अभी मैं सोशल मीडिया पर कुछ तथाकथित बुद्धिजीविओं के वक्तव्य को देख रहा था, कि हमें राम मंदिर का नहीं बल्कि विकास, अस्पताल, GDP कि बात करना चाहिए। इस आधुनिक युग में राम मंदिर का बात करना अप्रासंगिक है।
मित्रों मैं आपको नालंदा विश्वविद्यालय या राम जन्मभूमि मंदिरों सहित लाखों हिन्दू मंदिरों के विध्वंस के मुग़ल कालीन पूरानी बातों को नहीं बल्कि आधुनिक और स्वतंत्र भारत की आज से सिर्फ 30 साल पहले की बात याद दिलाता हूँ, जब 19 जनवरी 1990 को 5 लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से बहार निकलना पड़ा इस दौरान सैकड़ों मंदिर तबाह कर दिए गए, हजारों लोगों की जाने गयी, हजारों हिन्दू महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और बलत्कार करने के लिए हर जगह आतंकबादी नहीं पहुंचा था, बल्कि पड़ोसिओं ने बलत्कार किया, स्कूल के छात्रों ने शिक्षिकाओं को सड़कों पर सामूहिक बलत्कार किया।
आप जानते है क्यों ? क्योकि वहां हिन्दू अप्लसंख्यक हो गए।
और हमारा देश 1976 में सेक्युलर हो गया था।
इस मामले की न तो कोई SIT जांच हुई और न ही किसी आयोग का गठन किया गया। सजा की बात दूर है आज तक किसी को दोषी भी नहीं ठहराया गया।
इस बात की चर्चा यदि आप करेंगे तो आप सेक्युलर नहीं रह
जायेंगे। अब आप हिन्दू पर अत्याचार की चर्चा नहीं कर सकते। हमारे संबिधान का अपमान
हो जायेगा।
मित्रों वहाँ कश्मीरी पंडितों ने बहुत विकास किया था, उनके बड़े-बड़े सेव के बगान और सुन्दर महल थे, वे शिक्षित और बुद्धिजीवी हैं। 30 वर्षों से शरणार्थी शिविर में जीवन व्यतीत कर रहें है।
ठीक एक साल पहले 05.08.2019 को कश्मीर से धारा 370 और 35 A को हटाया गया था, मैं उस समय टीवी पर रवीश कुमार का रिपोर्ट देखा था जिसमे उसने कश्मीरी को इंटरनेट नहीं होने के तकलीफों का सरकार पर जिस मुस्कानी अंदाज में आलोचना कर रहा था। उस दिन के बाद से मैं रवीश कुमार का रिपोर्ट नहीं देखता हूँ, अब मुझे उसकी मुस्कान जहरीली दिखती हैं।
रवीश कुमार उस चर्चा के दौरान कश्मीरी पंडितों के लिए सिर्फ
एक वाक्य बोला - " कश्मीरी पंडितों के साथ यहाँ जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण
था।" क्या इंटरनेट का नहीं होना इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण हैं ? मैं आपसे भी आग्रह करता हूँ की यदि आपने उस समय के रवीश
कुमार का रिपोर्ट नहीं देखा हैं तो एक बार यू ट्यूब पर देखिये। उसके धूर्तता को देख पाएंगे।
हमारे देश में आतंकवादी के लिए जिसे फांसी की सजा हो चुकी है उसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा 12 बजे रात को खुल जाता है। 5 लाख हिन्दू के लिए 30 साल से सुप्रीम कोर्ट में कौन सा ताला लगा हुआ है ?
मुगलों ने यदि मंदिर तोड़ा तो हम भूल जायेंगे। मेरे राम, क्षमा को सबसे बड़ा धर्म मानते है। मन की शांति के लिए इससे बड़ा कोई साधन नहीं हैं।
परन्तु आजाद भारत में आज राम के धैर्य की परीक्षा पूरी हो गयी। उनका आगमन हो गया। मेरा इरादा किसी भी वर्ण को अपमानित करना नहीं हैं, मेरे राम को किसी भी वर्ण या जाती से परहेज नहीं हैं, सारा जगत उन्ही के संतान हैं।
मेरे राम जारी रहेंगे………………………………………..
आप मेरी बात को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसके लिए आपका बहुत आभार। अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिये।
आभार
सोहन कुमार
080.08.2020
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें