01 अक्टूबर 2020

मेरे आँखों का ओपरेशन

 

मित्रों,

मेरे आँखों का ओपरेशन कोई राष्ट्रीय समाचार नहीं है, जिसे आपको बताया जाना चाहिए। फिर भी मै आपलोगोंने के साथ इस घटना को इसलिए शेयर करना चाहता हूँ ताकि यदि आपको या आपके परिचितों में किसी को भी आँखों के मोतियाबिंद का ओपरेशन करवाना हो तो यह लेख आपके लिए है।

मैं जानता हूँ कि आपका समय अनमोल है, और आप स्वयं भी अनमोल हैं, इसलिए मैं हर पंक्ति को लिखते समय इस बात का ध्यान रखता हूँ।

कई वर्षों से मेरे आँखों में मोतियाबिंद कि शिकायत थी और डॉक्टर मुझे ऑपरेशन कि सलाह दे रहे थे, लेकिन मैं ऑपरेशन को छोड़कर कोई अन्य बिधि से मोतियाबिंद के इस शिकायत को समाप्त कर लेना चाहता था जिसमे मैंने पतंजलि के आईड्रॉप, गौमूत्र आदि का प्रयोग किया। पतंजलि का आईड्रॉप लेना हर दिन किसी ऑपरेशन से कम तकलीफदेह नहीं रहा। मैं पतंजलि के आईड्रॉप का आलोचना नहीं कर रहा हूँ, बल्कि आज तक, इतने दिनों से मोतियाबिंद होने के बाद भी मेरे आँखों की ज्योति अच्छी है तो मैं इसका श्रेय पतंजलि के आईड्रॉप को देता हूँ लेकिन उसका उपयोग तकलीफदेह जरूर रहा।

11.09.2020 ( शुक्रवार) को मेरा चश्मा हाथ से गिर गया और कांच फ्रेम से बहार निकल गया। बिना चश्मे का मैं मोबाइल मे नाम भी नहीं पढ़ पता था। मेरे बच्चों ने फ्रेम मे कांच को लगा कर अस्थायी व्यवस्था कर दिया परन्तु चश्मे का स्थायी व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक था। मैं बच्चों के साथ लुधियाना के TITAN शोरूम मे गया। नंबर जाँच के दरम्यान वह डॉक्टर मुझे बतलायी की आपको मोतियाबिंद है, जो मुझे मालूम ही था, लेकिन साथ मे उसने ये भी बतलायी कि यदि आप ओप्रशन करवाने मे देर करेंगे तो आपके आँखों कि ज्योति कम हो सकती है और बाद मे पूरी तरह समाप्त भी हो सकती है।

TITAN शोरूम के उस महिला डॉक्टर को अपने चश्मे बेचने से अधिक मेरे आँखों के ज्योति कि चिंता थी। व्यवसाय मे मानवीयता का स्थान आप किसी भी TATA उत्पाद मे पाएंगे।

TITAN शोरूम के बगल मे ही ASG Eye Hospital था, मैंने वहां जाँच करवाया और ऑपरेशन के सम्बन्ध मे जानकारी लिया। अब यहाँ से समझने जैसी बात है, डॉक्टर आपको ये बात नहीं बताएँगे जो मैं बता रहा हूँ। डॉक्टर ने मुझे बताया कि कई मरीज तो ऑपरेशन करवाने के 2 घंटे के बाद खुद ड्राइव करके अपने घर चले जाते है। डॉक्टर आपको एक भी दिन आराम करने का सलाह नहीं देंगे, वे बताएँगे कि अगले दिन से आप अपना सभी काम पूर्ववत आसानी से और सहजता पूर्वक कर पाएंगे। वे आपको इतना आसान बताएँगे जैसे कोई मामूली इंजेक्शन लेने जैसी साधारण घटना हो।

मुझे तो इंजेक्शन लेने जैसी घटना भी दुखदायी लगती है, मुझे दुःख का अनुभव ही नहीं है, न मन मेँ, न तन मेँ, न विचारों मेँ और न भावनाओं मेँ।

अब मैं आपको इस ऑपरेशन मेँ होने वाले खर्चे के बारे मेँ बताता हूँ। अभी ऐसा हो गया है कि मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद आपको लेंस लगा दिया जाता है। जिसकी कीमत 10 हजार से लेकर 1 लाख प्रति आँख होती है। जो लेंस भारत मेँ बना है उसकी कीमत कम है परन्तु डॉक्टर आपको उसकी गुणवत्ता को लेकर उसकी सलाह नहीं देंगे। इन लेंसों के कीमत का जो खेल है वह मेरे समझ मेँ नहीं आया लेकिन भारत मेँ इस तरह के लेंसों का निर्माण क्यों नहीं होता है जिसे लगाने के लिए डॉक्टर आपको प्रोत्साहित करे ? यह दुखद है। मैं भी विदेशी लेंसों का चुनाव किया जिसे लगाने के बाद चश्मे कि आवश्यकता नहीं थी।

