15 अगस्त 2020

आजादी की कहानी (भाग-1)

 

सभी मित्रों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक सुभकामना।

15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ, यह बात सबको ज्ञात है, लेकिन इससे पहले 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिन्द सरकार की स्थापना कर ली थी।

आपने सुना होगा आजाद हिन्द फ़ौज, वह फ़ौज नहीं सरकार थी।

आजाद हिंद सरकार का अपना बैंक था, जिसका नाम आजाद हिंद बैंक था। आजाद हिंद बैंक ने दस रुपये के सिक्के से लेकर एक लाख रुपये का नोट जारी किया था। सिर्फ बैंक व मुद्रा ही नहीं, इस सरकार का अपना डाक टिकट व अपना ध्वज भी था। आजाद हिन्द फ़ौज में 40000 सैनिक थे I

इस सरकार को जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी थी ।

आजाद हिंद सरकार के 75 साल पूर्ण होने पर इतिहास मे पहली बार साल 2018 मे नरेंद्र मोदी ने किसी प्रधानमंत्री के रूप में 15 अगस्त के अलावा लाल किले पर तिरंगा फहराया।

मैं स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों को ह्रदय के अंतःकरण से नमन करता हूँ, जिन्होंने इस देश को अपना परिवार और इस देश के लोगों को अपना संतान से भी बढ़ कर समझा, अपने परिवार या संतान के लिए भी कोई इतना बड़ा बलिदान नहीं करता।

उनकी मुक्ति के लिए मुझे ईश्वर से प्रार्थना का जरुरत नहीं है, क्योंकि स्वर्ग में ईश्वर उनका प्रार्थना कर रहे होंगे।

मैं अपने देश के स्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ा योगदान हिटलर को मानता हूँ, जिसने उस समय इस संसार को विश्व युद्ध में झोक कर अंग्रेजी साम्राज्य को अपंग बना दिया और अंग्रजी साम्राज्य के कई देश आजाद हो गए।

हिटलर को मैं सारे संसार से अंग्रजी साम्राज्य के पतन का सबसे कारण मानता हूँ। वरना अपने राष्ट्र पिता या राष्ट्र चाचा से यह देश आजाद होने वाला नहीं था।

मैं महात्मा गाँधी के व्यक्तिगत जीवन के आदर्श को अपने जीवन में अपनाने का वर्ष 2000 से सतत प्रयास कर रहा हूँ जबसे मैं उनके जीवनी " आत्मकथा '' को पढ़ा।

परन्तु उन्होंने अपने राजनितिक भूल को तब तक नहीं सुधारा जा सकता जब तक भारतीय रुपयों से उनका तस्वीर नहीं निकल जाता।

जब मैं उनकी राजनितिक मज़बूरी को समझने का कोशिस करता हूँ तो मुझे उनके देशप्रेम पर तो कोई संदेह नहीं होता लेकिन उनका नेहरू प्रेम/मुस्लिम प्रेम भी देश प्रेम से कम नहीं था।

और मैं नाथूराम गोडसे को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा देशभक्त मानता हूँ, क्योंकि गाँधी का नेहरू प्रेम/मुस्लिम प्रेम, सब्र के इम्तिहान से आगे बढ़ गया था। वे भारत के एक और होने वाले विभाजन की हर सम्भावना का अंत कर दिए।

आज नाथूराम गोडसे के इस भाषण को सुनिए जिसे वर्षों तक प्रतिबंधित रखा गया था। हमारी पाठ्य पुस्तके बापू और चाचा के गुणगान से भरी पड़ी थी।

https://www.youtube.com/watch?v=BSUTpyhz7xA

मैं इस लेख को जारी रखूँगा ......................

आप मेरी बात को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसके लिए आपका बहुत आभार। अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिये।

आभार

सोहन कुमार

15.08.2020



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