कृष्णाष्टमी की हार्दिक शुभ कामना
आज कृष्ण जन्माष्टमी है, कृष्ण को इस धरती पर इसलिए आना पड़ा कि यदि महाभारत के समय राम होते तो पांडव युद्ध हार जाते। मेरे राम को पता है कि किस युद्ध को कौन जीत सकता है ?
मेरे राम को पता है कि आधुनिक भारत का निर्माण कौन कर सकता है ?
हमारे धर्म में 36 प्रकार के देवता है, इसे राम विरोधी तत्वों ने हमें मुर्ख बताने के लिए 36 करोड़ देवता बताते है, कोटि का अर्थ प्रकार भी
होता है और करोड़ भी।
हमें मुर्ख बताने के लिए हमारे मनोरंजन के साधन सिनेमा ने
भी बड़ी अदाकारी की है। किसी भी सिनेमा को आप याद कीजिये उसमे एक पंडित मिलेगा जो
ढोंगी होगा और एक किसी अन्य धर्म का लोग होगा जो ईमानदार, और सच्चा होगा। आपने शोले देखा होगा जिसमे धर्मेन्दर शिव
मंदिर में हेमा मालिनी को छेड़ता है, जैसा
राहुल गाँधी बोलते थे की मंदिरों में लड़किओं को छेड़ा जाता है। ये आज कल की बात
नहीं है, आज कल तो वे जनेव धारी
ब्राह्मण हो गए है। और उसी फिल्म में हंगल एक मुस्लिम किरदार है, जिसका बेटा मारा जाता है
और मस्जिद से जब अजान होता है तो वो ये कहकर नवाज पढ़ने चला जाता है की अल्ल्ह ने
उसे शहीद होने के लिए और बेटा क्यों नहीं दिया ?
मैंने एक उदहारण दिया आपको जो फिल्म याद हो याद कर लीजिये, हमें मुर्ख और पाखंडी
साबित करने का इस तरह से ब्यूह रचा गया है कि अब हमें भी ये यकीन होने लगा है कि
हम मुर्ख और पाखंडी है।
जबकि हकीकत ये है कि कश्मीर के हर मस्जिद से एक समय में लाउड स्पीकर पर ये एलान होता था कि हमें कश्मीर चाहिए हिन्दू मर्द के बिना, लेकिन हिन्दू औरत के साथ। उस मस्जिद से अल्ला उसी समय चले गए होंगे अब वहां नवाज पढ़कर कोई लाभ नहीं होगा।
एक मिस्टर परफेक्ट है आमिर खान उनका फिल्म pk देखिए, उनको सभी बुराइयां सिर्फ
हिन्दू धर्म में ही दिखाई देता है। इनको ये देश आज untolrance लगता है, इनकी बीबी को डर लगता है।
गुलशन कुमार कि हत्या, सुशांत सिंह का संदिग्ध आत्महत्या, दाऊद का फिल्म जगत में वर्चस्व …..इस तरह कि घटनाएं राम बिरोधी होने का बदबू देता है।
मैं इन लोगों के फिल्म को नहीं देखने का
सिफारिश करता हूँ।
हमारे देश में एक महान चित्रकार हुए मक़बूल फ़िदा हुसैन इन्होने सरस्वती का नग्न चित्र बनाया और 1966 में भारत सरकार ने उन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया।
तस्लीमा नसरीन अपनी पुस्तक लज्जा के लिए,बांग्लादेश में उनपर जारी फ़तवे के कारण आजकल वे कोलकाता में निर्वासित जीवन जी रही हैं। सलमान रुश्दी को अपनी पुस्तक द सैटेनिक वर्सेज़ के लिए ईरान सहित कई मुस्लिम देश कि सरकार ने फतवे जारी कर, उनके मौत के लिए ईनाम की पेशकश की है। और हम पद्मश्री से सम्मानित करते है।
मैं एक बार फिर से जोड़ देकर कहता हूँ कि मैं हिन्दू हूँ जो सब धर्म को सामान भाव से देखता हूँ। मैं तो तुलसी बाबा के इस भाव में जीता हूँ -
तुलसी इस संसार में, भांति भांति के लोग I
सबसे हस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग
II
मेरे राम जारी रहेंगे………..
आप मेरी बात को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसके लिए आपका बहुत आभार। अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिये।
आभार
सोहन कुमार
11.08.2020
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