15.09.2020 (गुरुबार) को मेरे दाहिने आँख का ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के दरम्यान बहुत तकलीफ नहीं हुआ। 15 मिनट मेँ ऑपरेशन भी हो गया और लेंस भी लगा दिया गया।

ऑपरेशन होने के बाद जो निर्देश दिया गया उसे सुन लीजिये - कुछ दिनों तक आपको अपने बाल नहीं धोने है, क्योंकि इससे आपके आँखों मेँ पानी चले जाने का संभावना होता है, जो अच्छा नहीं है। आँखों मेँ पानी नहीं जाना चाहिए। पुरे दिन आपका आँख भीतर से दर्द शब्द ठीक नहीं होगा, इस खुजलाना बोल सकते है। पूरा दिन वह खुजलाता रहेगा और जब आप सोने जायेंगे तो वह खुजलाना बढ़ जायेगा, अब आपका पूरा ध्यान खुजलाने पर चला जायेगा और नींद आना कठिन हो जायेगा। आपको ऑपरेशन के बाद एक चश्मा दिया जायेगा जिसे सोते समय भी पहनना है, ताकि आप गलती से भी आँख को खुजला न ले।

मैं 20.09.2020 (रविवार) को पुनः हॉस्पिटल गया जाँच करने के लिए बुलाया था मुझे। मैं 5 दिनों से एक आँख को लेकर परेशान था ही, मैंने डॉक्टर से पूछा कि मैं अपने दूसरे आँख का ऑपरेशन का कब करवा सकता हूँ, उसने बताया अभी करवा सकते है, मैंने सोचा एक आँख का तकलीफ झेल ही रहा हूँ एक साथ दोनों आँखों के समस्या से एक साथ निवृत हो जाऊंगा और मैंने दूसरे (बाएं) आँख का ओप्रशन भी उसी दिन करवा लिया।

आज 16 दिन हो गया मैं अच्छे से स्नान नहीं किया हूँ जो दिन रात मिलकर ३ बार किया करता था। न ही अच्छी नींद सो पा रहा हूँ, मन भी प्रफुल्ल्त नहीं है, चिरचिरापन है। कब अपने सहज अवस्था में आऊंगा पता नहीं।

मैं ऐसा सोचता हूँ की यदि ओप्रशन के बाद मैं कम से कम 5-5 दिन पूरी तरह आराम कर लेता तो शायद इतना तकलीफ नहीं होता। डॉक्टर के बहकावे में आकर मैं ओपरेशन के दूसरे दिन से ही ऑफिस जाने लगा था। आज भी ऑफिस जा रहा हूँ परन्तु अपने क्षमता का 25% भी काम नहीं कर पा रहा हूँ।

अब मैं इस ओपरेशन से होने वाले लाभ का चर्चा करूँगा जो मुझे इस तकलीफ को सहन करने की क्षमता प्रदान करता है :-

मैं अब बिना चश्मे के किताब पढ़ सकता हूँ, मोबाइल के छोटे अक्षरों को भी पढ़ सकता हूँ। ये काम तो चश्मा लगाने के बाद पूरा हो सकता था, जो काम चश्मा लगा कर भी नहीं हो सकता था वो है आँखों का चमक बढ़ जाना।

मुझे अपने बच्चे पहले से अधिक सुन्दर दिखने लगे। दर्पण में देखने पर मैं खुद भी अधिक सुन्दर दिखने लगा। अपने बच्चों को तो मैं उसके जीवन के पहले दिन से देख रहा हूँ इसलिए उसकी क्षवि तो मेरे मन में थी, लेकिन अपने बहुओं को मैं जब से देख रहा हूँ तो उसे शुरू से मोतियाबिंद वाले आंखों से ही देख रहा हूँ। इसलिए वो मुझे बिलकुल ही अलग और बहुत सुन्दर दिखी। इसके अलावा वो सभी लोग जिनसे मैं नियमित मिलता हूँ वो मुझे अधिक ख़ूबसूरत दिख रहें है। मेरा विस्तर, मेरा घर, पेड़, पक्षी, फूल, आकाश सब कुछ मुझे नया नया लग रहा है।

आपको या आपके परिचितों को मोतियाबिंद की शिकायत है तो उसका ओपरेशन जरूर करवा लें, थोड़ी सावधानी रखकर, दुनियां अधिक रंगीन हो जाएगी।

आप मेरी बात को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसके लिए आपका बहुत आभार। अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिये।

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 आभार

सोहन कुमार

01.10.2020



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