में काम करना अनिवार्य है।

हम महान लोग इस महान देश के 15 टुकड़े कर चुके है आज भी हमारे देश के विश्वविद्यालय में भारत तेरे टुकड़े होंगे की नारा लगाया जाता है और उसके बचाव में कई राष्ट्रीय पार्टी के लोग खरे हो जाते हैं।

एक छोटा सा देश इजराइल एक महाशक्ति के रूप में उभर गया और हम..... सेक्युलर भारत के मुसलमानों को प्रसन्न करने में लगे है।

हमलोग कितने हिंदुओं की हत्या और भारत के कितने टुकड़े होने के बाद इजरायल की तरह सोचना शुरू करेंगे ???

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आभार

सोहन कुमार

मोगा, पंजाब दिनांक – 29.05.2021 (शनिबार)) (बैशाख कृष्ण - गणेश चतुर्थी )





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