मित्रों
अलीनगर विधानसभा सीट पर 16 अक्टूबर तक
नॉमिनेशन फाइल होंगे और 19 अक्टूबर तक
उम्मीदवार अपना नामांकन वापस ले सकेंगे। तब तक सभी
उम्मीदवार अपने- अपने संभावनाओं को तलाश कर रहें है।
19 अक्टूबर के बाद प्रत्याशिओं और पार्टिओं की स्थिति पूर्णतः स्पस्ट हो सकेगा।
मैं बिहार के सभी मतदाताओं से निवेदन करता हूँ कि आप अपनी समझ और श्रद्धा से जिसे भी वोट देना चाहे जरूर दें, और आपका मित्र या पडोशी या कोई भी किसी दूसरे उम्मीदवार या पार्टी को वोट देना चाहता है, तो उसका विरोध न करे I यदि समझाना चाहते है तो समझा दे, लेकिन किसी भी तरह का मनमुटाव या द्वेष की भावना ना रखे।
भारत की राजनीती में दो ही पार्टी है, एक नेताओं की पार्टी और दूसरा मतदाताओं की। ये सारे नेता एक ही है, कौन कब किस पार्टी में चला जायेगा आप अनुमान भी नहीं लगा सकते। ये हमें आपस में लड़ाते है, हमें मुर्ख बनाते है और हम लड़ बैठते है कई बार हम अपनी जान गावं बैठते है…… किसके लिए ? जो कभी भी अपना पार्टी बदल सकता है उसके लिए ?
चुनाव में हिंसा को तब तक नहीं रोका जा सकता जब तक हम अपनी मूर्खता ना छोड़ दे।
चुनाव के बाद ये नेता हमें दिखेंगे नहीं, परन्तु हमारे भाई बंधू हमेशा हमारे साथ रहेंगे इसलिए किसी नेता के बहकावे में आकर अपने निजी संबंधों को कमजोर ना करें।
हमारे निजी सम्बन्ध हमारे जीवन के धरोहर हैं। 10 नवम्बर के बाद चुनावी माहौल समाप्त हो जायेगा, वो नेता उस पार्टी में जाकर मिल सकता है जिसके विरोध में आप अपने पडोशी से नफरत करने लगे थे।
हमारे देश के अधिकतर राजनितिक पार्टियाँ या नेता बिना किसी वसूल और सिद्धांत का चल रहा है। अधिकतर पार्टियाँ तो पारिवारिक पार्टी है। कभी हमारे प्रदेश में श्री मति राबड़ी देवी जैसी अशिक्षित महिला भी मुख्यमंत्री रही है। कभी यदि इस देश का प्रधानमंत्री श्री राहुल गाँधी हो जाये तो मैं अचंभित नहीं होऊंगा। इस देश के कड़ोड़ों लोगों का पसंद राहुल गाँधी है, इसके लिए मैं उसके साथ व्यक्तिगत दुश्मनी क्यों रखूँ ? ये उसके विचार है, मेरे विचार से मेल नहीं बैठता है तो कोई बात नहीं I
यदि वह मेरे बात को नहीं समझ पाता है या मैं उसके बात को नहीं समझ पाता हूँ, इसका मतलब ये नहीं की वो हमारा दुश्मन है, इसका सीधा सा इतना ही मतलब है कि इस विषय में हमारे विचार अलग हैं।
जिस तरह मुझे उसके बुद्धिमत्ता पर संदेह होता है, उसी तरह उसे भी मेरे बौद्धिक क्षमता पर संदेह होता होगा की यह कितना बुद्धिहीन है की इसको श्री राहुल गाँधी के व्यक्तित्व का भी ज्ञान नहीं है ?
किसी के मान्यता को बदलने का हिंसक प्रयास मत कीजिये, अपनी मान्यता पर अडिग रहिये।
चुनावी माहौल का आनंद लीजिये भावनाओं में मत बहिये।
मैं किसी राजनितिक मान्यता से नहीं बँधा हूँ, अलीनगर विधान सभा क्षेत्र से मुझे कभी वोट भी नहीं देना है। परन्तु वर्तमान सामयिक विषयों पर अपना विचार लिखते रहता हूँ।
आप मेरी बात को बहुत ध्यान से पढ़ते है, इसके लिए आपका बहुत आभार। अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिये।
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लीजिये यदि आप मेरे विचारों से सहमत नहीं रहते है तब भी।
आभार
सोहन कुमार
12.10.2020
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